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History of India
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हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और गदर पार्टी के वैचारिक और संगठनात्मक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा लिखित घोषणापत्र 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' को आधिकारिक मार्गदर्शक दस्तावेज बनाया गया था।
- 2. ग़दर पार्टी के संस्थापकों में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना की मुख्य भूमिका थी, और इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करना था, जिसके लिए इसने सैन फ्रांसिस्को से 'ग़दर' साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया था जो मुख्य रूप से गुरुमुखी और उर्दू में छपता था।
- 3. भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या का उद्देश्य साइमन कमीशन विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज से घायल हुए लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेना था।
- 4. ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता बाबा सोहन सिंह भकना को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश विरोधी षड्यंत्र में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें लाहौर षड्यंत्र मामले के तहत आजीवन काला पानी (अंडमान) की सजा दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में कथन 1, 2 और 3 पूरी तरह सही हैं। सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में HRA का नाम बदलकर HSRA किया गया और इसका समाजवादी घोषणापत्र भगवती चरण बोहरा ने तैयार किया था। दिसंबर 1928 में सॉंडर्स की हत्या लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए की गई थी। ग़दर पार्टी की स्थापना 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना द्वारा की गई थी और इसका मुखपत्र 'ग़दर' था। कथन 4 आंशिक रूप से तथ्यात्मक रूप से भिन्न है क्योंकि सोहन सिंह भकना को लंबी अवधि की सजा दी गई थी, किंतु गदर आंदोलन से जुड़े कई क्रांतिकारियों पर लाहौर षड्यंत्र मुकदमा चलाया गया था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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राजस्व विभाग को विजयनगर में किस नाम से जाना जाता था?
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प्राचीन भारतीय इतिहास में महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में सोलह महाजनपदों की जो सूचियाँ मिलती हैं, उनमें कंबोज और गांधार ऐसे महाजनपद थे जो उत्तर-पथ के अंतर्गत आते थे तथा वहाँ उत्तरापथ व्यापार मार्ग का नियंत्रण होने के कारण उनका विशेष आर्थिक और सामरिक महत्व था।
2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में इसकी भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था; इसकी प्रारंभिक राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित घाटी थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा, सोन और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से संपूर्ण मध्य गंगा घाटी पर सामरिक नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम हो गया।
3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी साम्राज्यवादी और विस्तारवादी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति के साथ-साथ अवध के राजा चंड प्रद्योत के साथ आक्रामक सैन्य संघर्ष की नीति अपनाई और अंततः अवध को पूर्ण रूप से मगध में मिला लिया था।
4. महापद्मनंद, जिसे पुराणों में 'सर्वक्षत्र्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकक्षत्र' कहा गया है, ने नंद वंश की नींव रखते हुए न केवल कलिंग और अस्मक जैसे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, बल्कि क्षत्रियों की राजनीतिक शक्ति का पूर्ण दमन कर मगध को एक विशाल साम्राज्य में परिवर्तित कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल काल के वैचारिक संघर्ष तथा प्रमुख अधिवेशनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यपद्धति मुख्य रूप से '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और विरोध (Protest) पर आधारित थी तथा उन्हें ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का औपचारिक समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मोठ की मस्जिद की वास्तुकला में किस शैली का अभाव है?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement), रयतवारी (Ryotwari) और महालवारी (Mahalwari)—तथा उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक रूप से भूमि पर कृषि करने वाले पारंपरिक काश्तकारों (रयतों) के अधिकार समाप्त होकर वे केवल किराएदार बनकर रह गए।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा समझौता हुआ, जिसके अंतर्गत भूमि का स्वामित्व व्यक्तिगत किसानों को सौंप दिया गया और राजस्व का निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर लगभग 30 वर्षों के लिए निश्चित किया गया।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों से कर वसूलने के बजाय पूरे गाँव या ग्राम समूह (महाल) को राजस्व इकाई माना गया, तथा संपूर्ण ग्राम समुदाय को सामूहिक रूप से भू-राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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