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History of India
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मौर्य साम्राज्य के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासनकाल तथा उनकी प्रशासनिक एवं धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जैन परंपरा के अनुसार, अपने शासन के अंतिम वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य ने भीषण अकाल के समय भद्रबाहु के प्रभाव में आकर जैन धर्म दीक्षा ली और श्रवणबेलगोला में संलेखना (संथारा) पद्धति द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे।
  2. 2. अशोक के 'भाब्रू (बैराट) लघु शिलालेख' से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि उनका व्यक्तिगत झुकाव बौद्ध धर्म की त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म और संघ) में अटूट आस्था और निष्ठा के प्रति था।
  3. 3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना था, और धम्म नीति के अंतर्गत उन्होंने पशु-बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ केवल शाकाहारी भोजन को अनिवार्य कर दिया था।
  4. 4. यूनानी इतिहासकार प्लूटार्क और जस्टिन के विवरणों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी विशाल सेना (जिसमें छह लाख सैनिक शामिल थे) के बल पर संपूर्ण भारत को रौंद डाला और यूनानी क्षत्रप सेलुकस निकेटर को पराजित कर एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया और पैरोपैनिसाडाई के प्रदेश प्राप्त किए थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि जैन ग्रंथों के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य अपने अंतिम समय में जैन भिक्षु भद्रबाहु के साथ मैसूर के श्रवणबेलगोला गए और वहाँ उपवास द्वारा प्राण त्यागे। कथन 2 सही है क्योंकि भाब्रू लघु शिलालेख में अशोक बुद्ध, धम्म और संघ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि अशोक ने पशुओं की बलि और अनावश्यक वध पर रोक जरूर लगाई थी, किंतु उन्होंने राज्य में मांसाहार या शाकाहारी भोजन को पूरी तरह अनिवार्य नहीं किया था, बल्कि अपने शुरुआती दौर में रसोई में मारे जाने वाले पशुओं की संख्या सीमित की थी। कथन 4 सही है क्योंकि यूनानी लेखकों (जैसे प्लूटार्क और जस्टिन) के अनुसार चंद्रगुप्त ने अपनी विशाल सेना से पूरे देश पर अधिकार किया और सेलुकस निकेटर के साथ हुई संधि में चार बड़े प्रांत (काबुल, कंधार, हेरात और बलूचिस्तान) प्राप्त किए थे। इस काल के विस्तार से अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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