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History of India
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के वैधानिक, भौगोलिक तथा आर्थिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भू-राजस्व की मांग को जमींदारों के लिए हमेशा के लिए निश्चित कर दिया था, किंतु इसके साथ ही जमींदारों की समय पर लगान अदायगी सुनिश्चित करने के लिए 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया गया था, जिसके तहत निश्चित तिथि को सूर्यास्त तक भुगतान न होने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
- 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) को सौंपा गया था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह से स्थाई थीं और अकाल या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं में भी उनमें कभी कोई संशोधन नहीं किया जाता था।
- 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और विलियम बेंटिंक द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में विकसित महालवारी व्यवस्था के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
- 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के दीर्घकालिक प्रभाव के परिणामस्वरूप भारतीय कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण हुआ और पारंपरिक निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture) की जगह नकदी फसलों (जैसे अफीम, कपास, नील और जूट) के उत्पादन को बढ़ावा मिला, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से औपनिवेशिक शोषण और महाजनों के ऋणजाल में जकड़ गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 1793 के स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत लॉर्ड कार्नवालिस ने जमींदारों को भूमि का मालिक बनाया और 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के माध्यम से कड़ाई से लगान वसूली की व्यवस्था की। कथन 2 गलत है क्योंकि रयतवारी व्यवस्था में लगान की दरें स्थाई नहीं थीं, बल्कि सरकार द्वारा हर 20-30 वर्ष पर इनका पुनरीक्षण (Revision) किया जाता था और इन्हें अत्यधिक ऊंचा रखा गया था। कथन 3 सही है क्योंकि महालवारी व्यवस्था में महाल (गाँव या ग्राम समूह) को इकाई मानकर राजस्व का निर्धारण किया गया था। कथन 4 सही है क्योंकि औपनिवेशिक नीतियों और भारी भू-राजस्व के दबाव के कारण कृषि का वाणिज्यीकरण हुआ और किसान पूरी तरह ऋणग्रस्त हो गए। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के जगदीशपुर में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीर कुंवर सिंह ने 27 अप्रैल 1857 को दानापुर के विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय अवाम के सहयोग से आरा पर कब्जा कर लिया था, और बाद में मेजर विन्सेंट आायर के साथ हुए भीषण संघर्ष के बाद अपनी रणनीति बदलते हुए ब्रिटिश सेना को लगातार चुनौती दी।
2. ब्रिटिश सेनापतियों—कैप्टन डनबर, मार्ग और डगलस—के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध का संचालन करते हुए कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में भी अंग्रेजों को पराजित किया था, और अपने गृह नगर जगदीशपुर लौटते समय गंगा नदी पार करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसके कारण 26 अप्रैल 1858 को उनका निधन हो गया।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से अंग्रेजी सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को सफलतापूर्वक जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों को अपना केंद्र बनाकर ब्रिटिश प्रशासन के समानांतर एक स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास किया।
4. अमर सिंह के नेतृत्व वाले इस संघर्ष को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों ने क्षमादान (Amnesty) की घोषणा की, जिसके तहत अमर सिंह ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें ब्रिटिश अदालत द्वारा बरी कर अंडमान भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश प्रांतीय शासक (जैसे नाना साहेब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) अपने-अपने क्षेत्रों के सीमित और स्थानीय हितों से प्रेरित थे, तथा उनके पास संपूर्ण अखिल भारतीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य के विकल्प के रूप में एक वैकल्पिक राजनीतिक-प्रशासनिक दृष्टि या सुसंगत राष्ट्रीय एजेंडा का पूर्ण अभाव था।
2. दिल्ली के मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा औपचारिक रूप से भारत का सम्राट घोषित तो किया गया था, किंतु अत्यधिक वृद्धावस्था, कमजोर नेतृत्व क्षमता और विभिन्न छावनियों के सिपाहियों एवं उनके कमांडरों के बीच आपसी समन्वय की कमी के कारण वे इस विशाल सैन्य विद्रोह को एक केंद्रीय और प्रभावी सैन्य दिशा प्रदान करने में पूर्णतः असमर्थ रहे।
3. शिक्षित भारतीय मध्यम वर्ग, बड़े व्यापारियों और अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, सिंधिया और नेपाल के जंग बहादुर) ने इस विद्रोह से तटस्थता बनाए रखी या ब्रिटिश सेना को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान की, जिससे यह विद्रोह भौगोलिक रूप से मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत तक ही सीमित होकर रह गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और शिवाजी के सैन्य संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में प्रत्येक मंत्री राजा के प्रति उत्तरदायी होता था और यह कोई नीति-निर्माता मंत्रिमंडल न होकर मंत्रियों का एक व्यक्तिगत सचिवीय (Secretariat) समूह था, जिसमें मंत्रियों के पद वंशानुगत नहीं होते थे।
2. 'चौथ' कर पड़ोसी गैर-मराठा क्षेत्रों से उनकी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बदले वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा संपूर्ण महाराष्ट्र के वंशानुगत प्रधान मुखिया होने के दावे के आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत वसूला जाता था।
3. शिवाजी की पैदल सेना (पगा) को दो प्रमुख श्रेणियों—'सिलहदार' और 'बरगीर'—में विभाजित किया गया था, जहाँ सिलहदारों को राज्य द्वारा घोड़े और अस्त्र-शस्त्र दिए जाते थे, जबकि बरगीर अपने स्वयं के हथियार लेकर युद्ध में सम्मिलित होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान आयोजित 'कन्नौज सभा' का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य उत्सव आयोजित करना था, जिसमें बीस विभिन्न देशों के राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम द्वारा रचित संस्कृत प्रहसन 'मत्तविलास प्रहसन' में बौद्ध और जैन भिक्षुओं के आचरण तथा उस समय की सामाजिक एवं धार्मिक रूढ़ियों पर हास्यपूर्ण व्यंग्य किया गया है, और महेंद्रवमन् अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म के अनुयायी थे, जिन्हें बाद में शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की उत्तर भारत विजय के रथ को रोककर उसे पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण कवि रविचन्द्री द्वारा रचित 'ऐहोल शिलालेख' में मिलता है, न कि बाणभट्ट के 'हर्षचरित' में।
4. तंजावुर के प्रसिद्ध 'बृहदेश्वर या राजराजेश्वर मंदिर' का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है और इसमें ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया गया है।
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