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History of India
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और शिवाजी के केंद्रीय प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी ने मराठा सेना में 'पागा' (राजकीय घुड़सवार सेना) और 'सिलहदार' (अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर आने वाले घुड़सवार) दोनों प्रकार की सेनाओं का गठन किया था, और पागा सैनिकों को अधिक प्रतिष्ठित तथा राज्य द्वारा सुसज्जित माना जाता था।
- 2. 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में 'सुमन्त' (या दबीर) का मुख्य कार्य विदेश मामलों और युद्ध-शांति के समय कूटनीतिक संबंधों की देखरेख करना था, जबकि 'वाक्यनवीस' (या मंत्री) का कार्य राजा के दैनिक कार्यों, गुप्तचर विभाग और दरबारी गतिविधियों का अभिलेख रखना था।
- 3. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की राजस्व पद्धति के आधार पर भूमि की पैमाइश की नई इकाई 'काठी' को अनिवार्य बनाया, और पारंपरिक देशमुखों व पाटिल जैसे वंशानुगत राजस्व अधिकारियों को पूरी तरह समाप्त कर उनके स्थान पर सीधे सरकारी कारकुनों की नियुक्ति की।
- 4. मराठा प्रशासन में किलों (Forts) का रणनीतिक महत्व अत्यधिक था, और प्रत्येक महत्वपूर्ण किले पर सुरक्षा और प्रशासन की दृष्टि से तीन अधिकारी—हवलदार, सबनीस और कारखानीस—संयुक्त रूप से नियुक्त किए जाते थे, जिनमें से एक अधिकारी मराठा जाति का होना अनिवार्य नहीं होता था ताकि आपसी मिलीभगत को रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की पद्धति का अनुसरण करते हुए भूमि की माप के लिए 'काठी' का प्रयोग अवश्य किया था, परंतु उन्होंने पारंपरिक देशमुखों, पाटिल और कुलकर्णी जैसे वंशानुगत राजस्व अधिकारियों (वतनीदारों) के अधिकारों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया था, हालांकि उनके अधिकारों पर कड़ा नियंत्रण जरूर स्थापित किया था। मराठा प्रशासन, सैन्य संगठन और केंद्रीय व्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की कमान संभाली और ब्रिटिश सेनानायक हेनरी लॉरेंस को रेजिडेंसी में घेर लिया था, जो बाद में नेपाल की ओर निकल गईं जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को परास्त करने में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी।
3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की मदद से लखनऊ पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया, जिसके बाद मौलवी अहमदुल्लाह शाह रोहखंड चले गए जहाँ एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।
4. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की उस घोषणा का पूरी तरह स्वागत किया जिसमें अवध के नवाबों के छीने गए अधिकार वापस देने का वादा किया गया था, और उन्होंने बिना किसी शर्त के ब्रिटिश सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल प्रशासन में "वजीर" या "दीवान-ए-आला" मुख्य रूप से किस विभाग का अध्यक्ष होता था?
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने 20 फरवरी 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में यह ऐतिहासिक घोषणा की थी कि ब्रिटिश सरकार 30 जून 1948 से पहले भारत को पूर्ण उत्तरदायी सत्ता हस्तांतरित कर देगी और इसके लिए लॉर्ड माउंटबेटन को नया वाइसराय नियुक्त किया गया था।
2. लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा 3 जून 1947 को प्रस्तुत की गई 'माउंटबेटन योजना' (3rd June Plan) के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अलग-अलग बैठकर प्रांत के विभाजन पर निर्णय लेने का प्रावधान किया गया था।
3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act 1947) को ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित किया गया, जिसके प्रावधानों के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominion) अस्तित्व में आए तथा दोनों डोमिनियन के लिए पहले गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन को ही दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से स्वीकार किया गया था।
4. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग 'सीमा आयोग' (Boundary Commissions) का गठन किया गया था, जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति से ठीक पूर्व 14 अगस्त 1947 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसे तुरंत सार्वजनिक कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन और मौर्योत्तर प्रशासनिक व्यवस्था तथा आर्थिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा भूमि अनुदान (Brahmadeya/Agrahara) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया, जिसके परिणामस्वरूप धीरे-धीरे प्रशासनिक और राजकोषीय विशेषाधिकारों से युक्त सामंती प्रवृत्तियों का उदय हुआ।
2. गुप्त काल में 'गुप्तचर विभाग' को 'पुरुष' कहा जाता था और महादण्डनायक नामक अधिकारी मुख्य रूप से न्याय और सैन्य विभाग का उच्च अधिकारी होता था, जबकि 'अधिकरण' नगर स्तर का प्रशासनिक अधिकरण था।
3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में 'दिनार' स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन कुषाणों की स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में शुद्धता और वजन में कहीं अधिक उत्कृष्ट था, जो गुप्त काल के 'स्वर्ण युग' की अद्वितीय आर्थिक समृद्धि को प्रमाणित करता है।
4. गुप्तोत्तर काल के आते-आते विदेशी व्यापार में भारी गिरावट आ गई, विशेष रूप से रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंधों के क्षीण होने के कारण सिक्कों में सोने की मात्रा कम होने लगी और चांदी एवं तांबे के सिक्कों का प्रचलन भी सीमित हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के प्रावधानों एवं दूरगामी परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा 'डबल गवर्नमेंट' (बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के शासन का संपूर्ण नियंत्रण ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का गठन किया गया।
2. इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा उद्घाटित क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह आधिकारिक रूप से घोषित किया गया कि ब्रिटिश साम्राज्य अब अपने भौगोलिक विस्तार की नीति (व्यपगत सिद्धांत और राज्य-हरण की नीति) को त्यागता है और भारतीय राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देता है।
3. घोषणा में यह भी आश्वस्त किया गया कि लोक सेवाओं (Civil Services) में प्रवेश और उच्च पदों पर नियुक्तियों के समय नस्ल, रंग या धर्म को आधार नहीं बनाया जाएगा, तथा भारतीयों को उनकी योग्यता के अनुसार निष्पक्ष रूप से अवसर दिए जाएंगे।
4. इस घोषणा के उपरांत ब्रिटिश प्रशासनिक नीति में उदारवादी सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत सेना के पुनर्गठन में भारतीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाकर उन्हें सभी सामरिक रूप से संवेदनशील और उच्च पदों पर नियुक्त किया गया ताकि भविष्य में ऐसा कोई विद्रोह दोबारा न हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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