BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजििस कादिर को नवाब घोषित कर किया था, और उन्होंने ब्रिटिश रेसिडेंसी की घेराबंदी करने वाले विद्रोही सैनिकों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अवध और रोहिल्खंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और अपनी उत्कृष्ट रणनीतिक कौशल के कारण ब्रिटिश सेनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुए।
  3. 3. हेनरी लॉरेंस, नील और हैवलॉक जैसे ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने लखनऊ की रेसिडेंसी को बचाने के दौरान अपनी जान गंवा दी थी, और अंततः सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
  4. 4. पराजय के उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पेंशन देकर लखनऊ में ही महल में रहने की अनुमति प्रदान कर दी गई, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा पकड़कर फांसी पर लटका दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अत्यधिक वीरता और नेतृत्व का परिचय दिया। बेगम हजरत महल ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और ब्रिटिश रेसिडेंसी की घेराबंदी की। मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'डंका शाह' कहा जाता था) एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। हेनरी लॉरेंस, नील और हैवलॉक जैसे ब्रिटिश अधिकारी लखनऊ में संघर्ष के दौरान मारे गए थे। अंततः कॉलिन कैंपबेल ने मार्च 1858 में लखनऊ पर कब्जा किया। हालांकि, बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं उनकी मृत्यु हुई, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को धोखे से मार दिया गया था। अतः कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया, जिन्हें ब्रिटिश सरकार को एक निश्चित भू-राजस्व राशि का 9/10 भाग देना होता था और शेष 1/10 भाग अपने प्रशासनिक व व्यक्तिगत खर्च के रूप में रखने की अनुमति थी। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और किसानों (रयतों) के मध्य सीधा समझौता होता था, जिसमें बीच के किसी भी बिचौलिए (जमींदार) को मान्यता नहीं दी गई थी और लगान की दरें भूमि की उर्वरता के आधार पर अत्यधिक उच्च निर्धारित की गईं थीं। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब क्षेत्र में लागू 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके पूरे गाँव या 'महाल' (गाँव के समूह) के स्तर पर किया जाता था, और राजस्व भुगतान की सामूहिक जिम्मेदारी पूरे ग्राम समुदाय या उसके मुखिया ('लंबरदार') की होती थी। 4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों में से 'स्थाई बंदोबस्त' के अंतर्गत कंपनी की आय हमेशा के लिए निश्चित हो गई थी, जबकि रयतवारी और महालवारी व्यवस्थाओं में कृषि उत्पादों के मूल्य में वृद्धि के साथ-साथ सरकार द्वारा लगान की दरों में बार-बार वृद्धि (पुनर्निर्धारण) की जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध वक्तव्यों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था" - वी. डी. सावरकर 2. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - डॉ. आर. सी. मजूमदार 3. "यह पूर्णतः देशभक्ति रहित और स्वार्थी सिपाही विद्रोह था, जिसमें कोई स्थानीय नेतृत्व नहीं था" - सर जॉन सी. सीले 4. "यह नस्लीय संघर्ष था जिसमें बर्बरता और क्रूरता का प्रदर्शन दोनों पक्षों द्वारा किया गया" - टी. आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → औरंगजेब ने संगीत पर पाबंदी लगाने के बाद राजकीय संगीतकारों को क्या करने की सलाह दी थी? → वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा सर्वप्रथम 19 जुलाई 1905 को की गई थी और 16 अक्टूबर 1905 को इसे प्रभावी बनाया गया, जिसके विरोध में पूरे बंगाल में उस दिन को 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया और लोगों ने रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर 'रक्षाबंधन' उत्सव मनाया। 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत कलकत्ता में प्रफुल्ल चंद्र राय द्वारा 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की स्थापना की गई तथा राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार हेतु 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' का गठन हुआ। 3. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन (अध्यक्षता: गोपाल कृष्ण गोखले) और वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन (अध्यक्षता: दादाभाई नौरोजी) के मध्य स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के विस्तार को लेकर नरमपंथियों और गरमपंथियों में पूर्ण वैचारिक एकमत था तथा दोनों अधिवेशनों में बंगाल से बाहर भी इस आंदोलन को ले जाने का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी का एक बड़ा वर्ग इस आंदोलन से तटस्थ रहा या सरकार के प्रभाव में आकर इसके विरुद्ध खड़ा हो गया, और इसी पृष्ठभूमि में दिसंबर 1905 के बनारस अधिवेशन के तुरंत बाद ढाका के नवाब सलीमुल्लाह खान के नेतृत्व में 'ऑल इंडिया मुस्लिम लीग' की नींव रखी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल साम्राज्य के प्रशासन, आर्थिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या जरबती) राजस्व प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और प्रचलित मूल्यों के औसत के आधार पर मालगुजारी निश्चित की जाती थी, जिसमें ज़मीन को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। 2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (दो-घोड़ा और तीन-घोड़ा) की नई पद-मर्यादा जोड़ी गई, जिसके माध्यम से बिना जात मनसब बढ़ाए सैनिकों की संख्या (सवार मनसब) को दोगुना किया जा सकता था। 3. शाहजहां के काल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत सूबों की संख्या बढ़कर 20 हो गई थी, और इसी समय मुगल स्थापत्य कला में संगमरमर के प्रयोग के साथ-साथ 'पिएत्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) यानी संगमरमर पर रंगीन पत्थरों को जड़ने की कला का चरमोत्कर्ष देखा गया। 4. औरंगजेब की आर्थिक नीतियों के तहत 'राहती' और 'पाएबागी' जैसी अतिरिक्त उपकर (Abwab) व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया गया, तथा उसने अपने शासनकाल के शुरुआत में ही हिन्दू मंदिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ राज्य की आय बढ़ाने के लिए मराठों के विरुद्ध 'चौरथ' और 'सरदेशमुखी' करों को अनिवार्य कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.