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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की कृषि व्यवस्था, आर्थिक जीवन और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सिंधु सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, राई, मटर और तिल के उत्पादन के साथ-साथ कपास की खेती करने वाले विश्व के पहले लोग थे, जिन्हें यूनानियों द्वारा 'सिंडन' (Sindon) कहा जाता था।
- 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) और धान की भूसी तथा रंगपुर से प्राप्त चावल के साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि सिंधु सभ्यता के लोगों का समुद्री व्यापार अत्यधिक विकसित था, और वे मेसोपोटामिया के साथ प्रत्यक्ष व्यापारिक संबंध रखते थे।
- 3. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से लोहे के कृषि उपकरण और अस्त्र-शस्त्र प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर इतिहासकार इस सभ्यता को पूर्ण रूप से लौह-युगीन सभ्यता मानते हैं।
- 4. मुहरों (Seals) के निर्माण में मुख्य रूप से 'स्टेलाइट' (Steatite) पत्थर का प्रयोग किया जाता था, और व्यापारिक विनिमय के लिए अधिकांशतः वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) का प्रचलन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) के लोग कपास उगाने वाले विश्व के पहले लोग थे, जिसे यूनानी 'सिंडन' कहते थे। लोथल और रंगपुर से चावल के साक्ष्य मिले हैं तथा लोथल का गोदीबाड़ा मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार का प्रमाण है। मुहरें मुख्य रूप से स्टेलाइट (खड़िया पत्थर) से बनती थीं और विनिमय वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था। कथन 3 गलत है क्योंकि सिंधु सभ्यता एक कांस्य-युगीन सभ्यता थी और वे **लोहे** से परिचित नहीं थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता को समाप्त कर दिया, जिसमें अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार, राजनयिक और राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्यरत थे।
2. तात्या टोपे ने कानपुर और ग्वालियर के मोर्चों पर ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार (गोरिल्ला) युद्ध का संचालन किया तथा ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल को पराजित कर कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार बनाए रखा था।
3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यूरोज ने कानपुर की पुनः प्राप्ति के लिए भीषण सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था और नाना साहब को गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं तथा संप्रदायों के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महायान बौद्ध धर्म में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' (Maitreya) की परिकल्पना की गई है, जो इस संसार में धर्म के पुनरुत्थान के लिए अवतरित होंगे, जबकि थेरवाद (हीनयान) संप्रदाय बुद्ध को एक महापुरुष और शिक्षक के रूप में मानता है जो अपनी साधना से परिनिर्वाण को प्राप्त हुए।
2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त करने में पूर्णतः सक्षम हैं और उनके 19वें तीर्थंकर 'भगवान मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का खंडन करते हुए यह मानता है कि स्त्री शरीर से मुक्ति और कैवल्य ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं है तथा मोक्ष के लिए नग्नता अनिवार्य है।
3. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' का सिद्धांत कार्य-कारण संबंध पर आधारित है जो आत्मा और ईश्वर के शाश्वत अस्तित्व को स्वीकार किए बिना संसार के संचालन की व्याख्या करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) ज्ञान की सापेक्षता का पूर्ण रूप से निषेध करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल काल में यूरोप से आने वाली सबसे प्रमुख धातु कौन सी थी जिसका उपयोग सिक्कों के लिए होता था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन तथा ब्रिटिश सेनापतियों के अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह के विरुद्ध ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल ने कड़े संघर्ष के बाद विजय प्राप्त की थी, जबकि बरेली में खान बहादुर खान के नेतृत्व में हुए विद्रोह को क्रूरतापूर्वक कुचलने के लिए ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
2. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी लियाकत अली के प्रतिरोध को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कर्नल नील (General Neil) ने अत्यधिक निर्ममता का परिचय देते हुए वहाँ के नागरिकों और विद्रोहियों का बड़े पैमाने पर दमन किया था।
3. फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों द्वारा 50,000 रुपये का भारी इनाम घोषित किया गया था, जिन्हें अंततः पुवायाँ (रोहिलखंड) के एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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