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General Science
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सूक्ष्मदर्शी?

Detailed Explanation

सूक्ष्म वस्तु।
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→ फराडे नियम? → अप्रगामी तरंगों (Stationary Waves) और ध्वनि की चाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एक खुले आर्गन पाइप (Open organ pipe) में सभी संनादी (Harmonics) अर्थात मूल आवृत्ति के पूर्ण गुणज आवृत्तियाँ उत्पन्न होती हैं, जबकि बंद आर्गन पाइप (Closed organ pipe) में केवल विषम संनादी (Odd harmonics) ही उत्पन्न होते हैं। 2. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के घनत्व के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, जिसका अर्थ है कि भारी गैसों में ध्वनि की चाल हल्की गैसों की तुलना में हमेशा अधिक होती है। 3. जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य (Wavelength) दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, जबकि उसका वेग बदल जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → मानव शरीर के परिसंचरण, श्वसन और पाचन तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मानव हृदय का दाहिना आलिंद (Right Atrium) शरीर के विभिन्न भागों से अशुद्ध रक्त को प्राप्त करता है, जिसे त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से दाहिने निलय में भेजा जाता है, और यहाँ से यह रक्त फुफ्फुसीय शिरा (Pulmonary Vein) द्वारा फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए भेजा जाता है। 2. कूपिकाओं (Alveoli) में होने वाले गैसीय विनिमय के दौरान, ऑक्सीजन का आंशिक दाब अधिक होने के कारण यह विसरण द्वारा रक्त में प्रवेश करती है, जहाँ यह मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन के साथ reversible रूप से बंधकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन का निर्माण करती है। 3. आमाशय (Stomach) के जठर रस में उपस्थित 'पेप्सिनोजेन' एक निष्क्रिय एंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय 'पेप्सिन' में परिवर्तित हो जाता है और प्रोटीन को प्रोटियोज़ तथा पेप्टोन में जल अपघटित करता है। 4. छोटी आंत के अग्रभाग (ग्रहणी या ड्यूडेनम) में अग्न्याशय द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' एंजाइम आंत की श्लेष्मला द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' एंजाइम के सक्रिय प्रभाव से सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है, जो वसा के पाचन में मुख्य भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है तथा तनु विलयनों के लिए पूर्णतः सत्य है। 2. 'वांट-हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन की स्थिति में एक से अधिक ($i > 1$) होता है, जबकि संगुणन की स्थिति में इसका मान एक से कम ($i < 1$) होता है, जिसका उपयोग अणुसंख्यक गुणधर्मों के असामान्य प्रेक्षणों को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। 3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, जिसमें उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का भौतिक या रासायनिक अधिशोषक (Adsorption) और सक्रिय संकुल का निर्माण मुख्य चरण होता है। 4. 'धनात्मक उत्प्रेरक' रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) के मान को बढ़ा देता है, जिसके कारण अभिक्रिया की दर अत्यंत तीव्र हो जाती है और साम्यावस्था का मान भी परिवर्तित हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की झिल्ली पर ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के एंटीजन (एग्लूटिनोजन) उपस्थित होते हैं, जबकि प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से विशिष्ट एंटीबॉडी (एग्लूटिनिन) पाए जाते हैं, और कार्ल लैंडस्टीनर ने एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी की उपस्थिति के आधार पर ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Phenotype) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है, क्योंकि इनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दे तो सकते हैं परंतु केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं। 3. Rh कारक का आनुवंशिक संचरण मुख्य रूप से एक बहु-युग्मविक (Multiple allele) प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है, और Rh-धनात्मक रक्त को Rh-ऋणात्मक व्यक्ति में पहली बार चढ़ाने पर प्लाज्मा में तीव्र गति से एंटी-D एंटीबॉडी का निर्माण होता है, जिससे तत्काल गंभीर हीमोलिटिक आधान प्रतिक्रिया (Hemolytic transfusion reaction) होती है। 4. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता का गर्भ Rh-धनात्मक भ्रूण से युक्त होता है, जिसमें प्रथम संतान सामान्य जन्म लेती है किंतु प्रसव के दौरान भ्रूण के Rh-धनात्मक एरिथ्रोसाइट्स माता के परिसंचरण में प्रवेश करके प्राथमिक प्रतिरक्षा अनुक्रिया को प्रेरित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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