त्वरित लिंक्स
History of India
2 views
मुगलकालीन प्रशासनिक संस्थाओं और नीतियों के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल में वर्ष 1574-75 के आसपास मनसबदारी व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, जिसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और पद-स्थिति को दर्शाता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को निश्चित करता था।
- 2. जहाँगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में एक नया सुधार करते हुए 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत बिना 'जात' पद बढ़ाए किसी मनसबदार को अपने निर्धारित 'सवार' घोड़ों की संख्या दोगुनी करने की अनुमति मिल जाती थी।
- 3. शाहजहाँ के शासनकाल के अंतिम वर्षों में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो जाने के कारण उन्हें वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त 'खलसा' और 'जागीर' भूमियाँ उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पन्न इस गंभीर वित्तीय असंतुलन को 'जागीर संकट' कहा जाता है।
- 4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल में चित्रकला को पूरी तरह राजकीय संरक्षण से वंचित कर दिया, संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर धार्मिक व नैतिक नियमों का पालन करने के लिए 'मुहतसिब' (जन आचरण के निरीक्षकों) की नियुक्ति की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि अकबर द्वारा शुरू की गई मनसबदारी व्यवस्था में जात और सवार श्रेणियों का निर्धारण किया गया था। कथन 2 सही है; जहाँगीर ने 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली लागू की जिससे बिना जात पद बढ़ाए सवार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी। कथन 3 गलत है क्योंकि 'जागीर संकट' मुख्य रूप से औरंगजेब के शासनकाल के उत्तरार्ध में उत्पन्न हुआ था, न कि शाहजहाँ के अंतिम वर्षों में (यद्यपि इसकी शुरुआत के बीज शाहजहाँ के काल में पड़ चुके थे, किंतु गंभीर संकट औरंगजेब के समय उपजा)। कथन 4 सही है, औरंगजेब ने कला और संगीत पर प्रतिबंध लगाया और मुहतसिबों की नियुक्ति की। इस प्रशासनिक विकास के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
महात्मा गांधी के भारत आगमन के उपरांत उनके शुरुआती सत्याग्रहों—चंपारण (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू की जाने वाली 'तीनकथा प्रणाली' के अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना बाध्यकारी था, और इस प्रथा के विरुद्ध गांधीजी को राजकुमार शुक्ल ने आमंत्रित किया था।
2. खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने किसानों का नेतृत्व करते हुए इस बात पर बल दिया कि यदि फसल सामान्य उत्पादन के एक-चौथाई (25%) से भी कम हुई हो, तो राजस्व संहिता के नियमानुसार किसानों का लगान पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए, और इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधीजी के मुख्य सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. अहमदाबाद के मिल मजदूरों और मिल मालिकों के बीच प्लेग बोनस को लेकर हुए विवाद के दौरान गांधीजी ने प्लेग बोनस पूरी तरह समाप्त करने की मांग का समर्थन किया और पहली बार भारत में मजदूरों के पक्ष में भूख हड़ताल का सफल प्रयोग किया था।
4. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से प्रभावित होकर ही रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, तथा इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप सरकार ने 'चंपारण कृषि अधिनियम' पारित कर तिनकथा प्रथा को अवैध घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और तात्या टोपे के आने से पूर्व ही किले की प्राचीर से कूदकर कालपी सुरक्षित पहुँच गईं, जहाँ दोनों की संयुक्त सेना ने अंग्रेजों का मुकाबला किया।
2. कालपी के युद्ध में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया की सेना को पराजित कर ग्वालियर के सामरिक दुर्ग पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब को औपचारिक रूप से पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर के पतन के उपरांत ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा पुनः अधिकार करने के लिए किए गए अंतिम निर्णायक आक्रमण के दौरान 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोतकी-सराय में लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे मध्य भारत के जंगलों में चले गए, जहाँ उन्होंने लंबे समय तक गोरिल्ला युद्ध का सफल संचालन किया, किंतु अंततः उनके ही एक विश्वासघाती जमींदार (मानसिंह) के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया और शिवपुरी में फाँसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में यह निर्णय लिया जाना था कि क्या इन प्रांतों का विभाजन किया जाए, तथा इसके लिए मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को संयुक्त रूप से एक ही सदन में बैठक कर साधारण बहुमत से निर्णय लेने का प्रावधान था।
2. इस योजना के प्रावधानों के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के पक्ष में निर्णय लेने हेतु जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने की स्पष्ट व्यवस्था की गई थी।
3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के पारित होने के पश्चात ब्रिटिश संसद की संप्रभुता भारत और पाकिस्तान दोनों डोमिनियनों पर समाप्त हो गई और दोनों नए राष्ट्रों के संविधान का निर्माण होने तक उनके अंतरिम संविधान के रूप में 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' को कुछ संशोधनों के साथ लागू रखने का प्रावधान किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
1857 के विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का कोई एक केंद्रीय, सर्वमान्य और सुसंगठित राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व नहीं था, तथा विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं में आपसी समन्वय और एक साझा भविष्य के भारत का राजनीतिक दृष्टिकोण पूरी तरह से गायब था।
2. ब्रिटिश सेना की तुलना में विद्रोहियों के पास न तो आधुनिक सैन्य तकनीक, हथियारों और रसद की पर्याप्त आपूर्ति थी और न ही उनके पास कोई पूर्व-नियोजित दीर्घकालिक रणनीतिक योजना थी, जिसके कारण वे लंबी लड़ाई लड़ने में असमर्थ रहे।
3. भारत के अधिकांश बड़े जमींदारों, साहूकारों, शिक्षित मध्यम वर्ग और अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे ग्वालियर के सिंधिया, हैदराबाद के निजाम और इंदौर के होलकर) ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय समर्थन किया।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वारा विद्रोह की कमान संभालने के बाद भारतीय सैनिकों को एक सशक्त और निर्णायक केंद्रीय नेतृत्व प्राप्त हो गया, जिससे अंग्रेजों के विरुद्ध सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों में अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में दमदम छावनी में यह अफवाह फैली कि नई एनफील्ड राइफल में प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के आवरण पर गाय और सूअर की चर्बी का लेप लगाया गया है, जिसे लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
2. 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री (34th Native Infantry) के सिपाही मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बाग और ह्यूसन पर हमला कर उनकी हत्या कर दी।
3. मंगल पांडे को इस कृत्य के लिए 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरुप इस घटना ने संपूर्ण उत्तर भारत के सैनिकों में असंतोष की आग को भड़का दिया, जो आगे चलकर 1857 के महान विद्रोह के रूप में फूटी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.