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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. देवेंद्रनाथ टैगोर द्वारा वर्ष 1839 में स्थापित 'तत्त्वबोधिनी सभा' का मुख्य उद्देश्य राजा राममोहन राय के विचारों का प्रचार करना और उपनिषदों के आधार पर वेदांत मत का पुनरुत्थान करना था, तथा आगे चलकर यह सभा ब्रह्म समाज में ही विलीन हो गई।
- 2. स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने केवल धार्मिक और आध्यात्मिक मोक्ष पर बल दिया, तथा इसने ब्रिटिश भारत में आधुनिक पश्चिमी शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक कल्याण के कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
- 3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के भीतर हुए विभाजन के परिणामस्वरुप वर्ष 1866 में 'भारतीय ब्रह्म समाज' (Sadharan Brahmo Samaj) की स्थापना हुई, जिसने बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का विरोध करते हुए 'ब्रह्म विवाह अधिनियम' (Native Marriage Act 1872) को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 4. पांडुरंग आत्माराम द्वारा वर्ष 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने महाराष्ट्र में सामाजिक सुधारों का नेतृत्व किया, और इसके प्रमुख विचारक न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानाडे ने अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार के लिए 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' की स्थापना में भी प्रमुख सहयोग दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1839 में 'तत्त्वबोधिनी सभा' की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रसार करना था और बाद में यह ब्रह्म समाज से जुड़ गई। कथन 2 गलत है क्योंकि रामकृष्ण मिशन ने केवल आध्यात्मिक साधना तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आधुनिक शिक्षा, आपदा राहत, चिकित्सा और गरीबों की सेवा जैसे सामाजिक कल्याण के कार्य भी बड़े पैमाने पर किए। कथन 3 सही है; केशव चंद्र सेन के प्रभाव से अलग होकर जब मतभेद बढ़े तो साधारण ब्रह्म समाज और नवविधान की स्थितियाँ बनीं और 1872 का नेटिव मैरिज एक्ट (ब्रह्म विवाह अधिनियम) बाल विवाह रोकने के लिए पारित हुआ। कथन 4 सही है क्योंकि प्रार्थना समाज और एम.जी. रानाडे ने महाराष्ट्र में समाज सुधार के साथ-साथ शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय अधिकारियों (तीर्थों) और अशोक के धम्म एवं अभिलेखों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शीर्ष अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अर्थशास्त्र के अनुसार अठारह थी; इनमें 'समाहर्ता' राजस्व संग्रहण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने वाला प्रमुख अधिकारी था, जबकि 'सन्निधातृ' राजकीय कोषागार का अध्यक्ष होता था।
2. अशोक के अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं और वे बाएं से दाएं लिखे गए हैं, किंतु उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा) से प्राप्त अभिलेख खरोष्ठी लिपि में हैं, जो दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी।
3. अशोक के धम्म की नीति केवल बौद्ध धर्म का प्रचार करना नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक आचार संहिता थी जिसका उद्देश्य सामाजिक सौहार्द, बुजुर्गों का सम्मान, दासों के साथ मानवीय व्यवहार और धार्मिक सहिष्णुता स्थापित करना था, जिसका व्यापक विवरण उसके सातवें स्तंभ लेख में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल काल में "हुंडी":
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जून 1947 की माउंटबेटन योजना तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें बुलाई जाएंगी, जहाँ दोनों प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के विधायक अलग-अलग बैठकर यह निर्णय लेंगे कि उनके प्रांत का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ विलय होगा, इसका निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) का आयोजन किया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान और उनके 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान का बहिष्कार किया था।
3. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के द्वारा 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन की स्थापना का प्रावधान किया गया, तथा लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों नए डोमिनियंस के संयुक्त रूप से पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई थी।
4. इस अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया था कि रियासतों (Princely States) पर ब्रिटिश आधिपत्य समाप्त हो जाएगा और उनके पास किसी भी डोमिनियन में शामिल होने या अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने का पूर्ण विकल्प होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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