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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के वैचारिक मतभेदों तथा वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कांग्रेस के नरमपंथी नेताओं का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर औपनिवेशिक स्वराज्य (Dominion Status) प्राप्त करना था, जिसके लिए वे मुख्य रूप से '3P' (Prayer, Petition and Protest) की संवैधानिक पद्धति में विश्वास रखते थे।
  2. 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस ने दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में पहली बार 'स्वराज' (Swaraj) शब्द का आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया, तथा स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा से संबंधित चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकार किया गया।
  3. 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर नरम दल और गरम दल में खुला संघर्ष हुआ, जहाँ नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनवाने में सफलता प्राप्त की, जबकि गरम दल बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहता था।
  4. 4. सूरत अधिवेशन के पश्चात सरकार द्वारा गरम दल के विरुद्ध अपनाई गई दमनकारी नीतियों के तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें बर्मा की मांडले जेल में छह वर्ष के कारावास की सजा भुगतनी पड़ी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह सही हैं। कांग्रेस के शुरुआती वर्षों में नरमपंथियों (जैसे गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता आदि) का प्रभाव था जो प्रार्थना, याचिका और विरोध की राजनीति करते थे। बंगाल विभाजन के बाद 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष रहते हुए पहली बार 'स्वराज' का लक्ष्य रखा गया। 1907 के सूरत अधिवेशन में अध्यक्ष पद को लेकर दोनों धड़ों में मतभेद हुआ, रास बिहारी घोष कांग्रेस के अध्यक्ष बने और कांग्रेस का विभाजन हो गया। इसके बाद गरम दल के नेता बाल गंगाधर तिलक को गिरफ्तार कर मांडले जेल भेज दिया गया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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