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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दोहती थी, तथा इस काल में कबीले के मुखिया को 'राजनीन्' या 'गोपा' कहा जाता था।
- 2. उत्तर वैदिक काल में सभा और समिति नामक लोकतांत्रिक संस्थाओं का प्रभाव कम होने लगा, और शतपथ ब्राह्मण में समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों के रूप में वर्णित किया गया है।
- 3. वैदिककालीन दर्शनों में 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक महर्षि कपिल माने जाते हैं, जो सभी आस्तिक दर्शनों में सबसे प्राचीन है और इसके अनुसार सृष्टि का निर्माण प्रकृति और पुरुष के मेल से हुआ है।
- 4. वैदिक साहित्य में प्रयुक्त 'निष्म' और 'शतमान' शब्द शुरुआती दौर में विनिमय के साधन या आभूषण के रूप में प्रयुक्त होने वाली मूल्यवान धातु की मुद्राएँ थीं, जिनका उल्लेख सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक सभ्यता भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड है। कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक समाज में 'दुहितृ' (जिसका अर्थ गाय दोहने वाली होता है) पुत्री के लिए प्रयुक्त होता था और राजा को 'गोपा' (गायों का रक्षक) कहा जाता था। कथन 2 गलत है क्योंकि अथर्ववेद (न कि शतपथ ब्राह्मण) में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है। कथन 3 बिल्कुल सही है; विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सांख्य दर्शन भारत के षड्दर्शनों में सबसे प्राचीन है जिसके प्रवर्तक कपिल मुनि हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि 'निष्म' और 'शतमान' कासकीय विनिमय के साधन के रूप में उत्तर वैदिक काल में अधिक स्पष्ट रूप से उभरे, और शतपथ ब्राह्मण में शतमान का विशेष उल्लेख मिलता है, जबकि ऋग्वेद में 'निष्म' मुख्य रूप से एक स्वर्ण आभूषण के रूप में प्रयुक्त हुआ था।
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1857 के विद्रोह की प्रकृति और इसके कारणों का आकलन करते हुए विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम था, न राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" – आर.सी. मजूमदार
2. "यह स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राष्ट्रीय युद्ध था, जिसे सिपाही विद्रोह से कहीं अधिक बढ़कर देखा जाना चाहिए।" – वी.डी. सावरकर
3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जिसका राष्ट्रीय चरित्र से कोई लेना-देना नहीं था और यह पूर्णतः स्वार्थ से प्रेरित था।" – सर जॉन सीले
4. "यह सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष था, जिसमें ब्रिटिश सत्ता ने भारतीय समाज को अंधकार से मुक्ति दिलाई थी।" – टी.आर. होम्स
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था और इसके विशिष्ट पुरातात्विक स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चान्हूदड़ो एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का कोई दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यहाँ से मनके बनाने के कारखाने के साथ-साथ वक्रकार ईंटों के साक्ष्य भी मिले हैं।
2. लोथल से गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, तथा यहाँ से चावल के साक्ष्य के साथ-साथ युगल शवाधान (Double burial) के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
3. बनावलि से मिट्टी का बना हुआ हल (Terracotta plough) का प्रतिरूप प्राप्त हुआ है, और इस स्थल के निचले शहर तथा दुर्ग दोनों क्षेत्रों को सिंधु घाटी की अन्य बस्तियों की भांति अलग-अलग रक्षाप्राचीर से न घेरकर एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर के अंतर्गत रखा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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