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History of India
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सूफी संतों के सिलसिले मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित थे — बा-शरा (जो इस्लामिक शरिया कानून का सख्ती से पालन करते थे) और बे-शरा (जो शरिया कानून से पूरी तरह बंधे नहीं थे, जिन्हें 'कलंदर' भी कहा जाता था)।
- 2. भारत में चिश्ती सिलसिले की स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण और शाही दरबारों में उच्च पदों को स्वीकार करने की नीति को अनिवार्य माना ताकि वे राजनीतिक शक्ति के माध्यम से समाज में सुधार कर सकें।
- 3. भक्ति आंदोलन के महान संत रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति के संदेश का व्यापक प्रसार किया, और उनके शिष्यों में कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेन (नाई) तथा पीपा (राजपूत शासक) जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों के लोग शामिल थे।
- 4. वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था, जिसके अनुयायी भगवान विठ्ठल (विठोबा) की पूजा करते थे और इस संप्रदाय के प्रसिद्ध संतों में ज्ञानेश्वर, नामदेव तथा तुकाराम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सूफी सिलसिले मुख्य रूप से बा-शरा (शरिया के पाबंद) और बे-शरा (शरिया से स्वतंत्र) श्रेणियों में बंटे थे। कथन 2 गलत है क्योंकि चिश्ती सिलसिले के संतों ने राजकीय संरक्षण, शाही दरबारों और धन-दौलत से हमेशा दूरी बनाए रखने की सख्त नीति का पालन किया, जबकि सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने शाही दरबारों और राजकीय पदों को स्वीकार किया था। कथन 3 और 4 दोनों पूरी तरह सही हैं; रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति का लोकव्यापीकरण किया और उनके शिष्यों में विभिन्न जातियों के लोग शामिल थे, तथा महाराष्ट्र का वारकरी संप्रदाय भगवान विठोबा की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगरीय योजना, वास्तुकला और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सभ्यता के लगभग सभी प्रमुख नगरों में मकानों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर खुलते थे, जो जल निकासी और वायु संचार की उत्कृष्ट व्यवस्था को दर्शाते हैं।
2. लोथल और चान्हूदरो दोनों ही स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये स्थल शिल्प उत्पादन के प्रमुख केंद्र थे।
3. सिंधु सभ्यता के लोग विदेशों के साथ सक्रिय व्यापार करते थे, जिसके साक्ष्य के रूप में मेसोपोटामिया के अभिलेखों में 'मेलुहा' (Meluhha) शब्द का प्रयोग सिंधु क्षेत्र के लिए किया गया है।
4. हड़प्पा सभ्यता की लिपि चित्रात्मक (Pictographic) थी, जो आमतौर पर दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली) लिखी जाती थी, और इसे अभी तक सफलतापर्वक पढ़ा नहीं जा सका है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय एवं प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था तथा राजकोषीय तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' और अशोककालीन अभिलेखों के अनुसार, मौर्य प्रशासन में सर्वोच्च अधिकारियों या मंत्रियों को 'तीर्थ' कहा जाता था जिनकी कुल संख्या अठारह थी, और इनमें 'समाहर्ता' का मुख्य दायित्व साम्राज्य में करों का संग्रहण, आय-व्यय का विवरण तैयार करना तथा वार्षिक बजट बनाना था।
2. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह उप-समितियों वाली तीस सदस्यों की नगर परिषद द्वारा संचालित होता था, जिसमें जन्म-मृत्यु पंजीकरण का कार्य रखने वाली समिति जनगणना जैसे कार्य भी करती थी।
3. अशोक के अभिलेखों में उल्लिखित 'रज्सुक' (Rajjukas) प्रांतीय शासन व्यवस्था के वे उच्च अधिकारी थे, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय देने और भूमि की पैमाइश करने के साथ-साथ व्यापक न्यायिक अधिकार भी प्राप्त थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उदय' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में कालाशोक ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की थी।
3. हरक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति के माध्यम से मगध की शक्ति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने वज्जी संघ को पराजित करने के लिए अपने मंत्री वसकार की कूटनीति का सहारा लिया था।
4. मगध के उत्थान का एक प्रमुख भौगोलिक और आर्थिक कारण यह था कि यहाँ के क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क की खदानें उपलब्ध थीं, जिससे मगध के शासकों ने सबसे पहले उन्नत किस्म के अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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