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History of India
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महाजनपद काल और मगध के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित महाजनपदों और उनकी राजधानियों के युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अंग - चंपा
  2. 2. चेदि - सोत्थिवतीनगर (सुक्तिमती)
  3. 3. वत्स - कौशाम्बी
  4. 4.

मस्ति (मल्ला) - कुशीनारा उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सोलह महाजनपदों का उदय हुआ था, जिनका उल्लेख बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में मिलता है। इस काल में मगध साम्राज्य ने अपनी भौगोलिक स्थिति, उपजाऊ भूमि, प्रचुर खनिज संसाधनों (विशेषकर लौह अयस्क) और कूटनीतिज्ञ शासकों के बल पर अन्य महाजनपदों को पीछे छोड़ते हुए सर्वोच्चता स्थापित की। दिए गए सभी युग्म सही सुमेलित हैं: अंग की राजधानी चंपा थी, चेदि की राजधानी सोत्थिवतीनगर (सुक्तिमती) थी, वत्स की राजधानी कौशाम्बी थी, और मल्ल (मस्ति) महाजनपद की राजधानी कुशीनारा तथा पावा थीं। इस कालखंड और मगध के राजनीतिक इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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महात्मा गांधी के प्रारंभिक आंदोलनों (चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन) के वैचारिक और व्यावहारिक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान, यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा प्रणाली' के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि के 3/20 वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था, जिसे समाप्त करने के लिए गांधीजी द्वारा भारत में किया गया यह पहला सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग था। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा राजस्व माफी से इंकार करने पर, गांधीजी ने किसानों को भू-राजस्व का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्देश दिया और वल्लभभाई पटेल के साथ मिलकर इस आंदोलन का नेतृत्व किया। 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ हुए 'असहयोग आंदोलन' के दौरान नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन किया गया, जिसके तहत शांतिपूर्ण और वैध तरीकों से 'स्वराज' की प्राप्ति को कांग्रेस का आधिकारिक लक्ष्य बनाया गया। 4. असहयोग आंदोलन के स्थगन के पश्चात चौरी-चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के विरोध में गांधीजी ने तुरंत कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और आजीवन किसी भी राजनीतिक आंदोलन में भाग न लेने की घोषणा की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, विशेषकर खिलजी और तुगलक राजवंशों के दौरान लागू की गई व्यवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में बाजार नियंत्रण प्रणाली (Market Control) को सख्ती से लागू करने के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका मुख्य उद्देश्य सैनिकों को कम वेतन में आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराना था। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलतराज (देवगिरि) स्थानांतरित करने के असफल प्रयोग के बाद देश में अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर तांबे और कांसे के सांकेतिक सिक्के (Token Currency) चलाए, जिन्हें राज्य द्वारा पूरी तरह से सोने और चांदी के सिक्कों के मूल्य के बराबर मान्यता दी गई थी। 3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार किसानों पर लगाए गए सभी प्रकार के सिंचाई करों (हर्ब-ए-शर्ब) को पूरी तरह से माफ कर दिया था और इसके स्थान पर केवल 'खराज' (भू-राजस्व) वसूलने का आदेश दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मुगलकालीन प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या आयन-ए-दहसाला) व्यवस्था के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था, जिसमें 'जबत' प्रणाली का भी महत्वपूर्ण योगदान था। 2. शाहजहां के शासनकाल में कृषि भूमि के वर्गीकरण और लगान निर्धारण के लिए 'नस्क' या 'कंकूट' प्रणाली के अलावा 'हफ््ता' (सात वर्षों) और 'चहसाला' (चार वर्षों) जैसी पद्धतियों का भी प्रयोग किया जाने लगा था। 3. जहांगीर के काल में जागीरदारी संकट और मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो और तीन घोड़े) की नई व्यवस्था शुरू की गई थी, जिसके तहत बिना मनसब बढ़ाए ही घुड़सवार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी। 4. औरंगजेब द्वारा जारी किए गए 'महासब' और 'अहकाम-ए-आलमगिरी' जैसे फरमानों में यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि कृषि योग्य बंजर भूमि (बंजर और पड़ोस) को पुनः जोतने वाले किसानों से शुरुआत में भारी लगान वसूला जाए और उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय रियायत न दी जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 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दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 11 मई 1857 को मेरठ से आए विद्रोही सैनिकों ने दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया, जबकि जफर इस समय अपनी वृद्धावस्था और अनिच्छा के बावजूद सैनिकों के दबाव में प्रतीकात्मक नेतृत्व स्वीकार करने के लिए विवश हुए थे। 2. दिल्ली में विद्रोह का वास्तविक सैन्य नेतृत्व और कमान 'बख्त खान' के हाथों में थी, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व करते हुए दिल्ली पहुँचे थे और जिन्हें सम्राट ने 'साहेब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि से सम्मानित किया था। 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेनापतियों जॉन निकोलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार हो गया, जिसके पश्चात बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया था। 4. दिल्ली के पतन के उपरांत ब्रिटिश अधिकारी विलियम हडसन ने राजकुमारों (मिर्जा मुगल, खिज्र सुल्तान और अबू बकर) को बिना किसी विधिवत मुकदमे के खूनी दरवाजा के निकट सरेआम गोली से उड़ा दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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