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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था और बाद में अंग्रेजों ने पीर अली को सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
- 2. दानापुर (Dinapur) छावनी के 7th, 8th और 40th नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुंचकर बाबू कुंवर सिंह से जुड़ गए, जिन्होंने इस संयुक्त सेना का नेतृत्व संभाला।
- 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व स्थानीय जमींदारों और यूरोपीय विरोधी तत्वों ने किया था, जहाँ मोहम्मद हुसैन खां और वाजिद अली जैसे नेताओं ने अंग्रेजों के संचार साधनों और प्रशासनिक चौकियों को नष्ट कर दिया था।
- 4. तिरहुत और छपरा क्षेत्र में कमिश्नर विलियम टेलर और मेजर विंसेंट आयर ने अत्यधिक नरमी की नीति अपनाते हुए विद्रोही नेताओं के साथ समझौता किया और उन्हें बिहार की प्रांतीय सरकार में मंत्री पद की पेशकश की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार का क्षेत्र ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा था। पटना में 3 जुलाई 1857 को पीर अली खां के नेतृत्व में हुए विद्रोह में अंग्रेजों को भारी क्षति उठानी पड़ी थी, जिसमें डॉ. लायेल मारा गया था। दानापुर के सिपाहियों का विद्रोह और उनका आरा पहुँचकर बाबू कुंवर सिंह के साथ मिलना इस क्रांति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके अतिरिक्त, तिरहुत, मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) में भी स्थानीय स्तर पर तीव्र असंतोष देखा गया था। कमिश्नर विलियम टेलर ने नरमी की नीति नहीं बल्कि अत्यधिक दमनकारी और क्रूर नीति अपनाई थी, इसलिए कथन 4 गलत है। इस ऐतिहासिक प्रसंग के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व तथा उनकी रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने कानपुर की सेना के वास्तविक सैन्य कमांडर के रूप में अंग्रेजी सेना के खिलाफ उत्कृष्ट सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया और बाद में जनरल विंडहैन की ब्रिटिश सेना को कानपुर से खदेड़ने में सफलता प्राप्त की थी।
3. नाना साहब और उनके सहयोगियों द्वारा ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत कानपुर में 'बीबीघर हत्याकांड' (Bibighar Massacre) की घटना घटी, जिसके पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया था।
4. ब्रिटिश दमन चक्र के तीव्र होने पर नाना साहब नेपाल की तराई की ओर निकल गए, जबकि तात्या टोपे ने ग्वालियर और मध्य भारत की ओर प्रस्थान कर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध जारी रखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'द सिपोय म्यूटनी एंड द रिवोल्ट ऑफ 1857' में यह स्पष्ट मत व्यक्त किया था कि 1857 का यह महान विद्रोह "न तो पहला, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम था"।
2. वी.डी. सावरकर ने अपनी कृति 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित तरीके से लड़ा गया भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया था।
3. सर जॉन लॉरेन्स और सी.ई.आर. सीले जैसे ब्रिटिश इतिहासकारों के अनुसार 1857 का विद्रोह मूल रूप से एक सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक षड्यंत्र था जिसका मुख्य उद्देश्य विदेशी ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करना था।
4. बंकिनचंद्र चटर्जी के समकालीन विचारों और ब्रिटिश अधिकारी टी.आर. होम्स के मत के अनुसार यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का एक निर्णायक संघर्ष था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए मतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जो नस्लीय अहंकार और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक तात्कालिक असंतोष का परिणाम था" — सर जॉन सीले
2. "यह सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था" — वी. डी. सावरकर
3. "यह धर्म का अंधों का स्वतंत्रता के विरुद्ध संघर्ष था" — एल. ई. आर. रीस (L.E.R. Rees)
4. "यह सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष था" — टी. आर. होम्स
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की सुदृढ़ीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक भुगतान के एवज में मुक्त व्यापार (दस्तक का उपयोग करने की स्वतंत्रता) का अधिकार मिल गया था, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने निजी व्यापार पर भी दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
2. ब्लैक होल ट्रेजेडी (काल कोठरी की घटना) के तुरंत उपरांत रॉबर्ट क्लाइव ने मद्रास से सेना लेकर बंगाल पर आक्रमण किया और 23 जून 1757 को प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दोला को पराजित कर दिया, जहाँ मीर जाफर की सैन्य टुकड़ी ने युद्ध में अंग्रेजों के विरुद्ध सक्रिय रूप से सिराजुद्दोला का साथ दिया था।
3. बक्सर के युद्ध (1764) में मीर कासिम, अवुद के नवाब शुजाउद्दोला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेज़ों ने पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप 'इलाहाबाद की प्रथम संधि (1765)' के तहत बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अधिकार ईस्ट इंडिया कंपनी को प्राप्त हो गए।
4. बक्सर के युद्ध के पश्चात अंग्रेजों ने बंगाल में 'द्वैध शासन प्रणाली' (Dual Government) लागू की, जिसके तहत कंपनी के पास शासन का उत्तरदायित्व (निजामत) था, जबकि बंगाल के नवाब के पास राजस्व वसूली (दीवानी) के अधिकार थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के द्वितीय चरण, कराची अधिवेशन (1931) और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी ब्रिटेन से द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में असफल होकर लौटे, तो वायसराय लॉर्ड वेलिंगटन ने गांधीजी से मिलने से स्पष्ट इनकार कर दिया और कांग्रेस तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन के पुनः दमन के लिए अध्यादेश (Ordinances) का सहारा लिया।
2. मार्च 1931 में आयोजित कांग्रेस के कराची अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, में 'गांधी-इरविन समझौते' को औपचारिक स्वीकृति दी गई तथा पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, जहाँ 'कम्युनल अवार्ड' और सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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