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General Science
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प्रकाश विद्युत प्रभाव?

Detailed Explanation

आइंस्टीन।
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धातुओं के निष्कर्षण (Metallurgical Processes) और उनके अयस्क के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को वायु की नियमित या नियंत्रित आपूर्ति के साथ उसके गलनांक से कम ताप पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग आमतौर पर सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड अयस्कों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है। 2. 'निस्तापन' (Calcination) प्रक्रिया के दौरान कार्बोनेट और हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म किया जाता है, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और अयस्क सरलता से छिद्रयुक्त ऑक्साइड में बदल जाता है। 3. 'प्रगालन' (Smelting) एक ऐसी उच्च-तापीय प्रक्रिया है जिसमें भर्जित या निस्पापित अयस्क को किसी उपयुक्त गलनक (Flux) और कोक (कार्बन) के साथ उसके गलनांक से ऊपर गर्म किया जाता है, जिससे धातु का अपचयन होकर वह द्रवित अवस्था में प्राप्त होती है और साथ ही अशुद्धियाँ 'धातुमल' (Slag) के रूप में अलग हो जाती हैं। 4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हैरॉल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) का मुख्य उपयोग ऐलुमिनियम ऑक्साइड के गलनांक को कम करने के लिए किया जाता है, क्योंकि शुद्ध एलुमिना का गलनांक बहुत उच्च होता है और यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पश्च पीयूष ग्रंथि (Posterior Pituitary) का अपना कोई अंतःस्रावी हॉर्मोन संश्लेषित करने का कार्य नहीं होता है, बल्कि यह हाइपोथैलेमस के न्यूरोसेक्रेटरी कोशिकाओं द्वारा उत्पादित 'ऑक्सीटोसिन' और 'वसोप्रेसिन' (ADH) हॉर्मोन्स का भंडारण और विमोचन करती है। 2. पैराथाइराइड ग्रंथियों (Parathyroid Glands) द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक पेप्टाइड हॉर्मोन है, जो रक्त में कैल्슘 आयनों के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है और यह अस्थियों के अवशोषण (Bone resorption) तथा वृक्कों द्वारा कैल्슘 के पुनअवशोषण को उद्दीपित करता है। 3. अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की अल्फा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' हॉर्मोन का स्रावण करती हैं, जो यकृत और पेशी कोशिकाओं में ग्लूकोज से ग्लाइकोजेनेसिस की प्रक्रिया को प्रेरित करके रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है। 4. अधिवृक्क वल्कल (Adrenal Cortex) द्वारा स्रावित 'ग्लूकोकोर्टिकोइड्स' (मुख्य रूप से कोर्टिसोल) कार्बोहाइड्रेट चयापचय को प्रभावित करते हैं और शरीर में सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) प्रतिक्रियाओं तथा प्रतिरक्षा तंत्र के दमन (Immunosuppression) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के पूर्णतः बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, और इस प्रक्रिया की क्रियाविधि को 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' (Intermediate compound formation theory) द्वारा समझाया जाता है। 3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित कर पश्च अभिक्रिया की दर को अत्यधिक तीव्र कर देते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त स्कंदन (Blood Coagulation) की जैव रासायनिक क्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रक्त का थक्का जमने की कैसकेड प्रक्रिया (Blood clotting cascade) में 'प्रथम चरण' के रूप में प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलने के लिए 'थ्रोम्बोप्लास्टिन' (एंजाइम कॉम्प्लेक्स) और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की अनिवार्य उपस्थिति होती है, जो अंतःजात (Intrinsic) और बाह्यजात (Extrinsic) दोनों मार्गों का एक उभयनिष्ठ बिंदु है। 2. यकृत (Liver) द्वारा संश्लेषित 'हेपरिन' (Heparin) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एंटीकोएगुulant (प्रतिस्कंधक) है, जो रक्त प्लाज्मा में मौजूद 'एंटीथ्रोम्बिन-III' की सक्रियता को कई गुना बढ़ाकर थ्रोम्बिन और सक्रिय कारकों (जैसे Xa) को निष्प्रभावी कर देता है, जिससे सामान्य रक्त वाहिकाओं के भीतर रक्त का स्वतः स्कंदन नहीं होता है। 3. रुधिर प्लाज्मा में पाए जाने वाले 'फाइब्रिनोजेन' (Fibrinogen) को सक्रिय थ्रोम्बिन एंजाइम द्वारा अघुलनशील फाइब्रिन मोनोमर्स में तोड़ा जाता है, और ये मोनोमर्स बाद में 'कारक XIII' (फाइब्रिन-स्थिरीकरण कारक) की उपस्थिति में एक मजबूत, क्रॉस-लिंक्ड त्रिविमीय जालक का निर्माण करते हैं जो रुधिर कोशिकाओं को फंसाकर पपड़ी (Clot) बनाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जैव-रासायनिक और प्रतिरक्षात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह प्रतिजन (Antigens) लिपिड और प्रोटीन रीढ़ की हड्डी से जुड़े कार्बोहाइड्रेट श्रृंखलाओं (Oligosaccharides) के रूप में होते हैं, जिनका संश्लेषण ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा होता है, न कि सीधे 'ABO' जीन द्वारा कूटबद्ध पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से। 2. 'बॉम्बे फिनोटाइप' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों में H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B के साथ-साथ एक विशेष 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह से रक्त लेने से रोकती है। 3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, यदि एक Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, तो प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनी IgG प्रकार की एंटी-Rh एंटीबॉडी प्लेसेंटा को पार कर सकती हैं और प्रथम शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। 4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की बाह्य प्रणाली (Extrinsic pathway) की शुरुआत रक्त वाहिका की क्षति के बाद ऊतक कारक (Tissue Factor या Factor III) के मुक्त होने और प्लाज्मा में उपस्थित फैक्टर VII के साथ मिलकर उसके सक्रिय होने से होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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