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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बे' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस के खोल को लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था और ऐसी अफवाह फैल गई थी कि उस कारतूस में सुअर और गाय की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
- 2. जनवरी 1857 में दमदम (कोलकाता के समीप) स्थित सैन्य छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों ने सबसे पहले नई एनफील्ड राइफल के प्रयोग के खिलाफ आधिकारिक रूप से खुले विद्रोह का झंडा बुलंद किया था।
- 3. बैरकपुर छावनी (34वीं एन.आई.) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अंग्रेजी अधिकारियों (लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन) पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
- 4. मंगल पांडे द्वारा की गई इस घटना के तुरंत बाद, मेरठ छावनी के 3th बंगाल लाइट कैवेलरी के सैनिकों ने 24 अप्रैल 1857 को नए कारतूस लेने से सामूहिक रूप से इनकार कर दिया था, जिन्हें बाद में मई में कठोर सैन्य सजा दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह का तात्कालिक कारण सेना में 'एनफील्ड राइफल' का引入 (प्रवेश) था। कथन 1 सही है क्योंकि पुरानी ब्राउन बे बन्दूक के स्थान पर लाई गई एनफील्ड राइफल के कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह फैल गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि जनवरी 1857 में दमदम में अफवाह फैली थी और बहरामपुर (बरहामपुर) के 19वें नेटिव इन्फैंट्री ने फरवरी 1857 में पहला खुला विद्रोह किया था, न कि दमदम के सैनिकों ने। कथन 3 पूर्णतः सत्य है कि बैरकपुर छावनी के 34वीं रेजीमेंट के सिपाही विकिपीडिया संदर्भ मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को विद्रोह करते हुए अंग्रेजों पर गोली चलाई और उन्हें 8 अप्रैल को फांसी दी गई। कथन 4 भी सही है कि अप्रैल 1857 में मेरठ के घुड़सवार सैनिकों ने कारतूस लेने से इंकार किया था। अतः सही विकल्प (b) है।
Related Questions
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ऋग्वैदिक काल एवं उत्तर वैदिक काल की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाएँ अत्यधिक शक्तिशाली थीं, जो राजा की निरंकुशता पर नियंत्रण रखती थीं, और इन दोनों संस्थाओं में महिलाओं (जैसे 'सभाती' और 'इशा') की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख मिलता है, जबकि उत्तर वैदिक काल में आते-आते इन संस्थाओं का राजनीतिक प्रभाव क्षीण होने लगा और महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
2. ऋग्वैदिक समाज मुख्य रूप से एक समतावादी और कबीलाई समाज था जिसमें वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी और गोत्र प्रणाली अपनी पूरी अवस्था में थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे (श्याम अयस) की खोज के बाद कृषि आधारित अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई और वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होकर कठोर हो गई।
3. उत्तर वैदिक काल में गोत्र (Gotra) संस्था का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ 'गोहूति' या 'गोष्ठ' (वह स्थान जहाँ कुल विशेष का गोधन पाला जाता था) था, और इसी काल में पहली बार चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) का पूर्ण विधान 'जाबालोपनिषद' में देखने को मिलता है।
4. ऋग्वैदिक काल में राजा को 'गोपा जनस्य' (कबीले का रक्षक) कहा जाता था, जिसे नियमित कर (बलि) देने की अनिवार्य व्यवस्था थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में 'भागदुध' नामक अधिकारी कर संग्रह करने लगा और राजा की शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ 'राजसूय', 'अश्वमेध' तथा 'वाजपेय' जैसे बड़े यज्ञों का प्रचलन बढ़ गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "अहदी" सैनिक कौन थे?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म और जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं एवं उनकी संगीतों/परिषदों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के विपरीत, जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार किया और मोक्ष प्राप्ति के लिए 'कायाक्लेश' (शरीर को कष्ट देना) तथा संलेखना (अंथरा) पद्धति को अनिवार्य माना, जबकि महात्मा बुद्ध ने मध्यम मार्ग (अमध्याप्रपदा) का उपदेश दिया।
2. बौद्ध धर्म की प्रथम संगीति का आयोजन राजगृह (सप्तपर्णी गुफा) में महाकस्सप की अध्यक्षता में अजातशत्रु के शासनकाल में हुआ था, जिसमें बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्त पिटक' और 'विनय पिटक' के रूप में संकलित किया गया।
3. जैन धर्म की प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें जैन ग्रंथों को बारह अंगों में विभाजित किया गया और भद्रबाहु के अनुयायी श्वेतांबरों ने इसका पूर्ण बहिष्कार किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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विजयनगर साम्राज्य में मुख्य निर्यात की वस्तु क्या थी?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी पर अधिकार करने के उपरांत 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी और महाबलीपुरम में एकाश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया था।
2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक संघर्ष का विस्तृत विवरण पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (रचयिता रविकीर्ति) में मिलता है।
3. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने अपनी नौसेना की शक्ति का विस्तार करते हुए मालदीव द्वीपों और श्रीलंका के उत्तरी भाग पर विजय प्राप्त की थी, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) शिव मंदिर का निर्माण करवाया था।
4. हर्ष के शासनकाल में आयोजित 'कन्नौज सभा' का प्रमुख उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में धार्मिक अनुष्ठान करना था, जिसमें विभिन्न राजाओं और विद्वानों ने भाग लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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