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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक संस्थाओं, राजस्व प्रणालियों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और मूल्यों का औसत निकालकर राजस्व का निर्धारण किया जाता था, तथा इसमें भूमि को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
  2. 2. जहाँगाड़ी काल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके माध्यम से बिना मनसबदार के जात पद (zat rank) में वृद्धि किए उसके सवार पद (sawar rank) को बढ़ाया जा सकता था और सैनिकों की संख्या दोगुनी की जा सकती थी।
  3. 3. शाहजहां के शासनकाल में साम्राज्य की आर्थिक स्थिति के आकलन के लिए 'महीना-वेतन' (Month-scale) प्रणाली को और अधिक जटिल बनाया गया, जिसके तहत यदि जागीर से प्राप्त होने वाली आय अनुमानित आय (जमा) का केवल आधी प्राप्त होती थी, तो उसे 'شش ماهہ' (छः माही) या तदनुरूप श्रेणियों में रखा जाता था।
  4. 4. औरंगजेब के शासनकाल में मराठों और दक्षिण भारत के राज्यों के विरुद्ध सैन्य अभियानों की अत्यधिक व्यस्तता के कारण जागीरों की भारी कमी ('पैवस्ती' या जागीर संकट) उत्पन्न हो गई थी, जिसके कारण खाली पड़ी खालसा भूमि को मनसबदारों को जागीर के रूप में आवंटित करने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक और राजस्व इतिहास में अकबर द्वारा राजा टोडरमल के सहयोग से विकसित 'दहसाला' प्रणाली एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी, जिसके तहत विगत दस वर्षों के औसत उत्पादन और बाजार मूल्यों के आधार पर मालगुजारी तय की जाती थी और भूमि को पोलज, परती, चाचर तथा बंजर श्रेणियों में बांटा गया था। जहाँगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की, जिससे बिना जात पद बढ़ाए घुड़सवारों (सवार) की संख्या बढ़ाई जा सकती थी। शाहजहां के समय 'महीना-वेतन' (Month-scale) प्रणाली को मानकीकृत किया गया, जिसके अंतर्गत जागीर की वास्तविक आय (اصل जमा) और अनुमानित आय के अनुपात (जैसे छः माही, पंजे माही आदि) को तय किया जाता था। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि औरंगजेब के काल में जागीरों की भारी कमी (जागीर संकट) के बावजूद खालसा भूमि को भी जागीर में बदलने के प्रयास किए गए थे और खालसा भूमि पूरी तरह समाप्त नहीं की गई थी। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा 'दहसाला' (या जाबती) प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी निश्चित की जाती थी। 2. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व की वसूली के लिए 'मस्हत' प्रणाली के अतिरिक्त 'नस्क' या 'कंकूट' पद्धति का प्रयोग भी किया जाता था, और इसी काल में किसानों को राहत देने के लिए 'माहवार' (मासिक वेतन) और 'दाग-चेहरा' प्रथा को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था। 3. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध 'रूहullah खां फरमान' (अक्सर रसूलदास या मुहम्मद हाशिम के माध्यम से प्रसारित) के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ न डालें और जरूरत पड़ने पर उन्हें त्कावी (कृषि ऋण) तथा रियायतें प्रदान करें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य सिद्धांत) के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न हुई है और यह शून्यवाद के अत्यधिक निकट है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के सत्य का पूर्ण निर्धारण एकांगी दृष्टिकोण से नहीं किया जा सकता। 2. बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने के लिए 'प्रव्रज्या' संस्कार अनिवार्य था, जिसके उपरांत नवदीक्षित भिक्षु को दस शिक्षापदों का पालन करना होता था, जबकि जैन संघ में महावीर स्वामी ने गृहस्थ जीवन त्यागने वाले व्यक्तियों के लिए संलेखना (संतारा) विधि के अलावा पांच महाव्रतों का कठोरता से पालन करना अनिवार्य किया था। 3. बौद्ध धर्म के हीनयान संप्रदाय ने बुद्ध को भगवान मानकर उनकी मूर्तियों की पूजा शुरू की और बोधगया में महाबोधि मंदिर का निर्माण कराया, जबकि महायान संप्रदाय बुद्ध को एक महापुरुष और मार्गदर्शक मानकर उनके मूल उपदेशों (अष्टम मार्ग) पर टिके रहने का समर्थन करता रहा। 4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्न रहने (वस्त्र त्यागने) को अनिवार्य मानते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी श्वेत वस्त्र धारण करने की अनुमति देते हैं और स्त्री मुक्ति को संभव मानते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगलकालीन प्रशासनिक और भू-राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी निश्चित की जाती थी, जिसमें 'पलाज' वह भूमि थी जिस पर वर्ष में दो बार लगातार फसलें उगाई जाती थीं और इसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा जाता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दो-अस्पा और सिह-अस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल घोड़ों की संख्या में बिना किसी वृद्धि के दोगुने या तिगुने घोड़े रखने पड़ते थे और इसका अतिरिक्त भत्ता दिया जाता था। 3. शाहजहां के काल में भू-राजस्व की वसूली के लिए 'महतब' और 'महरमा' जैसी नई प्रणालियों को अनिवार्य किया गया, तथा इज्ठेदारी (ठेके पर राजस्व वसूलने की प्रथा) को मुगल साम्राज्य के सभी प्रांतों में पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था। 4. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए प्रसिद्ध 'रसूम-ए-देह' (महानिदेशक आदेश) के अनुसार जागीरदारों पर यह प्रतिबंध लगा दिया गया कि वे किसानों से निर्धारित 'लगान' के अतिरिक्त किसी भी प्रकार का उपकर (आवाब) या अतिरिक्त कर नहीं वसूल सकते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज (INA) तथा क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया (चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में), ताम्रलुक (जातीय सरकार) और सतारा (प्रति सरकार, जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापान पहुँचने के बाद रास बिहारी बोस से आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व संभाला, और उन्होंने सिंगापुर में 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' (अस्थায়ী स्वतंत्र भारत सरकार) की स्थापना की जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी। 3. आज़ाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था, जो महिला सैनिकों की एक अनूठी और समर्पित रेजिमेंट थी। 4. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का आह्वान किया था, और इस आंदोलन की शुरुआत के साथ ही वायसराय लिनलिथगो ने कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर देश की विभिन्न जेलों में नजरबंद कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन का प्रस्ताव लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना था, किंतु वास्तविक औपनिवेशिक उद्देश्य उभरते हुए बंगाली राष्ट्रवाद को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर प्रांत का विभाजन करना था। 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित एक विशाल बैठक में औपचारिक रूप से 'स्वदेशी आंदोलन' (Swadeshi Movement) की घोषणा की गई तथा ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया। 3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने की तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, बंगाली समाज के बीच आपसी भाईचारे का प्रतीक 'राखी बांधी गई' तथा रबीन्द्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक मेलों, उत्सवों और लोकगीतों का उपयोग जन-जागरूकता के लिए किया गया, किंतु मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और किसान वर्ग की व्यापक एवं सक्रिय भागीदारी के कारण यह आंदोलन अखिल भारतीय स्वरूप प्राप्त करने में पूरी तरह सफल रहा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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