त्वरित लिंक्स
History of India
23 views
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का विलय वर्ष 1856 में कुशासन के झूठे आधार पर किया गया, जिससे अवध के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त हुआ।
- 2. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की पक्षपातपूर्ण मुक्त व्यापार नीति के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, क्योंकि ब्रिटिश आयातित सूती वस्त्रों पर नाममात्र का शुल्क लगाया गया था, जबकि भारतीय उत्पादों पर भारी निर्यात शुल्क वसूला जाता था।
- 3. सैन्य कारणों के अंतर्गत वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत बंगाल आर्मी के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार विदेश जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया, जिसे पारंपरिक सैनिकों ने अपनी जाति और धर्मभ्रष्ट होने का गंभीर खतरा माना।
- 4. धार्मिक और सामाजिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों को पैतृक संपत्ति से वंचित रखने के प्राचीन विधान को समाप्त कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ब्रिटिश शासन द्वारा धर्मांतरण को बढ़ावा देने का सीधा षड्यंत्र माना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के पीछे सदियों से पनप रहे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सैन्य असंतोष का एक व्यापक ताना-बाना था। लॉर्ड डलहौजी की साम्राज्यवादी नीतियों, विशेषकर 'व्यपगत के सिद्धांत' और अवध के कुशासन के आधार पर विलय ने देशी रियासतों और सैनिकों में अविश्वास पैदा किया। आर्थिक मोर्चे पर, अंग्रेजों की एकतरफा मुक्त व्यापार नीति ने भारतीय हस्तशिल्प को तबाह कर दिया। सामाजिक-धार्मिक स्तर पर सती प्रथा का अंत, विधवा पुनर्विवाह अधिनियम और 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम, 1850' जैसी सुधारवादी नीतियों को रूढ़िवादी तबके ने उनकी परंपराओं पर सीधा आक्रमण माना। इसके अतिरिक्त, लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में आया 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला साबित हुआ, जिसने एनफील्ड राइफल के कारतूसों की विवादास्पद घटना के साथ मिलकर इस भीषण संग्राम की पृष्ठभूमि तैयार की। इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) और महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त प्रणाली के तहत लॉर्ड कॉर्नवालिस और जॉन शोर ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) का प्रावधान किया था, जिसके अनुसार यदि निर्धारित तिथि को सूर्यास्त तक जमींदार भू-राजस्व जमा नहीं करते थे, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था में सरकार और किसानों (रयतों) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया और भू-राजस्व की दरें अत्यधिक होने के कारण किसानों को महाजनों के चंगुल से मुक्ति मिल गई थी।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिंक के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई महालवारी व्यवस्था में भू-राजस्व के निर्धारण के लिए पूरे गाँव या ग्राम समूह (महाल) को इकाई माना गया था, और इसमें राजस्व भुगतान की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से पूरे ग्राम समुदाय की होती थी।
4. इन तीनों प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक कृषि अर्थव्यवस्था का वाणिज्यीकरण हो गया, जिसके तहत किसानों ने अपनी मर्जी से खाद्यान्न के स्थान पर केवल अफीम, नील और कपास जैसी नकदी फसलों का उत्पादन शुरू किया जिससे ग्रामीण गरीबी में भारी कमी आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और महारानी विक्टोरिया की घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर समस्त शक्तियाँ भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) में निहित कर दी गईं।
2. महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार देशी रियासतों को हड़पने की अपनी पुरानी नीति का विस्तार करेगी और भविष्य में 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को और अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारत की प्राचीन धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने तथा नस्ल, जन्म या धर्म के भेदभाव के बिना सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर निष्पक्ष अवसर देने की घोषणा की।
4. इस अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर-जनरल के पद को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर सीधे ब्रिटिश कैबिनेट द्वारा नियुक्त 'भारत के सम्राट' (Emperor of India) को संपूर्ण प्रशासनिक अधिकार सौंप दिए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के प्रावधानों तथा उससे जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों और हिंदू बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान करने का प्रावधान किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रांतों का विभाजन हुआ।
2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के द्वारा 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमीनियन की स्थापना का प्रावधान किया गया तथा दोनों नए डोमीनियनों के लिए गवर्नर-जनरल की नियुक्ति का अधिकार ब्रिटिश सम्राट को दिया गया, जिसके तहत लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों देशों का संयुक्त रूप से प्रथम गवर्नर-जनरल बनाया गया।
3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने का निर्णय करने के लिए एक जनमत संग्रह (Referendum) आयोजित किया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान और उनकी 'खुदाई खिदमतगार' पार्टी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पाकिस्तान में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया।
4. सिलहट (असम) के जनमत संग्रह में पाकिस्तान के पक्ष में मतदान होने के कारण सिलहट के अधिकांश भू-भाग को तत्कालीन पूर्वी बंगाल (पाकिस्तान) में शामिल कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह के नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचे और रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का वास्तविक नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब (धोंडोपंत) ने किया था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, जबकि उनके मुख्य सैन्य सलाहकार और कमांडर के रूप में तात्या टोपे ने कानपुर की सेना का प्रभावी संचालन किया था।
2. नाना साहब के सचिव और मुख्य रणनीतिकार अजीमुल्ला खां ने विद्रोह की प्रारंभिक तैयारियों के तहत लंदन जाकर ब्रिटेन में भारत के पक्ष में जनमत तैयार करने का प्रयास किया था और अवध की बेगम हजरत महल के साथ मिलकर कूटनीतिक संपर्क स्थापित किए थे।
3. कानपुर में ब्रिटिश सेना के समर्पण के बाद घटित 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) के उपरांत ब्रिटिश जनरल सर कॉलिन कैंपबेल ने कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके बाद नाना साहब और तात्या टोपे नेपाल की तराई में चले गए और अंग्रेजों के हाथ कभी नहीं आए।
4. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर कालपी और ग्वालियर के सैन्य अभियानों में निर्णायक भूमिका निभाई, और अंततः नरवर के एक जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर उन्हें शिवपुरी में फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
हम्पी के खंडहरों की खोज 1800 ई. में किसने की थी?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.