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History of India
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनसे संबंधित संस्थाओं तथा उनके वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का पूर्ण बहिष्कार किया तथा उपनिषदों के तार्किक व एकेश्वरवादी दर्शन पर विशेष बल दिया।
- 2. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में हुए वैचारिक मतभेदों के परिणामस्वरूप वर्ष 1866 में देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी।
- 3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और जन्मजात जाति व्यवस्था, बाल विवाह तथा मूर्तिपूजा का तीव्र खंडन किया।
- 4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बॉम्बे में की थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 19वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों ने भारतीय समाज से रूढ़िवादिता, अंधविश्वास और कुप्रथाओं को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई। राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित ब्रह्म समाज ने एकेश्वरवाद को बढ़ावा दिया, वहीं केशव चंद्र सेन और देवेंद्रनाथ ठाकुर के बीच मतभेदों के चलते 1866 में आदि ब्रह्म समाज का गठन हुआ। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के माध्यम से वेदों की सर्वोच्चता स्थापित की और सामाजिक कुरीतियों का कड़ा विरोध किया। इसके अतिरिक्त, बंबई में स्थापित प्रार्थना समाज ने सामाजिक सुधारों, विशेषकर महिला उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पारित किया गया।
2. बंगाल का विभाजन 16 अक्टूबर 1905 को प्रभावी हुआ, जिसे पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया; इस दिन लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले, 'अमर सोनार बांग्ला' गीत गाया और एक-दूसरे के हाथों पर एकता के प्रतीक के रूप में 'राखी' बांधी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई, जिसके पहले प्राचार्य अरविंद घोष को नियुक्त किया गया था, तथा राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए 'बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट' की भी स्थापना की गई।
4. कांग्रेस के वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन (अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले) और 1906 के कलकत्ता अधिवेशन (अध्यक्षता दादाभाई नौरोजी) में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ, और चरमपंथियों द्वारा इसे पूरे देश में फैलाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोहियों के नेतृत्व तथा उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और उनके नेतृत्व को कुचलने के लिए ब्रिटिश जनरल कैंपबेल ने अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक दी थी।
2. रोहेलखंड की राजधानी बरेली में खान बहादुर खान ने सरकार का गठन कर स्वयं को नवाब घोषित किया था, किंतु अंततः ब्रिटिश जनरल कर्नल जोन्स और सर कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह को पूरी तरह कुचल दिया।
3. इलाहाबाद में लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जिन्हें बाद में ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील द्वारा अत्यंत क्रूरतापूर्वक पराजित कर दिया गया और इस प्रकार इलाहाबाद पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार हो गया।
4. इन तीनों केंद्रों पर विद्रोहियों के दमन के दौरान मौलवी अहमदुल्लाह शाह को युद्ध के मैदान में पराजित करने के बाद अंग्रेजों ने जीवित पकड़कर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति, उसके कारणों और विभिन्न ब्रिटिश तथा भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध मतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रसिद्ध इतिहासकार सर जॉन लॉरेنس और सी.आर. सीले ने 1857 के विद्रोह को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) करार दिया, जिसका उद्देश्य केवल सेना की व्यक्तिगत और व्यावसायिक ग्रीवांस (शिकायतों) का समाधान करना था, न कि कोई राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम।
2. वी.डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित ढंग से लड़ा गया 'भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' घोषित किया, जबकि अशोक मेहता ने इसे राष्ट्रीय विद्रोह माना।
3. इतिहासकार टी.आर. होम्स के अनुसार 1857 का यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का संघर्ष था, और जे.डब्लू. के (J.W. Kaye) ने इसे 'असंतोष की ज्वाला' कहा जो ब्रिटिश साम्राज्य के कुप्रशासन का परिणाम था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के कठोर दमन चक्र के तहत गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना (Infantry) के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा के क्षेत्रों में यूरोपीय अधिकारियों तथा अफीम एजेंटों के विरुद्ध स्थानीय सिपाहियों, अफीम गोदाम के कर्मचारियों और भूमिहीनों ने अंग्रेजों के संचार साधनों को बाधित करते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया था।
4. छपरा में विद्रोहियों ने कमिश्नर विलियम टेलर को पराजित कर शहर पर पूर्ण अधिकार कर लिया था और वहां एक समानांतर ब्रिटिश-विरोधी सरकार की औपचारिक स्थापना की घोषणा कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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