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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद पर बल दिया, किंतु उन्होंने वेदों की अचूकता या infallibility के सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय मानते हुए उनकी प्रामाणिकता को सर्वोच्च स्थान दिया, तथा मूर्तिपूजा, अवतारवाद और बाल विवाह का पुरजोर खंडन किया।
- 3. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में आत्माराम पांडुरंग द्वारा बॉम्बे में की गई थी, जिसके प्रमुख नेता महादेव गोविंद रानाडे थे, और इस समाज ने मुख्य रूप से अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा के प्रोत्साहन जैसे सामाजिक सुधारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
- 4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने हिंदू कॉलेज के छात्रों में पश्चिमी उदारवादी विचारों और तर्कवाद का प्रसार किया, किंतु रूढ़िवादी हिंदू समाज के तीव्र विरोध और अकादमिक परिषद द्वारा उन्हें निष्कासित किए जाने के कारण यह आंदोलन दीर्घकालिक और व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के माध्यम से एकेश्वरवाद का प्रचार किया और वेदों को अंतिम एवं अपौरुषेय सत्य नहीं माना। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और आर्य समाज की स्थापना की, जो वेदों की अचूकता में विश्वास रखता था। आत्माराम पांडुरंग और एम.जी. रानाडे द्वारा स्थापित प्रार्थना समाज ने सामाजिक सुधारों पर बल दिया। कथन 4 असत्य है क्योंकि हेनरी विवियन डेरोज़ियो और उनके अनुयायी (डेरोज़ियन) तत्कालीन समय में सामाजिक और वैचारिक जागृति लाने में महत्वपूर्ण रहे, किंतु जनसामान्य से कटा होने और रूढ़िवादियों के दबाव के कारण यह आंदोलन सीमित रहा। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा उनकी 'आजाद हिंद फौज' (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारें स्थापित की गईं, जिनमें बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, सतारा में 'प्रति सरकार' (यशवंतराव चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) और ताम्रलिप्ती (मिदनापुर) में 'जातीय सरकार' शामिल थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी से छिपकर भागने के बाद जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और वहीं से पहली बार जर्मनी के रेडियो प्रसारण के माध्यम से महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
3. सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का पुनर्गठन करते हुए सुभाष चंद्र बोस ने जुलाई 1943 में इसकी कमान संभाली और अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में ही 'आर्शी हुकूमत-ए-आद हिन्द' (Azad Hind Government) की अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की।
4. आजाद हिंद फौज की सेनाओं ने जापानी सेना के सहयोग से मार्च 1944 में भारतीय मुख्य भूमि पर आक्रमण किया और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार करने के पश्चात उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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शाहजहाँ का नाम क्या था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में क्रांतिकारियों के संचालन और रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को समाप्त कर दिया, जिसमें अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार और राजनयिक के रूप में कार्यरत थे।
2. तात्या टोपे ने कानपुर और बाद में ग्वालियर के मोर्चों पर ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार (गोरिल्ला) युद्ध का संचालन किया तथा ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल की संयुक्त सेनाओं को पराजित कर कानपुर पर स्थायी रूप से नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति जनरल सर कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक ने कानपुर पर पुनः अधिकार प्राप्त किया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तरफ निकल गए जबकि तात्या टोपे ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम को आगे बढ़ाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गयासुद्दीन तुगलक ने अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बढ़ाई गई भू-राजस्व दर को घटाकर कितना कर दिया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की विफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के समय अधिकांश देशी रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और साहूकारों ने ब्रिटिश सत्ता के प्रति वफादारी दिखाई या प्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजों का सहयोग किया, जिससे विद्रोही सेनाओं को अखिल भारतीय स्तर पर कोई संगठित वित्तीय या राजनीतिक आश्रय नहीं मिल सका।
2. दिल्ली के मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का औपचारिक सम्राट घोषित तो किया गया था, किंतु उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, सैन्य नेतृत्व की अक्षमता और आपसी गुटबाजी के कारण वे विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्रोही सैनिकों के बीच आवश्यक सामरिक समन्वय स्थापित करने में पूरी तरह असफल रहे।
3. आधुनिक सैन्य उपकरणों, रेलवे, टेलीग्राफ और प्रशासनिक दक्षता से लैस ब्रिटिश सेना के मुकाबले भारतीय विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीयकृत योजना थी और न ही कोई एकीकृत सैन्य कमान, जिसके कारण वे लंबी अवधि के युद्ध में टिक नहीं सके।
4. विद्रोह के दौरान अधिकांश आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त बुद्धिजीवियों ने क्रांतिकारियों की खुलकर आर्थिक और वैचारिक सहायता की, क्योंकि वे अंग्रेजों की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह संतुष्ट थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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