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History of India
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार तथा उनके दार्शनिक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, और इनमें महिला संत अंडाल (जिन्हें 'दक्षिण की मीरा' कहा जाता है) अलवार संत थीं, जबकि करैक्कालअम्मइयार प्रसिद्ध नयनार संत थीं।
  2. 2. सूफी मत (तसव्वुफ) के चिश्ती सिलसिले की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबार के उच्च पदों और राजकीय अनुदानों को स्वीकार करने की नीति को अनिवार्य रूप से अपनाया था।
  3. 3. उत्तर भारत में रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' की रचना अवधी भाषा में की थी, तथा वे समकालीन मुगल सम्राट अकबर के व्यक्तिगत संपर्क में आकर उनके दरबार के आधिकारिक दरबारी कवि बन गए थे।
  4. 4. वारकरी संप्रदाय (महाराष्ट्र) के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और संत तुकाराम ने जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करते हुए विट्ठल (विठोबा) भक्ति पर बल दिया, और इस संप्रदाय के अनुयायी प्रतिवर्ष पंढरपुर की वार्षिक तीर्थयात्रा करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाया, जिसमें महिला अलवार संत अंडाल और नयनार संत करैक्कालअम्मइयार का महत्वपूर्ण योगदान था। कथन 2 गलत है क्योंकि चिश्ती सिलसिले के संतों ने शाही दरबार, राजनीतिक सत्ता और राजकीय अनुदानों से दूरी बनाए रखने (दुनिया से बेनियाज़ रहने) की नीति का कड़ाई से पालन किया था, वे राजाओं के दरबार में जाने से बचते थे। कथन 3 गलत है क्योंकि तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना अवधी में जरूर की थी, किंतु वे अकबर के दरबारी कवि नहीं थे और न ही उन्होंने अकबर का कोई आधिकारिक पद स्वीकार किया था। कथन 4 सही है क्योंकि महाराष्ट्र का वारकरी संप्रदाय विट्ठल भक्ति और पंढरपुर वारी के लिए प्रसिद्ध है, जिसके संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम थे। विकिपीडिया संदर्भ
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