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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी का विलय किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय शासकों और अभिजात वर्ग में यह गहरी असुरक्षा फैल गई कि ब्रिटिश साम्राज्य किसी भी रियासत को कभी भी समाप्त कर सकता है।
- 2. वर्ष 1852 का 'इनाम आयोग' (Inam Commission) मुख्य रूप से उन जागीरों और कर-मुक्त भूमि की जाँच के लिए स्थापित किया गया था जिनके पास वैध शीर्षक विलेख (Title Deeds) नहीं थे, जिसके परिणामस्वरूप हजारों जागीरों को जब्त कर लिया गया और ग्रामीण अभिजात वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अंग्रेजों का कट्टर विरोधी बन गया।
- 3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिसके चलते कारीगरों और दस्तकारों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ा, किंतु कृषि क्षेत्र पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर बनी रही।
- 4. लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल में पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act of 1856) के तहत नए सैनिकों के लिए समुद्र पार करके अंग्रेजों के लिए विदेशों में युद्ध लड़ने जाना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसने भारतीय सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं और रूढ़ियों को गहरी ठेस पहुँचाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के पीछे राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारण गहराई से जुड़े हुए थे। डलहौजी की व्यपगत नीति और इनाम आयोग (1852) जैसी नीतियों ने पारंपरिक शासकों और भू-स्वामियों को तबाह कर दिया। ब्रिटिश नीतियों के कारण न केवल हस्तशिल्प बल्कि कृषि क्षेत्र पर भी भारी दबाव पड़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई, अतः कथन 3 गलत है। इसके अलावा 1856 के सामान्य सेवा अधिनियम ने सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। इस ऐतिहासिक घटना के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के बदले कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिला था, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार (दस्तक) पर भी अवैध रूप से लागू कर दिया था।
2. अलीवर्दी खान के उत्तराधिकारी सिराजुद्दौला ने कलकत्ता (आलिनगढ़) पर आक्रमण कर मार्च 1756 में उस पर अधिकार कर लिया था और इस संघर्ष के दौरान प्रसिद्ध 'कालकोठरी की त्रासदी' (Black Hole Tragedy) की घटना घटी थी, जिसका समकालीन फारसी वृत्तांत जे.जे. हॉलवेल द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
3. प्लासी के युद्ध (23 जून 1757) में सिराजुद्दौला की सेना का एक बड़ा हिस्सा मीर जाफर के नेतृत्व में अंग्रेजों से मिल जाने के कारण युद्ध मैदान से अलग रहा, जिसके परिणामस्वरूप रॉबर्ट क्लाइव ने इस युद्ध को आसानी से जीत लिया और मीर जाफर को बंगाल का अगला नवाब बनाया गया।
4. बक्सर के युद्ध (1764) के उपरांत रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय और अवध के नवाब शुजाउद्दोला के साथ इलाहाबाद की संधियाँ कीं, जिसके तहत कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की वास्तविक दीवानी अधिकार प्राप्त हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्वकर्ताओं के मिलान के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
3. झाँसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
4. कानपुर - मेजर जनरल विलियम हैवलॉक
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था जिसमें सैन्य अधिकारियों और नागरिकों दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
2. यद्यपि बहादुर शाह जफर ने विद्रोह का औपचारिक नेतृत्व स्वीकार कर लिया था, तथापि उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था, व्यक्तिगत अनिच्छा और उनके निकटवर्ती शाही दरबारियों तथा राजकुमारों के मध्य आपसी समन्वय व दूरदर्शिता के अभाव के कारण वे विद्रोहियों को कोई प्रभावी या दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा प्रदान नहीं कर सके।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने बहादुर शाह जफर को लाल किले से गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें तुरंत अंडमान और निकोबार की सेलुलर जेल में आजीवन कारावास के लिए भेज दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बे' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस के खोल को लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था और ऐसी चर्बी के प्रयोग की खबर फैली जो सुअर और गाय की चर्बी से युक्त थी।
2. जनवरी 1857 में दमदम (कोलकाता के समीप) स्थित सैन्य छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों ने सबसे पहले नई एनफील्ड राइफल के प्रयोग के खिलाफ आधिकारिक रूप से खुले विद्रोह का झंडा बुलंद किया था।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अंग्रेजी अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
4. बैरकपुर की घटना के तुरंत पश्चात, 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सैनिकों ने खुलेआम बगावत कर दी और दिल्ली की ओर कूच किया, जो इस विद्रोह की शुरुआत बनी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा दांडी मार्च के दौरान नमक कानून तोड़े जाने के साथ हुई थी, जिसमें कराची अधिवेशन की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने भाग लिया था, जबकि कांग्रेस ने बहिष्कार के कारण प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग नहीं लिया था।
2. मार्च 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने तथा समुद्र तट के समीप के गांवों को व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जिन्होंने दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग का पुरजोर समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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