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General Science
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परमाणु बम का सिद्धांत?

Detailed Explanation

विखंडन।
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→ चुंबकीय क्षेत्र? → विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक तार की लंबाई को खींचकर दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है, बशर्ते उसका आयतन और तापमान अपरिवर्तित रहें। 2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत उच्च यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित अवस्था में होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। 3. जब समान क्षमता के कई सेलों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है, जो तब सबसे लाभदायक होता है जब बाह्य प्रतिरोध आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक हो। 4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power dissipation) केवल धारा के वर्ग ($I^2$) और प्रतिरोध ($R$) के गुणनफल पर निर्भर करता है, और यह परिपथ में जुड़े प्रतिरोधकों के श्रेणी या समानांतर विन्यास से स्वतंत्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियमों तथा तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्थापित करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) गैस के दाब और तापमान के रैखिक संबंध पर कार्य करती है, और इसमें प्रयुक्त गैस (जैसे ही हाइड्रोजन या हीلیم) आदर्श गैस व्यवहार के अत्यधिक निकट होती है। 3. ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा का पूर्ण उपयोग उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि करने में होता है, और यह नियम ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ ऊष्मा के प्रवाह की दिशा को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। 4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता ($dQ = 0$), और ऐसे प्रक्रम में गैस का प्रसार होने पर उसकी आंतरिक ऊर्जा कम हो जाती है जिससे तापमान में गिरावट आती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय (Stomach) की मुख्य कोशिकाएँ (Chief cells या Peptic cells) पेप्सिनोजेन का स्रावण करती हैं, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है, और यह प्रोटीनों को डाइपेप्टाइड्स में तोड़ने का कार्य करता है। 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के दौरान अंतःश्वसन (Inhalation) तब होता है जब डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ (External intercostal muscles) शिथिल होती हैं, जिससे वक्षीय गुहा का आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों के भीतर का दबाव वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो जाता है। 3. हृदय के चालन तंत्र (Conduction system) में विद्युत आवेगों का संचरण स्वतः उत्पन्न होता है, जिसकी शुरुआत सिनोट्रायल नोड (SA Node) से होती है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड से होते हुए बंडल ऑफ हिस और पर्किंजे तंतुओं तक पहुँचता है। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में बेसल गैंगलिया (Basal ganglia) स्वैच्छिक मांसपेशियों की गति के सूक्ष्म नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, तथा पार्किंसंस रोग (Parkinson's disease) मुख्य रूप से मस्तिष्क के इस भाग में न्यूरॉनों के क्षय और डोपामाइन की कमी के कारण उत्पन्न होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ओजोन?
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