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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक एवं सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में अष्टप्रधान (Ashtapradhan) नामक मंत्रिपरिषद की व्यवस्था थी, जिसमें 'पंडितराव' धार्मिक मामलों और दान-पुण्य का प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि 'न्यायाधीश' सैन्य मामलों का सर्वोच्च कमांडर होता था।
- 2. शिवाजी की राजस्व प्रणाली मुख्य रूप से मलिक अंबर की रयातवाड़ी व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत भूमि की पैमाइश कर उपज का 30 प्रतिशत भाग राज्य की आय के रूप में निश्चित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था।
- 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठों द्वारा पड़ोसी क्षेत्रों से वसूले जाने वाले कर थे, जहाँ 'चौथ' उस क्षेत्र की कुल राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा होता था जो मराठा आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में लिया जाता था, जबकि 'सरदेशमुखी' मराठा राजा के सर्वोच्च वंशागत अधिकारों को स्वीकार करने के एवज में 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के रूप में वसूला जाता था।
- 4. शिवाजी की पैदल सेना (मावल सैनिकों) को 'पागा' कहा जाता था, जिसमें घुड़सवार सैनिक और हाथी सेना शामिल होते थे, जबकि नियमित घुड़सवार सेना को 'सिलहदार' कहा जाता था जिन्हें राज्य द्वारा हथियार और घोड़े प्रदान किए जाते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि 'अष्टप्रधान' में 'न्यायाधीश' नागरिक और फौजदारी मामलों में न्याय का प्रमुख था, जबकि सैन्य मामलों का सर्वोच्च कमांडर या सेनापति 'सेनापति' (या सर-ए-नौबत) कहलाता था। कथन 2 सही है, शिवाजी ने मलिक अंबर की राजस्व पद्धति को अपनाते हुए भूमि की माप कराई और प्रारंभ में उपज का 30% कर निर्धारित किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था। कथन 3 बिल्कुल सही है; चौथ और सरदेशमुखी मराठा साम्राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्रोत थे, जहाँ चौथ 25% सुरक्षा कर था और सरदेशमुखी 10% अतिरिक्त कर था। कथन 4 गलत है क्योंकि शिवाजी की घुड़सवार सेना में दो प्रमुख श्रेणियाँ थीं—'बरगीर' (जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र मिलते थे) और 'सिलहदार' (जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार लाते थे), जबकि 'पागा' राज्य द्वारा सुसज्जित घुड़सवार सैनिकों की इकाई थी। इस प्रकार केवल कथन 2 और 3 सही हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज़ की सेना द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ किले की रक्षा की, और किले के पतन के बाद तात्या टोपे की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया जहाँ दोनों की संयुक्त सेना अंग्रेजों से पराजित हुई।
2. कालपी की पराजय के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया, जहाँ सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया ने उनका खुलकर समर्थन किया और ग्वालियर के किले पर अधिकार करने में अपनी सेना उनके साथ मिला दी।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के पश्चात तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने संयुक्त रूप से ब्रिटिश सेना का सामना किया, और 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे ने मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखा, किंतु उनके एक विश्वासघाती जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य और राजनीतिक संचालन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व नाना साहब (बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने संभाला, जिन्हें पेशवा घोषित किया गया और अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार तथा राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य कर रहे थे।
2. नाना साहब के सैनिकों ने कानपुर में सर ह्यू व्हीलर के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश किया, किंतु 'सती चौरा घाट' की घटना के उपरांत ब्रिटिश सेना द्वारा बड़े पैमाने पर नरसंहार किए जाने के बाद नाना साहब और उनके सहयोगियों को अंग्रेजों के हाथों भारी पराजय का सामना करना पड़ा।
3. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सुरक्षा का कमान संभाला और ग्वालियर की विद्रोही सेना को अपने साथ मिलाकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने के लिए सर कॉलिन कैंपबेल की अंग्रेजी सेना के विरुद्ध भीषण संघर्ष किया।
4. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने नाना साहब के साथ नेपाल की तराई में शरण ले ली और आजीवन अंग्रेजों के हाथ नहीं आए, जबकि अजीमुल्ला खां को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के संचालन और रणनीतिक नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने कानपुर की सेना के वास्तविक सैन्य कमांडर के रूप में अंग्रेजी सेना के खिलाफ उत्कृष्ट सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया और बाद में जनरल विंडहैन की ब्रिटिश सेना को कानपुर से खदेड़ने में सफलता प्राप्त की थी।
3. नाना साहब और उनके सहयोगियों द्वारा ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत कानपुर में 'बीबीघर हत्याकांड' (Bibighar Massacre) की घटना घटी, जिसके पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया था।
4. ब्रिटिश दमन चक्र के तीव्र होने पर नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि तात्या टोपे ने ग्वालियर और मध्य भारत की ओर प्रस्थान कर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध जारी रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक मूल्यांकन के संदर्भ में, विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों पर विचार कीजिए:
1. वी. डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा दी है।
2. डॉ. आर. सी. मजूमदार का यह प्रसिद्ध मत था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'-
3. सर जॉन लॉरेन्स और सी. ई. आर. सी. सी. रीस के अनुसार यह विद्रोह मूल रूप से केवल 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय मुक्ति न होकर सैनिकों का पेशेवर असंतोष था।
4. टी. आर. होम्स का यह कथन था कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने "पेशवा" के पद को क्या किया?
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