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History of India
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन के प्रारंभिक चरणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी के साथ अनुग्रह नारायण सिंह, राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे प्रमुख स्थानीय वकीलों ने भी जाँच कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग दिया था।
- 2. चंपारण कृषि समिति के सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने स्वयं यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 100 प्रतिशत हिस्सा वापस करने की मांग पर अड़े रहकर अंततः उसे शत-प्रतिशत वसूल कराया था।
- 3. असहयोग आंदोलन के दौरान 1 फरवरी 1922 को महात्मा गांधी ने वायसराय को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि बारडोली में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने की छूट नहीं दी गई और राजनीतिक बंदियों को रिहा नहीं किया गया, तो वे सामूहिक सविनय अवज्ञा शुरू कर देंगे।
- 4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) के बाद कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बारडोली बैठक में असहयोग आंदोलन को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया गया, जिससे देश के सभी युवा और वरिष्ठ नेताओं ने सर्वसम्मति से बिना किसी विरोध के तुरंत स्वीकार कर लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, ब्रजकिशोर प्रसाद और जे.बी. कृपलानी जैसे दिग्गज नेताओं ने महात्मा गांधी का पूरा साथ दिया था और किसानों के बयानों को दर्ज किया था। कथन 2 गलत है क्योंकि गांधीजी ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अवैध वसूली का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा वापस लेने की मांग पर समझौता किया था, जिसे बागान मालिकों ने स्वीकार कर लिया था। कथन 3 सही है, 1 फरवरी 1922 को गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड रीडिंग को चेतावनी दी थी कि बारडोली में सामूहिक सविनय अवज्ञा शुरू की जाएगी। कथन 4 गलत है क्योंकि बारडोली प्रस्ताव में आंदोलन स्थगित करने के निर्णय का सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू और चित्तरंजन दास जैसे कई युवा व प्रमुख नेताओं ने कड़ा विरोध किया था। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे, वित्त प्रबंधन और छत्रपति शिवाजी महाराज की राजस्व प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की राजस्व प्रणाली को आधार बनाते हुए काठी और बीघा के पैमानों से भूमि की पैमाइश करवाई तथा बिचौलियों (देशमुखों, पाटिल और कुलकर्णी) के अधिकारों को सीमित कर दिया।
2. 'अष्टप्रधान' मंडल में 'पंडितराव' का मुख्य कार्य धार्मिक मामलों को देखना, दान-पुण्य के कार्यों का प्रबंध करना और समाज में नैतिक नियमों तथा आचार-विचार की शुद्धता सुनिश्चित करना था।
3. शिवाजी के शासनकाल में वसूला जाने वाला 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या स्वराज के बाहर के राज्यों पर आक्रमण न करने और उनकी सुरक्षा की गारंटी देने के एवज में कुल भू-राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा था।
4. 'सरदेशमुखी' कर कुल उपज या राजस्व का दस प्रतिशत होता था, जिसे शिवाजी संपूर्ण महाराष्ट्र क्षेत्र पर अपने सर्वोच्च 'सरदेशमुख' (वंशानुगत प्रधान राजस्व संग्रही) होने के पारंपरिक दावे के रूप में वसूल करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत में सोलह महाजनपादों के उदय और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें से वज्जी और मल्ल संघ में राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर गणतांत्रिक (संघीय) शासन प्रणाली प्रचलित थी।
2. मगध साम्राज्य के उत्थान में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; राजगीर (गिरिव्रज) जैसी प्राकृतिक रूप से पहाड़ियों से घिरी राजधानी और पाटलिपुत्र की जल-दुर्ग जैसी स्थिति ने उसे सामरिक और व्यापारिक सुरक्षा प्रदान की।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, मद्र और लिच्छवि राजवंशों से विवाह) की नीति अपनाई, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने काशी और वैशाली को मगध में मिलाने के लिए रथ-मूसल और महाकंटकसंग्रह जैसे नवीन युद्ध हथियारों का प्रयोग किया था।
4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती साम्राज्य को मगध में मिलाकर उसकी शक्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, और इसी काल में मगध की राजधानी को पाटलिपुत्र से हटाकर पुनः वैशाली स्थानांतरित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के तुरंत बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिसके फलस्वरूप यह आंदोलन पूरी तरह नेतृत्वहीन हो गया और इसमें आम जनता की कोई सक्रिय भागीदारी नहीं देखी गई।
2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में जर्मनी पहुँचकर 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की और बर्लिन रेडियो से भारतीयों को संबोधित करते हुए पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर महात्मा गांधी को संबोधित किया था।
3. बैंकॉक सम्मेलन (1942) के उपरांत रास बिहारी बोस के प्रयासों से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' की स्थापना हुई, और वर्ष 1943 में सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने 'अस्थायी सरकार - आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की घोषणा की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (नरम दल काल) और उसके उपरांत उत्पन्न हुए उग्रवादी (गरम दल) राष्ट्रवाद के वैचारिक संघर्ष एवं कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक विचारधारा 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) पर आधारित थी, जो ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास रखते थे और 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की त्रिविध पद्धति का समर्थन करते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशनों में 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'राष्ट्रीय शिक्षा' और 'स्वराज' के प्रस्तावों को शामिल करने का पुरजोर दबाव बनाया, जिसे नरमपंथियों ने बिना किसी वैचारिक मतभेद के तुरंत स्वीकार कर लिया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन अनिवार्य हो गया, जिसका तात्कालिक कारण उग्रवादियों द्वारा रास बिहारी घोष को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुने जाने का तीव्र विरोध करना था, क्योंकि उग्रवादी दल लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटित घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों को लोड करने से पहले मुँह से काटना पड़ता था और ऐसी अफवाह व तथ्य सामने आए कि उनमें गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
2. 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध कड़ा विरोध जताते हुए ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था।
3. मंगल पांडे को इस अनुशासनहीनता और विद्रोह के लिए 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप बैरकपुर छावनी की उस पूरी रेजिमेंट को ब्रिटिश प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से बिना किसी जाँच के स्थायी तौर पर भंग कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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