BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
22 views

सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनकी विशिष्ट पुरातात्विक विशेषताओं या अवस्थितियों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चान्हूदड़ो (Chanhu-daro) एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यह स्थल मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था।
  2. 2. धौलावीरा (Dholavira) अपनी अनूठी त्रि-स्तरीय नगर योजना (Acropolis, Middle town, and Lower town) तथा विशाल जल प्रबंधन प्रणाली और शिलालेख वाले साइन-बोर्ड के लिए जाना जाता है, जो लूनी नदी के तट पर कच्छ के रण में स्थित है।
  3. 3. लोथल (Lothal) एक प्रमुख तटीय व्यापारिक स्थल था जहाँ पाकी ईंटों से निर्मित एक विशाल गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, और यहाँ फारसी (फारस की खाड़ी) मुहरों की प्राप्ति से इसके विदेशी व्यापारिक संबंधों की पुष्टि होती है।
  4. 4. कालीबंगा (Kalibangan) में जुते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य मिले हैं, तथा इस स्थल के निचले शहर की सभी बस्तियों के घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर खुलते थे, जो सिंधु घाटी की सामान्य जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था के विपरीत था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

इस प्रश्न में दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। कालीबंगा में जुते हुए खेत के साक्ष्य अवश्य मिले हैं, परंतु इसके विपरीत सिंधु घाटी सभ्यता के लगभग सभी प्रमुख नगरों (जैसे हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और कालीबंगा) में घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर न खुलकर पीछे की गलियों या आन्तरिक आंगनों की ओर खुलते थे, जो उनकी सुरक्षा और गोपनीयता को दर्शाता है। अन्य सभी स्थल अपनी विशिष्ट विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सिंधु सभ्यता अपने नगर नियोजन के लिए विश्व प्रसिद्ध थी।
Share:

Related Questions

→ भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन और प्रमुख संगठनों (विशेषकर गदर पार्टी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और अनुशीलन समिति) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित 'गदर पार्टी' का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था, और इसका साप्ताहिक पत्र 'गदर' पहले पहल उर्दू में तथा बाद में गुरुमुखी लिपि में भी प्रकाशित किया गया था। 2. वर्ष 1928 में फिरोजशाह कोटला मैदान, दिल्ली में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध दस्तावेज 'क्रांति की फिलॉसफी' (Philosophy of the Bomb) को संगठन का वैचारिक आधार बनाया गया था। 3. बंगाल की प्रसिद्ध क्रांतिकारी संस्था 'अनुशीलन समिति' की स्थापना का मुख्य श्रेय वरिन्द्र कुमार घोष और भूपेंद्र नाथ दत्त को जाता है, जिन्होंने भवानी चक्रवर्ती के सहयोग से इस गुप्त संगठन के माध्यम से 'युगांतर' साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन कर क्रांतिकारी विचारों का व्यापक प्रसार किया था। 4. वर्ष 1929 की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली बम कांड की घटना के पश्चात भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार कर लिया गया, और लाहौर षड्यंत्र केस के दौरान अदालत में ऐतिहासिक बयान देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहनों को सुनाने के लिए धमाके करना' था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव, चालुक्य और चोल राजवंशों की प्रशासनिक, कलात्मक एवं सैन्य उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल में 'मत्तविलास प्रहसन' नामक संस्कृत नाटक की रचना की थी तथा महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकाश्म रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण कार्य उसके ही काल में प्रारंभ हुआ था। 2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस विजय के उपरांत उसने 'परमेश्वर' तथा 'दक्षिणपथेश्वर' की उपाधियाँ धारण की थीं। 3. चोल सम्राट राजेंद्र प्रथम ने अपनी शक्तिशाली नौसेना के माध्यम से श्रीविजय साम्राज्य (सुमात्रा, जावा और मलय प्रायद्वीप) पर सफल सैन्य अभियान चलाया था, तथा गंगईकोंडचोलपुरम की नई राजधानी की स्थापना कर 'गंगईकोंडचोल' की उपाधि धारण की थी। 4. चोल प्रशासन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी स्थानीय स्वशासन व्यवस्था थी, जिसका विस्तृत विवरण उत्तरामेरुर (Uttaramerur) अभिलेखों में मिलता है, जिसमें ग्राम सभाओं (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए लॉटरी (कुडावोलई पद्धति) प्रणाली का उल्लेख है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध ब्रिटिश रेजीडेंसी की घेराबंदी में सक्रिय रूप से भाग लिया। 2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का संचालन किया तथा चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3. ब्रिटिश दमन चक्र के दौरान बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें आजीवन कारावास के लिए अंडमान निकोबार (सेल्यूलर जेल) भेज दिया गया, जबकि अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने लखनऊ में सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था—विशेष रूप से मनसबदारी, जागीरदारी और भू-राजस्व प्रणालियों—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' (Jaat) पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और उसकी पदानुक्रमित स्थिति को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' (Swar) पद उसे अपने अधीन रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दु-अस्मेह और सिह-अस्मेह' (Du-aspa and Sih-aspa) की नवीन उप-व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल 'सवार' पद को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घोड़ों के साथ सैनिकों की संख्या बढ़ाने की अनुमति दी गई थी। 3. शाहजहाँ के शासनकाल में अपनाई गई 'माहवार' (Month-scale) प्रणाली के कारण जागीरों से वास्तविक आय और अनुमानित आय (जमा) के बीच के अंतर को पाटने का प्रयास किया गया, जिससे मनसबदारों को मिलने वाले राजस्व में कमी आ गई क्योंकि जागीरों से उतनी आय नहीं हो पाती थी जितना उनका मासिक वेतन तय किया गया था। 4. औरंगजेब के शासनकाल के अंतिम चरण में 'पैवकी' (Paibaik) भूमियों की कमी और दक्षिण भारत के अभियानों के कारण जागीरों के अभूतपूर्व संकट (Jagirdari Crisis) ने जन्म लिया, जिसके परिणामस्वरूप मनसबदारों और सम्राट के बीच प्रशासनिक अस्थिरता उत्पन्न हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → गुप्तकालीन प्रशासन, आर्थिक व्यवस्था और 'गुप्त साम्राज्य' (Golden Age) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में 'अग्रहार' भूमि वह भूमि होती थी जो ब्राह्मणों या मंदिरों को कर-मुक्त दान में दी जाती थी, और इस प्रकार की भूमि के हस्तांतरण के साथ किसानों को भी उस भूमि पर से अपने पारंपरिक स्वामित्व और अधिकारों से वंचित होना पड़ता था। 2. गुप्त प्रशासन में केंद्रीय अधिकारियों में 'संधिविग्रहिक' नामक अधिकारी का मुख्य कार्य युद्ध और शांति मामलों (Foreign Affairs) से संबंधित था, जबकि 'महादंडनायक' मुख्य रूप से न्याय और पुलिस विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता था। 3. गुप्त साम्राज्य के दौरान आंतरिक व्यापार में भारी गिरावट आई थी क्योंकि रोमन साम्राज्य के साथ होने वाला समुद्री व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो चुका था, जिसके कारण गुप्त शासकों ने सोने के सिक्के (दिनार) जारी करना पूर्ण रूप से बंद कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.