त्वरित लिंक्स
History of India
1 views
प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक तथा संस्थागत विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, ज्ञान और सत्य के अनेक दृष्टिकोण हो सकते हैं, जो किसी वस्तु के अस्तित्व को सापेक्षिक (Relative) बनाते हैं, जबकि बौद्ध धर्म इसके विपरीत सभी वस्तुओं को अनात्म और शून्यता के सिद्धांत के माध्यम से निरपेक्ष रूप से असत्य मानता है।
- 2. बौद्ध धर्म के संघ में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या' संस्कार अनिवार्य था जो सामान्यतः 8 वर्ष की आयु में होता था, जबकि 20 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद 'उपसंपदा' संस्कार के माध्यम से व्यक्ति बौद्ध भिक्षु या भिक्षुणी के रूप में पूर्ण सदस्यता प्राप्त करता था।
- 3. जैन धर्म में महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित चतुर्याम धर्म (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह) में पाँचवें महाव्रत के रूप में 'ब्रह्मचर्य' को जोड़ने का श्रेय पार्श्वनाथ को दिया जाता है, जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे।
- 4. बौद्ध संगीतों के ऐतिहासिक क्रम में, चतुर्थ बौद्ध संगीति कुषाण शासक कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुण्डलबन में आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान दो संप्रदायों में विभाजित हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि जैन धर्म का अनेकांतवाद और स्यादवाद ज्ञान की सापेक्षता को दर्शाता है, लेकिन बौद्ध धर्म शून्यता (माध्यमिक दर्शन) और प्रतीत्यसमुत्पाद के माध्यम से सब कुछ सापेक्ष और परिवर्तनशील मानता है, न कि उसे पूर्णतः 'असत्य' घोषित करता है। कथन 2 सत्य है; बौद्ध संघ में प्रवेश के समय 8 वर्ष की आयु में प्रव्रज्या और 20 वर्ष की आयु में उपसंपदा संस्कार होता था। कथन 3 असत्य है क्योंकि जैन धर्म के पहले चार महाव्रत पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए थे, और पाँचवाँ महाव्रत 'ब्रह्मचर्य' महावीर स्वामी ने जोड़ा था (प्रश्न में क्रम या श्रेय विपरीत दिया गया है)। कथन 4 पूरी तरह सत्य है; कनिष्क के काल में कुण्डलबन में हुई चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में विभाजित हुआ था। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
खिज्र खाँ ने सुल्तान की उपाधि न धारण कर स्वयं को किस पदवी से संतुष्ट रखा?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुए घटनाक्रमों और उनके नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए ऐतिहासिक जन-विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम के एक ब्रिटिश अधिकारी डॉ. लॉयल की हत्या कर दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे सोन नदी पार करके सीधे शाहाबाद जिले में प्रवेश कर गए थे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों को स्थानीय जनता और विद्रोही सैनिकों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही सैनिकों ने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी।
4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के तुरंत बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को समाप्त करते हुए ब्रिटिश सत्ता के समक्ष पूर्ण समर्पण कर दिया था और कभी सशस्त्र संघर्ष जारी नहीं रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ऋग्वैदिक काल में प्रयुक्त 'निष्क' (Nishka) शब्द का प्रारंभिक अर्थ क्या था और उत्तर वैदिक काल तथा महाजनपद काल तक आते-आते इसके अर्थ में क्या परिवर्तन आया?
→
मराठा काल में "सरंजामी" भूमि का संबंध किससे था?
→
बिहार में 1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह की सैन्य रणनीतियों, नेतृत्व तथा संघर्ष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने परंपरागत युद्धशैली का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और अपनी सेना का विस्तार करते हुए आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर तक ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सफल सैन्य अभियान चलाए।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व जारी रखा और वहाँ एक समानांतर सरकार स्थापित कर ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी।
3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस गोरिल्ला युद्ध और समानांतर प्रशासन का पूरी तरह दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और विंसेंट आयर को नियुक्त किया था, जिन्होंने अंततः कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस प्रतिरोध को समाप्त किया।
4. अमर सिंह वर्ष 1858 के अंत में नेपाल के तराई क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.