BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
14 views

भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में, माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. माउंटबेटन योजना के तहत भारत के विभाजन को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया और इसके अंतर्गत बंगाल तथा पंजाब विधानसभाओं में यह निर्णय लिया गया कि यदि दोनों में से किसी भी प्रांत के हिंदू और मुस्लिम विधायक साधारण बहुमत से प्रांत के विभाजन के पक्ष में मतदान करेंगे, तो प्रांत को विभाजित कर दिया जाएगा।
  2. 2. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' को बिना किसी संशोधन के पारित किया गया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन राष्ट्रों के सृजन की घोषणा की गई।
  3. 3. भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण करने के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग सीमा आयोगों (बंगाल और पंजाब) का गठन किया गया था, जिन्होंने अपनी अंतिम रिपोर्ट 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही सार्वजनिक कर दिया था।
  4. 4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं को निर्धारित करने वाले 'रेडक्लिफ पुरस्कार' (Radcliffe Award) की घोषणा 17 अगस्त 1947 को, यानी भारत और पाकिस्तान के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन पश्चात की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के प्रावधानों के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को यह तय करना था कि क्या उनका विभाजन होना चाहिए या नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के आधार पर 15 अगस्त 1947 को दो स्वतंत्र डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। कथन 3 गलत है क्योंकि सीमा आयोग के अध्यक्ष सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा तैयार की गई सीमा रेखा की रिपोर्ट 15 अगस्त से पहले नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के बाद सार्वजनिक की गई थी। कथन 4 सही है क्योंकि 'रेडक्लिफ पुरस्कार' की औपचारिक घोषणा 17 अगस्त 1947 को की गई थी, जिसके कारण स्वतंत्रता के तुरंत बाद सीमाओं पर भारी अनिश्चितता और हिंसा का माहौल रहा था। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के विस्तृत विवरण के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन से जुड़ी 'माउंटबेटन योजना' (3 जून योजना, 1947) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस योजना में यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों में होंगी—एक मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों के लिए और दूसरी शेष जिलों के प्रतिनिधियों के लिए—ताकि यह तय किया जा सके कि प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं। 2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय जनमत संग्रह (Referendum) के माध्यम से लिया जाना तय किया गया था। 3. योजना के तहत ब्रिटिश भारत को सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त 1947 की तारीख निर्धारित की गई थी तथा दोनों नए स्वतंत्र डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) की सीमाओं के निर्धारण के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में एक 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) का गठन किया गया था। 4. माउंटबेटन योजना को कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने बिना किसी संशोधन या आपत्ति के पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया था, और इसी योजना के आधार पर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विजयनगर साम्राज्य के किस शासक ने अपनी सेना में मुस्लिम सैनिकों (तुर्कों) को बड़े पैमाने पर नियुक्त किया, उन्हें 'इनाम' (जागीर) प्रदान किए और अपने दरबार में कुरान को सिंहासन के सामने रखवाया ताकि वे उसकी निष्ठा के साथ सेवा कर सकें? → सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते (1931) और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार द्वारा उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने इस समझौते का पूर्ण समर्थन किया था। 2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया था, किंतु द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। 3. समझौते के दौरान गांधी जी ने पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की अपनी मांग पर अत्यधिक जोर दिया था, जिसे वायसराय लॉर्ड इरविन ने बिना किसी शर्त के पूरी तरह स्वीकार कर लिया था। 4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान (दांडी मार्च के पश्चात) भारत के तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने और एकत्र करने का कानूनी अधिकार मिल गया था, जिसे इरविन ने समझौते में मान्यता दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इल्तुतमिश ने सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चालीस तुर्क गुलाम सरदारों के एक प्रभावशाली दल 'चहलगानी' (चाहल गान) का गठन किया था, जिसे बाद में बलवंत ने अपनी केंद्रीय सत्ता को मजबूत करने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया। 2. अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल आक्रमणों का मुकाबला करने के लिए अपनी सेना में 'दाग' (घोड़ों पर दागने की प्रथा) और 'हुलिया' (सैनिकों का वर्णनात्मक विवरण रखने की प्रणाली) जैसी क्रांतिकारी सैन्य पद्धतियों की शुरुआत की, तथा नकद वेतन देने के स्थान पर सैनिकों को भूमि अनुदान (इक्ता) देना अनिवार्य कर दिया। 3. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी प्रशासनिक राजधानी को दिल्ली से बदलकर देवगिरी (दौलताबाद) स्थानांतरित किया ताकि साम्राज्य के केंद्रीय भाग से दक्षिण भारत पर अधिक प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके, किंतु इस योजना के कुप्रबंधन के कारण भारी जनहानि हुई और अंततः उसे वापस दिल्ली लौटना पड़ा। 4. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सल्तनत काल में पहली बार सिंचाई के लिए व्यापक नहरों का निर्माण करवाया, साथ ही उसने 'दीवान-ए-खैरात' (दान विभाग) और 'दीवान-ए-बंदागान' (दासों के कल्याण के लिए विभाग) की स्थापना की, परंतु उसने 'इक्ता' प्रणाली को आनुवंशिक बनाकर प्रशासनिक कमजोरी का मार्ग प्रशस्त किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'प्रार्थना समाज' और इसके संस्थापकों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से की गई थी, और इसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना तथा महिला शिक्षा का प्रसार करना था। 2. महादेव गोविंद रानाडे इस समाज के सबसे प्रमुख नेता बने, जिन्होंने सामाजिक सुधारों को धार्मिक सुधारों से अधिक प्राथमिकता दी और समाज सुधार के लिए 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' जैसी संस्थाओं के माध्यम से बौद्धिक आधार तैयार किया। 3. प्रार्थना समाज के संस्थापकों ने अपनी सामाजिक-सुधार की बैठकों में रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं की अत्यधिक आलोचना की और मूर्तिपूजा, बहुदेववाद तथा जाति व्यवस्था का समर्थन करते हुए पूर्ण रूप से सनातन धर्म के सिद्धांतों को अपनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.