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History of India
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वैदिक साहित्य और दर्शन के संदर्भ में, 'आरण्यक', 'उपनिषद' तथा वैदिक काल की दार्शनिक प्रवृत्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आरण्यकों को 'रहस्यमय पुस्तकें' (Mystery Books) भी कहा जाता है, जिनकी रचना मुख्य रूप से जंगलों में एकांत वास करने वाले संन्यासियों और मुनियों के लिए की गई थी, और ये यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर उनके दार्शनिक तथा रहस्यवादी अर्थों की व्याख्या करते हैं।
- 2. उपनिषदों को 'वेदांत' भी कहा जाता है, क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं और इनमें मुख्य रूप से बहुदेववाद तथा कर्मकांडीय अनुष्ठानों का समर्थन किया गया है, जबकि आत्मा (आत्मन्) और ब्रह्मांडीय चेतना (ब्रह्मन्) के बीच की एकता को नकारा गया है।
- 3. ऋग्वेद में उल्लिखित 'नासदि सूक्त' (दसवें मंडल का प्रसिद्ध सूक्त) सृष्टि की उत्पत्ति के रहस्य और ब्रह्मांड के सृजन से जुड़े दार्शनिक एवं अज्ञेयवादी (Agnostic) विचारों को प्रस्तुत करता है, जो यह प्रश्न उठाता है कि वास्तव में इस सृष्टि को किसने उत्पन्न किया।
- 4. वैदिक दर्शन के 'षड्दर्शन' (छह आस्तिक दर्शन) में से 'सांख्य दर्शन' के प्रस्तोता महर्षि कपिल थे, जो प्रकृति और पुरुष के द्वैत सिद्धांत पर आधारित है और पूरी तरह से ईश्वर के अस्तित्व को अनिवार्य नहीं मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त कथनों में से कथन 1, 3 और 4 सही हैं, जबकि कथन 2 गलत है। उपनिषदों को 'वेदांत' कहा जाता है क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं, किंतु इनमें कर्मकांडों और बहुदेववाद का समर्थन नहीं किया गया है, बल्कि ये यज्ञीय कर्मकांडों की तीखी आलोचना करते हुए 'ब्रह्म' और 'आत्मा' के अद्वैत ज्ञान तथा आत्म-साक्षात्कार पर बल देते हैं। आरण्यक वे ग्रंथ हैं जिनकी रचना वनों में की गई और जो यज्ञों के गूढ़ रहस्यों को समझाते हैं। ऋग्वेद का नासदि सूक्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर दार्शनिक चिंतन प्रस्तुत करता है। भारतीय दर्शन के विकास के विषय में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का औपचारिक रूप से अंत कर दिया गया और भारत का सीधा नियंत्रण ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया, तथा 'भारत के गवर्नर-जनरल' को 'वायसराय' पदनाम दिया गया जो सीधे ब्रिटिश मंत्रिमंडल के प्रति उत्तरदायी था।
2. 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई महारानी विक्टोरिया की घोषणा में देशी रियासतों के संबंध में यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार नहीं किया जाएगा और राज्यों के 'गोद लेने के अधिकार' (Doctrine of Lapse) को मान्यता दी जाएगी।
3. घोषणा पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के धार्मिक एवं सामाजिक आचरण में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा सार्वजनिक सेवाओं में रंग, नस्ल या जन्म के आधार पर बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में गठित 'पील आयोग' (Peel Commission) की संस्तुतियों के तहत भारतीय सैनिकों का अनुपात यूरोपीय सैनिकों की तुलना में काफी बढ़ा दिया गया और तोपखाने जैसे संवेदनशील सैन्य विभागों को पूरी तरह से भारतीय सैनिकों के नियंत्रण में सौंप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के परिणामों और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1 नवंबर 1858) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासत के विलय (Doctrine of Lapse) की नीति को आगे भी जारी रखेगी तथा भारतीय राजाओं को उत्तराधिकारी गोद लेने के अधिकार से वंचित रखा जाएगा।
3. घोषणा पत्र में धार्मिक सहनशीलता का स्पष्ट उल्लेख करते हुए यह वादा किया गया कि बिना किसी भेदभाव के नस्ल, वर्ण या धर्म के आधार पर योग्यतानुसार सभी को सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा, किंतु सेना में यूरोपीय सैनिकों के अनुपात को कम करने के बजाय और अधिक बढ़ा दिया गया ताकि भविष्य में ऐसे विद्रोहों को रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के वैचारिक तथा ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सिंगापुर में जापानी साम्राज्यवादी सेना के सहयोग से रास बिहारी बोस और कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) का पुनर्गठन कर उसका सर्वोच्च राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपा गया था, जिन्होंने वर्ष 1943 में सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी।
2. सुभाष चंद्र बोस द्वारा सिंगापुर से 'आज़ाद हिंद रेडियो' के माध्यम से प्रसारित किए गए एक ऐतिहासिक संदेश में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा गया था, और आज़ाद हिंद फौज की सैन्य टुकड़ियों के नामकरण गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और खुद सुभाष चंद्र बोस के नाम पर किए गए थे, तथा महिलाओं की रेजिमेंट का नाम 'झांसी की रानी रेजिमेंट' रखा गया था।
3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के भीतर वामपंथी समाजवादी नेताओं (जैसे जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया) और भूमिगत कार्यकर्ताओं ने सुभाष चंद्र बोस की फॉरवर्ड ब्लॉक विचारधारा का समर्थन किया था, जबकि महात्मा गांधी और मुख्यधारा के कांग्रेस नेतृत्व ने धुरी राष्ट्रों (विशेषकर जापान और जर्मनी) के सैन्य सहयोग से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करने की सुभाष चंद्र बोस की रणनीति का पूर्ण समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का मंत्रिपरिषद) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, जिसमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री का पद संभालता था, किंतु अष्टप्रधान के सभी सदस्य वंशानुगत होते थे और उन्हें राजा के सैनिक अभियानों में भाग लेना अनिवार्य था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाते हुए माप की प्रणाली ('काठी' और 'मान') को अपनाया, तथा राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर) नामक कर वसूल करने की प्रणाली विकसित की।
3. मराठा नौसेना (Navy) का सुदृढ़ीकरण शिवाजी की एक दूरदर्शी सैन्य नीति का हिस्सा था, जिसके तहत उन्होंने कोलाबा, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा पश्चिमी तट पर जंजीरा के सिद्दी और विदेशी ताकतों (पुर्तगालियों और अंग्रेजों) की नौसैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
4. शिवाजी के उत्तराधिकार के काल में वर्ष 1731 में 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) के द्वारा छत्रपति और पेशवा के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हो गया, जिसके तहत कोल्हापुर के छत्रपति (संभाजी द्वितीय) और सतारा के छत्रपति (शाहू प्रथम) के बीच मराठा राज्य की संप्रभुता का औपचारिक बंटवारा हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल काल के वैचारिक संघर्ष तथा प्रमुख अधिवेशनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यपद्धति मुख्य रूप से '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और विरोध (Protest) पर आधारित थी तथा उन्हें ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का औपचारिक समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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