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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा अपनी प्रसिद्ध 'दांडी यात्रा' के साथ की गई थी, जिसके तहत उन्होंने 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती दी थी।
- 2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के तहत कांग्रेस के सभी राजनीतिक कैदियों की बिना शर्त रिहाई पर सहमति बन गई थी।
- 3. मार्च 1931 में संपन्न 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने हिंसा में लिप्त कैदियों को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास के गाँवों को अपने घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने का अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी।
- 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न तीव्र मतभेदों और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए विवाद के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के असफल घोषित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से अपनी ऐतिहासिक दांडी यात्रा के साथ की थी और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा था। कथन 2 गलत है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 'प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930)' का पूर्ण बहिष्कार किया था; कांग्रेस ने केवल 'द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)' में भाग लिया था। कथन 3 सही है, गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत सरकार ने हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और समुद्र तटीय क्षेत्रों में नमक बनाने की अनुमति दी थी। कथन 4 सही है, द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गांधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन गए थे, लेकिन दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के मुद्दे पर डॉ. अंबेडकर के साथ मतभेद के कारण यह सम्मेलन असफल रहा। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का मंत्रिपरिषद) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, जिसमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री का पद संभालता था, किंतु अष्टप्रधान के सभी सदस्य वंशानुगत होते थे और उन्हें राजा के सैन्य अभियानों में भाग लेना अनिवार्य था।
2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाते हुए माप की प्रणाली ('काठी' और 'मान') को अपनाया, तथा राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर) नामक कर वसूल करने की प्रणाली विकसित की।
3. मराठा नौसेना (Navy) का सुदृढ़ीकरण शिवाजी की एक दूरदर्शी सैन्य नीति का हिस्सा था, जिसके तहत उन्होंने कोलाबा, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा पश्चिमी तट पर जंजीरा के सिद्दी और विदेशी ताकतों (पुर्तगालियों और अंग्रेजों) की नौसैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
4. शिवाजी के उत्तराधिकार के काल में वर्ष 1731 में 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) के द्वारा छत्रपति और पेशवा के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हो गया, जिसके तहत कोल्हापुर के छत्रपति (संभाजी द्वितीय) और सतारा के छत्रपति (शाहू प्रथम) के बीच मराठा राज्य की संप्रभुता का औपचारिक बंटवारा हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को प्रसिद्ध दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) के साथ हुई थी, जिसमें वे साबरमती आश्रम से अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ 24 दिनों की यात्रा के बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचे थे।
2. ब्रिटिश सरकार द्वारा लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, क्योंकि सम्मेलन में भाग लेने से पूर्व ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने भारत को 'डोमीनियन स्टेटस' (औपनिवेशिक स्वराज्य) देने की औपचारिक घोषणा कर दी थी।
3. गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) के तहत सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसक अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
4. कराची में आयोजित कांग्रेस के वर्ष 1931 के ऐतिहासिक अधिवेशन (अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया तथा इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अलाउद्दीन खिलजी ने दुधारू पशुओं पर लगने वाले "चरी" कर का निर्धारण किस आधार पर किया था?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (जिसका शाब्दिक अर्थ गायहंता या वह है जो दूधोती है) शब्द का प्रयोग पुत्री के लिए किया जाता था, तथा इस समाज में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी थी, जहाँ वे वाद-विवाद में हिस्सा ले सकती थीं।
2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होने लगी और सभा तथा समिति का प्रभाव कम होने लगा, किंतु इस काल में 'गोत्र' प्रथा का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (गोशाला) पाला जाता था।
3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे जुताई, बुай, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा वर्णित है, जो गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्य संस्कृति के विस्तार का प्रमाण देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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