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History of India
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और उनके भौगोलिक विस्तार तथा राजधानियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अंग - राजधानी: चंपा (वर्तमान मुंगेर और भागलपुर क्षेत्र)
  2. 2. वत्स - राजधानी: कौशाम्बी (वर्तमान इलाहाबाद के समीप)
  3. 3. मल्ल - राजधानी: कुशीनगर एवं पावा (वर्तमान देवरिया और गोरखपुर क्षेत्र)
  4. 4.

अस्मक - राजधानी: पोटली या पोतन (गोदावरी नदी के तट पर स्थित एकमात्र महाजनपद) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत में राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के फलस्वरूप बौद्ध ग्रंथ (जैसे 'अंगुत्तर निकाय') और जैन ग्रंथ (जैसे 'भगवती सूत्र') में कुल सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इन महाजनपदों में अंग की राजधानी चंपा थी, वत्स की राजधानी कौशाम्बी थी, मल्ल एक संघ राज्य था जिसकी दो राजधानियाँ कुशीनगर और पावा थीं, तथा अस्मक (अश्मक) गोदावरी नदी के तट पर दक्षिण भारत में स्थित एकमात्र महाजनपद था जिसकी राजधानी पोटली या पोतन थी। इस काल में मगध साम्राज्य ने अपनी सामरिक और भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए अन्य महाजनपदों को पराजित कर साम्राज्य विस्तार किया। विकिपीडिया संदर्भ
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पुर्तगाली औपनिवेशिक विस्तार और भारत में यूरोपीय व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने भारत में पुर्तगाली शक्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का क्रियान्वयन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को पुर्तगाली झील में बदलना और अरब सागर के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना था। 2. अल्फोंसू डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा पर अधिकार कर लिया और क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने जैसे साहसिक सामाजिक कदम उठाए। 3. नुनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर के रूप में कार्य करते हुए 1530 में अपनी आधिकारिक राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित करके गोवा बनाया, तथा गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से बेसिन एवं दीव जैसे सामरिक क्षेत्रों पर अधिकार प्राप्त किया। 4. पुर्तगालियों द्वारा शुरू की गई 'कार्टेज' (Cartaz) व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली के अंतर्गत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाए बिना हिंद महासागर के किसी भी मार्ग पर स्वतंत्र रूप से आवागमन करने की पूर्ण छूट प्राप्त थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पानीपत का तीसरा युद्ध (1761) किसके बीच? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इतिहासकार टी. आर. होम्स ने वर्ष 1857 के विद्रोह को 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (Conflict between civilization and barbarism) करार दिया था। 2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में दिए गए अपने भाषण में इस घटना को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' न कहकर इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National revolt) की संज्ञा दी थी। 3. वी. डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया था। 4. सर जॉन सीले और चाल्र्स रीस जैसे इतिहासकारों का यह मानना था कि यह विद्रोह पूरी तरह से एक देशभक्तिपूर्ण जन-आंदोलन था, जिसमें जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी थी और इसका अंग्रेजों के विरुद्ध कोई धार्मिक या नस्लीय पूर्वाग्रह नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह के दमन और इसके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था, और उनके दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील को भेजा गया था जिन्होंने अंततः इस क्षेत्र में विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया था। 2. बरेली में रोहिलखंड के पूर्व शासक के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह का नेतृत्व किया और अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने वर्ष 1858 की शुरुआत में इस विद्रोह को क्रूरता से दबा दिया और खान बहादुर खान को मृत्युदंड दिया गया। 3. इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्होंने वहाँ स्थित ऐतिहासिक किले पर अधिकार कर लिया था, और जनरल नील ने अत्यधिक निर्ममता से इस विद्रोह का दमन करते हुए शहर में बड़े पैमाने पर फांसी की सजाएं दी थीं। 4. इन तीनों केंद्रों पर विद्रोह के दमन के उपरांत ब्रिटिश साम्राज्य ने स्थानीय जनता का विश्वास जीतने के लिए दमनकारी नीतियों को त्यागकर पूरी तरह से उदार और क्षमादान की नीति का पालन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा अंतर सही सुमेलित है?
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