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History of India
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक स्वरूप, उनके प्रमुख संतों तथा उनकी विचारधाराओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य (परम सत्य) है और जगत एक 'माया' (भ्रम) है, जबकि इसके विपरीत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' का सिद्धांत दिया जिसके अंतर्गत जीवात्मा और जगत ब्रह्म का ही विशिष्ट अंश हैं।
- 2. सूफी सिलसिले (सिलसिला) मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे: 'बा-शरा' (जो इस्लामिक कानून यानी शरिया के नियमों का सख्ती से पालन करते थे, जैसे चिश्ती और सुहरावर्दी) और 'बे-शरा' (जो शरिया के पारंपरिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त होकर जीवन बिताते थे, जैसे कलंदरी और मदारिया)।
- 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की पारंपरिक रूढ़ियों का कड़ा विरोध किया तथा उनके शिष्यों में संत कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेना (नाई) और पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल थे।
- 4. चिश्ती सिलसिले के महान संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य निजामुद्दीन औलिया थे, जिनके दरबार में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक तक कई सुल्तानों ने व्यक्तिगत रूप से भेंट की थी, किंतु औलिया ने कभी भी किसी भी शासक से राजकीय अनुदान या वित्तीय सहायता स्वीकार नहीं की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 2 से जुड़ा एक मामूली ऐतिहासिक तथ्य यह है कि चिश्ती और सुहरावर्दी 'बा-शरा' सिलसिले के अंतर्गत आते थे, किंतु ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और शिष्य शेख निजामुद्दीन औलिया थे, जबकि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती स्वयं भारत में चिश्ती सिलसिले के संस्थापक थे और उनके उत्तराधिकारी बख्तियार काकी थे। कथन 1 सही है क्योंकि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत और रामानुजाचार्य ने विशिस्टाद्वैत का प्रतिपादन किया था। कथन 3 सही है क्योंकि रामानंद के शिष्य सभी जातियों और वर्गों से थे, जिन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। कथन 4 सही है क्योंकि शेख निजामुद्दीन औलिया ने सुल्तानों के दरबार से दूरी बनाए रखने की अपनी नीति (बे-नियाजी) का कड़ाई से पालन किया था। सूफियों और संतों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और अशोक के धम्म के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख तीर्थ (विभागाध्यक्ष) होते थे, जिनमें 'समाहर्त्ता' राजस्व संग्रह का मुख्य अधिकारी था, जबकि 'संनिधातृ' राजकोष और भण्डारगृह का मुख्य संरक्षक होता था।
2. अशोक के शिलालेखों में वर्णित 'धम्म' कोई नया धर्म या धार्मिक पंथ नहीं था, बल्कि यह समाज कल्याण, बड़ों का आदर, शिष्टाचार, अहिंसा और सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता पर आधारित एक नैतिक आचार संहिता थी, जिसके प्रचार के लिए उसने 'धम्ममहामात्र' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
3. मौर्य काल में राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाली भूमि को 'सीता भूमि' कहा जाता था, जिस पर कृषि कार्य राजकीय कृषि अध्यक्ष (सीताध्यक्ष) की देखरेख में दासों, कर्मकारों और बंदियों द्वारा कराया जाता था।
4. अशोक के अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं, परंतु पश्चिमोत्तर सीमांत क्षेत्र के शाहबाजगढ़ी और मनसेहरा अभिलेखों में यूनानी और अरामैइक लिपियों का प्रयोग किया गया है, तथा तक्षशिला से मिले अभिलेख में केवल खरोष्ठी लिपि मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर किस सूफी सिलसिले के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखता था?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, राजस्व प्रणाली और कूटनीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मुख्य रूप से मलिक अंबर की रयतवारी पद्धति पर आधारित थी, जिसके तहत भूमि की माप के पश्चात पैदावार का 33 प्रतिशत भाग राज्य की आय के रूप में निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया।
2. 'चौथ' कर मराठा साम्राज्य के आंतरिक भागों (स्वराज्य) से वसूल किया जाने वाला एक भूमि कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' पड़ोसी मुगल प्रांतों से उनकी रक्षा करने के एवज में वसूला जाने वाला 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर था।
3. शिवाजी के अष्टप्रधान मंत्रिमंडल में 'पेशवा' (प्रधानमंत्री) के पश्चात दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सैन्य एवं प्रशासनिक पद 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) का होता था, जो सेना की भर्ती, संगठन और सैन्य संचालन की देखरेख करता था।
4. वर्ष 1665 में मुगलों की ओर से राजा जयसिंह प्रथम और शिवाजी के मध्य हुए प्रसिद्ध 'पुरंदर की संधि' के तहत शिवाजी ने अपने 35 में से 23 किलों को मुगलों को सौंपना स्वीकार किया था और अपने पुत्र संभाजी को मुगल दरबार में व्यक्तिगत सेवा के लिए भेजने पर सहमति व्यक्त की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासतें का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासक वर्ग और शाही परिवारों में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा हुआ।
2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1856 में 'धार्मिक असुविधा अधिनियम' (Religious Disabilities Act) पारित किया गया, जिसने हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित कर दिया, जिससे पारंपरिक भारतीय समाज में भारी धार्मिक असंतोष फैला।
3. ब्रिटिश प्रशासनिक नीतियों और भू-राजस्व प्रणालियों के कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प उद्योग तबाह हो गए, जिससे ग्रामीण कर्जदारी बढ़ी और किसानों तथा कारीगरों का यह आक्रोश 1857 के विद्रोह में सैनिकों के रूप में प्रकट हुआ।
4. सेना के भीतर लागू किए जाने वाले नियमों, जैसे वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा उपनयन अधिनियम' (General Service Enlistment Act) जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार ब्रिटिश सीमाओं से बाहर भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया, ने उच्च जातीय हिंदू सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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"दीवान-ए-अमीर कोही" का मुख्य कार्य क्या था?
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