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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा संचालित संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जुलाई 1857 में दानापुर के सैनिकों के आरा पहुँचने पर बाबू कुंवर सिंह ने उनका नेतृत्व स्वीकार किया और आरा की रक्षा के लिए ब्रिटिश सेना के कैप्टन डनबर को पराजित किया, किंतु बाद में ब्रिटिश जनरल लुगार्ड और डगलस के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्हें अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
  2. 2. बाबू कुंवर सिंह ने अपनी वृद्धावस्था के बावजूद अद्भुत सैन्य कौशल का परिचय देते हुए गंगा नदी पार कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे आजमगढ़, बलिया और रीवा) में ब्रिटिश सेना को कड़ी टक्कर दी तथा सफल गोरिल्ला युद्ध का संचालन किया।
  3. 3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध समानांतर सरकार तथा प्रभावी प्रतिरोध का संचालन किया।
  4. 4. अमर सिंह के नेतृत्व वाले इस अंतिम चरण के प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कोई विशेष सैन्य अभियान नहीं चलाया, बल्कि आममाफी (Amnesty) की घोषणा कर सभी विद्रोहियों को बिना शर्त माफ कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह में बिहार के जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवर सिंह ने अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। जुलाई 1857 में दानापुर रेजीमेंट के विद्रोह के बाद उन्होंने सैनिकों का नेतृत्व संभाला। कैप्टन डनबर के नेतृत्व में भेजी गई ब्रिटिश सेना को आरा के पास करारी शिकस्त मिली। बाद में ब्रिटिश सेनापतियों (लुगार्ड, डगलस आदि) के दबाव के कारण उन्होंने जगदीशपुर छोड़ा और उत्तर मध्य भारत में ब्रिटिश ठिकानों पर हमले किए। 26 अप्रैल 1858 को उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध जारी रखा और प्रशासन को भारी चुनौती दी। कथन 4 असत्य है क्योंकि अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबाने के लिए अत्यधिक कठोर सैन्य कार्रवाई की थी, न कि बिना शर्त आममाफी दी थी। इस संदर्भ में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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