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History of India
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहिती के प्रभुत्व का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवादी दर्शन को समाज के सुधार का आधार बनाया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और साथ ही पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए जन्मना जाति व्यवस्था के स्थान पर गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित वर्ण व्यवस्था का समर्थन किया।
- 3. प्रार्थना समाज के संस्थापक आत्माराम पांडुरंग थे, जिन्हें न्याय मूर्ति महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, तथा इस संस्था का मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर केंद्रित था।
- 4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने सामाजिक सुधारों के साथ-साथ पारंपरिक हिंदू धर्म की कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया, और उनके शिष्यों (डेरोज़ियंस) को कलकत्ता में रूढ़िवादी समाज का पूर्ण समर्थन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूरी तरह सही हैं। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के माध्यम से आधुनिक भारत में धार्मिक और सामाजिक पुनर्जागरण की नींव रखी थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना कर वेदों की अचूक प्रामाणिकता पर जोर दिया। प्रार्थना समाज (स्थापना 1867) ने महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किया। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि हेनरी विवियन डेरोज़ियो और उनके 'डेरोज़ियंस' शिष्यों के क्रांतिकारी और पश्चिमी विचारों के कारण उन्हें कलकत्ता के रूढ़िवादी हिंदू समाज के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, समर्थन का नहीं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेनापति सर ह्यू रोज़ ने झाँसी की घेराबंदी की, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई अपनी सेना के साथ कालपी पहुँचीं और वहाँ तात्या टोपे के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया।
2. कालपी के युद्ध में पराजय के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को अपने पक्ष में करते हुए ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया।
3. ग्वालियर के पतन और संघर्ष के अंतिम चरण में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे नेपाल की तराई में सुरक्षित निकल जाने में सफल रहे और कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।
4. तात्या टोपे को उनके एक जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ लिया गया और अंततः अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह के पास एक अखिल भारतीय स्तर पर स्वीकृत और सुसंगठित केंद्रीय नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेता और राजा अपने-अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे तथा अंग्रेजों के विरुद्ध एक साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करने में असमर्थ रहे।
2. नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे अधिकांश विद्रोही नेताओं ने आधुनिक युद्ध-कौशल, दूरदर्शी कूटनीति और संगठित सैन्य रणनीति का परिचय देते हुए अंग्रेजों की आधुनिक नौसेना और तोपखाने का पूरी तरह से मुकाबला किया।
3. मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र को विद्रोह का प्रतीकात्मक प्रमुख घोषित किया जाना तात्कालिक रूप से सैनिकों और जनता को एकजुट करने में सहायक रहा, परंतु वृद्धावस्था, अनिश्चितता और विद्रोही सैनिकों के बीच आपसी समन्वय की कमी के कारण यह नेतृत्व निर्णायक साबित नहीं हो सका।
4. शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े जमींदारों के एक बड़े हिस्से और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया तथा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध इसे एक जन-क्रांति में बदलने में मुख्य भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक उपयोग कृषि उपकरणों और हथियारों के निर्माण में किया जाता था, जिसके कारण इस काल को पूर्णतः 'लौह युगीन सभ्यता' कहा गया है।
2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित हो गई थी और समाज में गोत्र प्रथा का संस्थागत विकास हुआ, जिसमें एक ही गोत्र के भीतर विवाह (सगोत्र विवाह) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।
3. ऋग्वेद में उल्लिखित 'दुहितृ' शब्द उस पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था जो गाय का दूधह दोहन करती थी, जबकि 'नक्ता' शब्द का प्रयोग रात के समय के लिए होता था।
4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत आरण्यक वे ग्रंथ हैं जिनकी रचना वनों में की गई थी और जो मुख्य रूप से यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर दार्शनिक चिंतन, रहस्यवाद और आत्म-विद्या पर जोर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालने वाले नाना साहब, उनके सैन्य सलाहकार तात्या टोपे और मुख्य रणनीतिकार अजीमुल्ला खां के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूग व्हीलर को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया।
2. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में सिंधिया सेना के एक बड़े भाग को अपने पक्ष में मिला लिया और रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर झांसी तथा तांत्या टोपे के नेतृत्व में कालपी के युद्ध में अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया।
3. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह की कूटनीतिक और राजनीतिक रणनीतियों के तहत लंदन में ब्रिटिश अधिकारियों से पेंशन बहाल करने की विफल कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद, तुर्की के सुल्तान और क्रीमिया युद्ध के अनुभव का उपयोग कर विद्रोही ताकतों के बीच समन्वय स्थापित किया था।
4. कानपुर में असफल होने के बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर चले गए, जबकि तात्या टोपे को उनके एक विश्वसनीय जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण पकड़ लिया गया और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था और 'अर्थशास्त्र' में वर्णित विभिन्न विभागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (प्रकृति) का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है, जिसमें राजा (स्वामी) को शीर्ष पर रखते हुए 'कोष' (राजकोष) और 'दुर्ग' (किला) को राज्य के सबसे महत्वपूर्ण भौतिक आधार के रूप में मान्यता दी गई है।
2. मौर्य केंद्रीय प्रशासन में विभिन्न विभागों के प्रमुखों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी संख्या अट्ठारह थी, और इन सभी तीर्थों की नियुक्ति से पूर्व उनके चरित्र की शुद्धता की जाँच के लिए 'उपधा परीक्षण' किया जाता था।
3. मौर्यकालीन राजस्व प्रशासन में 'समाहर्ता' (Collector General) संपूर्ण साम्राज्य में करों के निर्धारण, संग्रहण और वार्षिक बजट तैयार करने का सर्वोच्च अधिकारी होता था, जबकि 'संनिधात' (Treasurer) राजकीय कोषागार और भंडागार (Storehouse) का मुख्य संरक्षक था।
4. मौर्य प्रशासन में 'सीताध्यक्ष' का पद व्यापार और वाणिज्य के नियंत्रण से संबंधित था, जबकि राज्य द्वारा संचालित कृषि भूमि के प्रबंधन और कृषि कार्यों की देखरेख का मुख्य उत्तरदायित्व 'पण्यध्यक्ष' के अधीन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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