BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (उदारवादी) और गरम दल (उग्रवादी) के वैचारिक संघर्ष तथा उनके राजनीतिक कार्यक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उदारवादी नेताओं का यह दृढ़ विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है और वे ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट आस्था रखते हुए केवल 'प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति के माध्यम से क्रमिक प्रशासनिक सुधार प्राप्त करना चाहते थे।
  2. 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी नेताओं (लाल, बाल, पाल और अरबिंदो घोष) ने इस बात पर जोर दिया कि केवल प्रार्थनाओं से अधिकार नहीं मिलने वाले, इसलिए उन्होंने 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' के साथ-साथ 'निष्क्रिय प्रतिरोध' (Passive Resistance) को अपना मुख्य राजनीतिक अस्त्र बनाया।
  3. 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के बाद उग्रवादियों पर से ब्रिटिश दमन का शिकंजा कस गया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर मांडले जेल (बर्मा) भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ 'गीता रहस्य' की रचना की।
  4. 4. सूरत विभाजन के पश्चात नरमपंथियों ने कांग्रेस संगठन पर अपना पूर्ण नियंत्रण पुनः स्थापित कर लिया और वर्ष 1908 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस के नए संविधान का निर्माण किया गया, जिसके माध्यम से उग्रवादियों के प्रवेश के मार्ग को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया और कांग्रेस का लक्ष्य 'ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन' (Colonial Self-Government) घोषित किया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास में उदारवादियों (नरम दल) और उग्रवादियों (गरम दल) के बीच वैचारिक मतभेद अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली को लेकर थे। नरमपंथियों की कार्यशैली '3P' (Petition, Prayer, Protest) पर आधारित थी और वे क्रमिक सुधार चाहते थे, जबकि गरमपंथियों ने स्वदेशी, बहिष्कार और निष्क्रिय प्रतिरोध को अपनाया। वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ और बाल गंगाधर तिलक को 1908 में गिरफ्तार कर मांडले जेल भेजा गया, जहाँ उन्होंने विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'गीता रहस्य' (कर्मयोग शास्त्र) की रचना की। हालांकि, कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि 1908 के मद्रास अधिवेशन में संविधान तो बना और उग्रवादियों को बाहर रखा गया, लेकिन बाद में लखनऊ अधिवेशन (1916) में वे पुनः कांग्रेस में शामिल हो गए। अतः कथन 1, 2 और 3 सही हैं।
Share:

Related Questions

→ गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग होती थी, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, और भूमि की पैमाइश के लिए 'निवर्तन' और 'कुडव' जैसी माप इकाइयों का उल्लेख मिलता है। 2. इस काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि दान देने की प्रथा ('अग्रहार' व्यवस्था) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य में सामंती प्रवृत्तियों (Feudal Tendencies) का बीजारोपण हुआ। 3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनार्क' और चांदी के सिक्कों को 'रूप्यक' कहा जाता था, तथा चंद्रगुप्त द्वितीय के पश्चिमी भारत के शक राजाओं को पराजित करने के उपरांत चांदी के सिक्कों का प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ था। 4. गुप्त प्रशासन में सर्वोच्च न्याय अधिकारी राजा होता था, और इस काल में पहली बार दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक) मुकदमों के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर किया गया तथा चोरी और डकैती के मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' और 'कंटकशोधन' न्यायालयों की स्थापना की गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक प्रणालियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को पराजित करके 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी तथा महाबलीपुरम (मामलपुरम) में एकश्म रथ मंदिरों (रथ मंदिरों) का निर्माण करवाया था। 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोले शिलालेख' (जिसे रवि कीर्ति ने संस्कृत में लिखा है) में नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी ऐतिहासिक विजय का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिससे वर्धन-चालुक्य संघर्ष की पुष्टि होती है। 3. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली (विशेषकर उत्तरमेरूर शिलालेखों में वर्णित सभा और वारियम व्यवस्था) अत्यंत उन्नत थी, जिसके तहत ग्राम प्रशासन के विभिन्न कार्यों के लिए लॉटरी पद्धति (कुरावै) द्वारा सदस्यों का चयन किया जाता था। 4. हर्ष के शासनकाल में कन्नौज की सभा और प्रयाग (महासम्मेलन) का बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजन किया गया था, जिसमें चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भाग लिया था, किंतु हर्ष के सिक्कों पर केवल बौद्ध प्रतीकों का ही अंकन मिलता है और शैव तथा सूर्य पूजा का कोई साक्ष्य नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → फिरोज शाह तुगलक ने बंगाल को जीतने का कितनी बार प्रयास किया और असफल रहा? → बंगाल विभाजन एवं 1905 के स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था। 2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, तो पूरे बंगाल में इसे 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी और रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'आमार सोनार बांग्ला' गाया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अभूतपूर्व जागृति आई, जिसके तहत अश्विनी कुमार दत्त ने 'स्वदेशी बांधव समिति' की स्थापना की और कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) का गठन किया गया। 4. कांग्रेस के 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच गंभीर वैचारिक मतभेद के बावजूद स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा उनके सैन्य संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आरा की प्रसिद्ध विजय के पश्चात बाबू कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य रणनीतिक क्षमता का परिचय देते हुए गंगा नदी पार की और मिर्जापुर, रीवा, बांदा तथा लखनऊ होते हुए कालपी तक का सफल सैन्य अभियान चलाया, जहाँ उन्होंने तात्या टोपे की सेना से संपर्क किया। 2. ब्रिटिश सेनापतियों (जैसे मेजर विन्सेंट आयर और कैप्टन डनबार) से लगातार संघर्ष के बाद जब जगदीशपुर पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया, तब अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध एक प्रभावी गोरिल्ला (छापामार) युद्ध का संचालन जारी रखा। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में कैमूर क्षेत्र में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की गई थी, जिसके तहत अंग्रेजों को लगान देने से इंकार करने वाले स्थानीय किसानों और जमींदारों से सहयोग प्राप्त किया गया तथा ब्रिटिश रसद आपूर्ति मार्गों को पूरी तरह बाधित कर दिया गया था। 4. अप्रैल 1858 में जगदीशपुर वापसी के अंतिम संघर्ष के दौरान ब्रिटिश सेना के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में वीर कुंवर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उसी युद्धभूमि में लड़ते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.