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History of India
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने पाटलिपुत्र के प्रशासन का विस्तृत वर्णन अपनी पुस्तक 'इंडिका' में किया है, जिसके अनुसार नगर प्रशासन छह समितियों (प्रत्येक में पाँच सदस्य) द्वारा संचालित होता था, और इनमें से चतुर्थ समिति का कार्य व्यापार और वाणिज्य का निरीक्षण करना था।
- 2. सम्राट अशोक के प्रशासन में 'धर्ममहामात्र' नामक उच्च अधिकारियों की नियुक्ति का उल्लेख उसके पाँचवें शिलालेख में मिलता है, जिनका मुख्य दायित्व समाज में धर्म का प्रचार-प्रसार करना, विभिन्न संप्रदायों के बीच सद्भाव बढ़ाना और कैदियों के कल्याण व उनके कष्टों का निवारण करना था।
- 3. मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था में 'सीताध्यक्ष' कृषि विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था, जो राजकीय भूमि (सीता भूमि) पर होने वाली कृषि और दासों तथा कैदियों द्वारा कराए जाने वाले कृषि कार्यों का नियंत्रण करता था।
- 4. अशोक के रुम्मिदेई (लुम्बिनी) स्तंभ लेख से यह ज्ञात होता है कि मौर्य साम्राज्य ने बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण वहाँ का भू-राजस्व (भाग) पूरी तरह माफ कर दिया था और कर की दर को घटाकर एक-आठवां (1/8) कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन तीस सदस्यों की एक परिषद द्वारा चलाया जाता था जो छह समितियों में विभाजित थी। इनमें चौथी समिति व्यापार और वाणिज्य का निरीक्षण करती थी। कथन 2 सही है: सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 13वें वर्ष के बाद 'धर्ममहामात्र' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की थी जिनका उल्लेख उसके पाँचवें शिलालेख में मिलता है, और इनका कार्य धार्मिक सहिष्णुता तथा लोक कल्याण था। कथन 3 सही है: कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' और मौर्य प्रशासन के अनुसार 'सीताध्यक्ष' राजकीय कृषि भूमि (सीता) का अध्यक्ष होता था। कथन 4 गलत है: अशोक के रुम्मिदेई स्तंभ लेख के अनुसार, लुम्बिनी में बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण वहाँ का भू-राजस्व घटाकर 'भाग' को 1/6 से कम करके **1/8** कर दिया गया था और 'बलि' कर को पूरी तरह माफ कर दिया गया था, लेकिन कर को पूर्णतः समाप्त नहीं किया गया था बल्कि आंशिक छूट दी गई थी। मौर्य प्रशासन की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोही गतिविधियों के संचालन तथा नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा बाजीराव द्वितीय का दत्तक पुत्र घोषित कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी और ब्रिटिश कमांडर सर ह्यू व्हीलर की सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया।
2. नाना साहब के मुख्य राजनीतिक सलाहकार और उनके विदेशी मामलों के सचिव अजीमुल्ला खां थे, जिन्होंने इस विद्रोह के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए लंदन तक गुप्त कूटनीतिक प्रयास किए थे।
3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर और कालपी के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यंत प्रभावशाली छापामार युद्ध का संचालन किया था, तथा अंत में उन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा शिवपुरी में खुलेआम फांसी पर लटका दिया गया था।
4. कानपुर में अंग्रेजों के आत्मसमर्पण के समय घटी 'सती चौरा घाट नरसंहार' की घटना के तुरंत पश्चात नाना साहब ने आत्मसमर्पण कर दिया था और ब्रिटिश अदालत में मुकदमा चलाए जाने के बाद उन्हें अंडमान (सेलुलर जेल) आजीवन कारावास के लिए भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के परिणाम और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के शासन का संपूर्ण नियंत्रण ब्रिटिश संसद द्वारा नियुक्त 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) को सौंप दिया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (घोषणापत्र) में देशी रियासतों के राजाओं को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति (जैसे विलय की नीति या राज्य हड़प नीति) का त्याग किया जाता है तथा उनके दत्तक पुत्र लेने के अधिकारों (Adoptive Rights) को मान्यता दी जाएगी।
3. घोषणापत्र में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि सरकारी नौकरियों में नस्लीय भेदभाव को समाप्त करते हुए उच्च पदों पर भारतीयों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के की जाएगी और भारतीय सामाजिक-धार्मिक परंपराओं में ब्रिटिश सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में भारत में यूरोपीय कंपनियों के आगमन और पुर्तगाली तथा ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1612 में हुए 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कप्तान थॉमस बेस्ट ने पुर्तगाली नौसेना को पराजित किया था, जिससे मुगलों के साथ अंग्रेजों के व्यापारिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त हुआ और जहाँगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की अनुमति दी।
2. पुर्तगालियों ने भारत में अपने व्यापारिक एकाधिकार को सुदृढ़ करने के लिए 'कार्टाज व्यवस्था' (Cartaz System) लागू की थी, जिसके तहत अरब सागर और हिंद महासागर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय और एशियाई जहाज को पुर्तगालियों से लाइसेंस (कार्टाज) लेना अनिवार्य था, और अफीम तथा घोड़ों को छोड़कर सभी वस्तुओं का व्यापार इसके दायरे में आता था।
3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस के माध्यम से जहाँगीर के दरबार में शाही फरमान प्राप्त हुआ था, जिसके तहत उन्हें सूरत में कारखाना खोलने और मुगल साम्राज्य के भीतर स्वतंत्र रूप से कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिल गया था।
4. फ्राँसोवा कैरॉन ने वर्ष 1668 में सूरत में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले कारखाने की स्थापना की थी, जिसे बाद में कोचीन और मसूलीपट्टम में भी अपनी व्यापारिक बस्तियाँ स्थापित करने में सफलता मिली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना शहर में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसमें ब्रिटिश अफीम एजेंट डॉ. लॉयल मारा गया था, किंतु बाद में अंग्रेजों द्वारा इस विद्रोह का दमन कर पीर अली को अन्य विद्रोहियों के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाही ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध बगावत कर सोन नदी पार कर आरा पहुँचे और बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में शामिल हो गए।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्र में सैनिकों और स्थानीय जमींदारों ने विद्रोहियों का साथ दिया, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान ने विद्रोही गतिविधियों का नेतृत्व किया, जबकि तिरहुत (मुजफ्फरपुर) के कमिश्नर विलियम टेलर ने इस क्षेत्र में विद्रोही तत्वों का दमन करने के लिए कठोर उपाय अपनाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्वकर्ताओं तथा उनके दमन से जुड़े ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह (नेतृत्व) एवं जनरल कैंपबेल (दमन)
2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर कॉलिन कैंपबेल (दमन)
3. इलाहाबाद — मौलवी लियाकत अली (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन)
4. फैजाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं ह्यूरोज़ (दमन)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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