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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के अधिकारियों द्वारा विद्रोह को दबाने के अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दिल्ली - जॉन निकलसन
  2. 2. लखनऊ - कॉलिन कैंपबेल
  3. 3. झांसी और ग्वालियर - ह्यूरोज
  4. 4.

इलाहाबाद - जेम्स आउट्राम उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने सबसे अनुभवी सैन्य अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजा था। जॉन निकलसन (John Nicholson) ने दिल्ली में विद्रोहियों का दमन किया, हालाँकि इस अभियान में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। लखनऊ में विद्रोह को दबाने और ब्रिटिश रेजिडेंसी को मुक्त कराने में सर कॉलिन कैंपबेल (Colin Campbell), हेनरी लॉरेंस और जेम्स आउट्राम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जहाँ कैंपबेल ने मुख्य रूप से सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था। झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के विरुद्ध ब्रिटिश सेना का नेतृत्व सर ह्यूरोज (Sir Hugh Rose) ने किया था, जिन्होंने झांसी के पतन के बाद ग्वालियर पर भी नियंत्रण प्राप्त किया। वहीं, इलाहाबाद (और बनारस) में विद्रोह का दमन करने वाले प्रमुख अधिकारी कर्नल जेम्स नील (Colonel James Neil) थे, न कि जेम्स आउट्राम (जेम्स आउट्राम मुख्य रूप से लखनऊ और अवध से संबंधित थे)। अतः युग्म 4 सही सुमेलित नहीं है। इस ऐतिहासिक संघर्ष के विस्तृत विवरण के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज द्वारा झाँसी के घेरा डालने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यधिक वीरतापूर्वक शहर की रक्षा की और अंततः तात्या टोपे की सहायता से कालपी की ओर प्रस्थान किया जहाँ दोनों की संयुक्त सेना ने अंग्रेजों का मुकाबला किया। 2. कालपी में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को अपनी ओर मिलाते हुए ग्वालियर के दुर्ग पर अधिकार कर लिया। 3. ग्वालियर के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे नेपाल की पहाड़ियों में सुरक्षित निकल गए जहाँ उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोहियों के पास एक अखिल भारतीय दृष्टिकोण, सुदृढ़ केंद्रीय नेतृत्व और एक सुनियोजित राजनीतिक-आर्थिक कार्यक्रम का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और सीमित दायरे से ऊपर उठकर अंग्रेजों के विरुद्ध समेकित रणनीति नहीं बना सके। 2. ब्रिटिश सेना की तुलना में विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, संचार माध्यमों (जैसे टेलीग्राफ और रेलवे) तथा सैन्य अनुशासन की भारी कमी थी, और देश के अधिकांश बड़े रजवाड़े तथा शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह से तटस्थ दूरी बनाए रखी या अंग्रेजों का समर्थन किया। 3. बहादुर शाह ज़फ़र को औपचारिक रूप से विद्रोह का सर्वोच्च नेता घोषित तो किया गया था, किंतु उनकी वृद्धावस्था, सैन्य अनुभव की कमी और आंतरिक गुटबाजी के कारण वे विभिन्न छावनियों और सेनापतियों के बीच आवश्यक सामंजस्य स्थापित करने में पूरी तरह असमर्थ रहे। 4. विद्रोह का प्रारंभ समय से पूर्व (निश्चित तिथि 31 मई के बजाय मई के आरंभ में ही) हो जाने के कारण संपूर्ण देश में एक साथ समकालिक विद्रोह योजना धरी की धरी रह गई, जिससे ब्रिटिश सेना को इसे क्षेत्रवार तरीके से कुचलने का अवसर मिल गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → नूरजहाँ के पिता गियास बेग को जहाँगीर ने कौन सी महत्वपूर्ण उपाधि दी थी? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में क्रांतिकारियों के नेतृत्व, सैन्य गतिविधियों और ब्रिटिश प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के लिए अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था। 2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का प्रभावी सैन्य नेतृत्व किया, तथा ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक की संयुक्त सेना के साथ भीषण संघर्ष के उपरांत ग्वालियर से आकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने का सफल प्रयास किया था। 3. सती चौरा घाट की घटना के उपरांत कानपुर में ब्रिटिश अधिकारियों और आत्मसमर्पण करने वाले यूरोपीय नागरिकों के साथ हुए संघर्ष में अजीमुल्ला खां की प्रमुख कूटनीतिक भूमिका थी, जिन्होंने बाद में विद्रोह के प्रचार हेतु विदेशों में भी प्रयास किए थे। 4. कानपुर में विद्रोह के पूर्ण दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज ने नाना साहब और तात्या टोपे को गिरफ्तार कर लिया था, जहाँ नाना साहब को तोप से उड़ा दिया गया और तात्या टोपे को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली में 1857 के विद्रोह के नेतृत्व, प्रतीकात्मक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति और सैन्य गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यद्यपि मेरठ से आए विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को दिल्ली पहुंचकर वृद्ध मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंदुस्तान) घोषित कर दिया था, किंतु जफर ने शुरुआत में इस प्रस्ताव को अत्यधिक अनिच्छा से स्वीकार किया क्योंकि उन्हें अंग्रेजों की सैन्य शक्ति और अपनी ही स्थिति की दुर्बलता का पूर्ण आभास था। 2. दिल्ली में विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य और प्रशासनिक कमान जनरल बख्त खान के हाथों में थी, जो बरेली से आने वाली विद्रोही तोपखाने की सेना का नेतृत्व कर रहे थे और जिन्हें जफर द्वारा 'साहिब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि प्रदान की गई थी। 3. दिल्ली पर पुन: अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने सितंबर 1857 में कश्मीरी गेट पर भीषण आक्रमण किया, जिसमें ब्रिटिश अधिकारी जॉन निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। 4. हुमायूं के मकबरे से ब्रिटिश अधिकारी मेजर विलियम हडसन द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद बहादुर शाह जफर पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चलाया गया और उन्हें दोषी ठहराकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सेलुलर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया गया, जहाँ वर्ष 1862 में उनकी मृत्यु हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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