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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके संगठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार तीर्थंकर मल्लिनाथ एक पुरुष थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार वे एक स्त्री थीं।
  2. 2. बौद्ध धर्म में 'प्रतीतसमुत्पाद' (प्रतीत्यसमुत्पाद) का सिद्धांत कार्य-कारण संबंध को स्पष्ट करता है, जिसके अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु किसी कारण से उत्पन्न होती है और उसी पर निर्भर करती है।
  3. 3. जैन धर्म में आत्मा के अस्तित्व को पूर्णतः अस्वीकार किया गया है, जबकि बौद्ध धर्म में 'अनात्मवाद' के सिद्धांत के साथ-साथ पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत को भी स्वीकार किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार उन्नीसवें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री (कुमारी मल्लि) थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय उन्हें पुरुष मानता है। कथन 2 सत्य है; बौद्ध दर्शन का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (देखें: विकिपीडिया संदर्भ) सभी घटनाओं के सापेक्षित और कारण-आधारित होने की व्याख्या करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि जैन धर्म आत्मा (जीव) के अस्तित्व को स्वीकार करता है, जबकि बौद्ध धर्म 'अनात्मवाद' (स्थायी आत्मा का अभाव) का प्रतिपादन करते हुए भी कर्म और पुनर्जन्म को मानता है।
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