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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'अयस' शब्द का प्रयोग सामान्यतः तांबे या कांस्य के लिए किया जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे के प्रचलन के बाद इसके लिए 'कृष्ण अयस' या 'श्याम अयस' शब्द का प्रयोग किया जाने लगा।
- 2. 'गोपथ ब्राह्मण' का संबंध शुक्ल यजुर्वेद से है, जिसमें विभिन्न यज्ञीय अनुष्ठानों और कर्मकांडों के साथ-साथ ब्रह्मांड की उत्पत्ति और प्राचीन ऋषियों की वंशावली का विस्तृत विवरण मिलता है।
- 3. उत्तर वैदिक काल की चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति मुख्य रूप से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जो इस काल के लोहे के प्रयोग और ग्रामीण से अर्द्ध-नगरीय जीवन की ओर संक्रमण को दर्शाती है।
- 4. वैदिक कालीन राजनीतिक संस्था 'विदथ' आर्यों की सबसे प्राचीन संस्था मानी जाती है, जिसमें न केवल धार्मिक अनुष्ठान और सैन्य लूट के माल का वितरण होता था, बल्कि इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी होती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में 'अयस' धातु का सामान्य अर्थ तांबा या कांसा था और लोहे की खोज के बाद उत्तर वैदिक ग्रंथों में इसे 'कृष्ण अयस' कहा गया। कथन 2 गलत है क्योंकि 'गोपथ ब्राह्मण' का संबंध शुक्ल यजुर्वेद से नहीं बल्कि 'अथर्ववेद' से है (शतपथ ब्राह्मण का संबंध शुक्ल यजुर्वेद से है)। कथन 3 सही है, चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति उत्तर वैदिक काल की प्रमुख विशेषता है जो गंगा-दोआब में लोहे के आगमन का प्रतीक है। कथन 4 सही है, 'विदथ' आर्यों की सबसे प्राचीन संस्था थी जिसमें धार्मिक व आर्थिक गतिविधियों के साथ महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध करना था, जबकि 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने किसी भी धर्म के ग्रंथों को अचूक (Infallible) मानने से इंकार किया और सभी धर्मों की एकता पर बल दिया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया, किंतु उन्होंने वेदों को अपौरुषेय और अचूक मानने के साथ-साथ मूर्तिपूजा, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
3. केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा दिया, और इसके संस्थापकों में आत्माराम पांडुरंग तथा महादेव गोविंद रानाडे प्रमुख रूप से शामिल थे।
4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा धार्मिक पाखंडों से मुक्त समाज का निर्माण करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रथा और केंद्रीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी प्रथा' पूरी तरह आनुवंशिक थी, जिसमें एक मनसबदार की मृत्यु के पश्चात उसके पद और जागीर का अधिकार स्वतः उसके ज्येष्ठ पुत्र को हस्तांतरित हो जाता था।
2. जहाँगाड़ी काल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो और तीन घोड़े वाले) प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके माध्यम से बिना जात मनसब बढ़ाए सैनिकों की संख्या में वृद्धि की जाती थी।
3. शाहजहाँ के शासनकाल में मनसबदारी और जागीरदारी व्यवस्था में गंभीर संकट (जागीर संकट) उत्पन्न हो गया था, क्योंकि उपलब्ध खालसा भूमि और जागीर के रूप में वितरित भूमि के अनुपात में अंतर आ जाने के कारण जागीरदारों को पर्याप्त आय प्राप्त नहीं हो पा रही थी।
4. औरंगजेब के शासनकाल में मराठा सरदारों को मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र से जोड़ने के लिए मनसबदारी व्यवस्था में 'माहवार' (ماهوار - मासिक वेतन) प्रणाली को समाप्त कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने के पश्चात 11 मई 1857 को वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा और हिचकिचाहट के बावजूद विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंदुस्तान) घोषित कर दिया गया, जिससे इस विद्रोह को एक वैधानिक और अखिल भारतीय राजनीतिक प्रतीक मिल गया था।
2. दिल्ली में विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों का वास्तविक नियंत्रण और कमान 'बख्त खान' के नेतृत्व में बनी एक सैनिक अदालत (कोर्ट) के हाथों में थी, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों के प्रतिनिधि शामिल थे और सम्राट की भूमिका काफी हद तक नाममात्र की थी।
3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके सभी शाहजादों (राजकुमारों) की गोली मारकर हत्या कर दी गई, तथा जफर पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया जहाँ वर्ष 1862 में उनका निधन हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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