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General Science
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ऊर्जा संरक्षण नियम?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
न नष्ट, न उत्पन्न।
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक दीर्घकालिक जीवाणु जनित संक्रमण है जो 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' (Mycobacterium leprae) के कारण होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं तथा त्वचा को प्रभावित करता है।
2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणु जनित तीव्र न्यूरोलॉजिकल रोग है जो लिस्सावायरस (Lyssavirus) के कारण होता है, और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित करने के बाद इस रोग की मृत्यु दर लगभग 100% तक होती है।
3. 'कालाजार' (Kala-azar) एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है जो 'लिसरनिया डोनोवानी' (Leishmania donovani) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जिसका संचरण 'सैंडफ्लाई' (बालू मक्खी) के काटने से होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाश की चाल निर्भर?
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राउल्ट के नियम के अनुसार, किसी अवाष्पशील विलेय युक्त तनु विलयन के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलयन में विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के ठीक बराबर होता है, और यह गुण विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर न करके केवल कणों की संख्या पर निर्भर करता है।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन (Dissociation) की स्थिति में हमेशा एक से कम होता है, जबकि संगुणन (Association) की स्थिति में इसका मान एक से अधिक होता है।
3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' के 'अधिशोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, अभिकर्मक अणु उत्प्रेरक की सतह पर आकर अधिशोषित होते हैं, जिससे उनकी प्रभावी सांद्रता में वृद्धि होती है और अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) का मान कम हो जाता है।
4. 'एन्जाइम उत्प्रेरण' की क्रियाविधि में 'माइकलिस-मेंटेन नियतांक' ($K_m$) का मान जितना कम होता है, एंजाइम और सब्सट्रेट के बीच की बंधुता (Affinity) उतनी ही अधिक होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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छाल?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार (Lewis base) इलेक्ट्रॉन युग्म का त्याग कर सकते हैं, जिसके फलस्वरूप इनके मध्य उपसहसंयोजक बंध (Coordinate covalent bond) का निर्माण होता है।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, किसी अम्ल का 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) उस अम्ल द्वारा एक प्रोटॉन ($H^+$) त्यागने के पश्चात शेष बची हुई स्पीशीज होती है, और एक दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
3. बहुprotic अम्लों के जलीय विलयन में क्रमिक आयनन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) के मानों में सामान्यतः निरंतर ह्रास ($K_{a1} > K_{a2} > K_{a3}$) देखा जाता है, जिसका मुख्य कारण ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करने के लिए अधिक स्थिर वैद्युत आकर्षण बल के विरुद्ध अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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