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History of India
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तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818) का तात्कालिक कारण क्या था?

Detailed Explanation

पिंडारियों के दमन के बहाने मराठा शक्ति को समाप्त करना मुख्य कारण था।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष तथा बेगम हजरत महल एवं मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी। 3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक सुधारों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए 'दाग' (घोड़ों को दागना) और 'चेहरा' (सैनिकों का हुलिया दर्ज करना) प्रणाली की शुरुआत की तथा सैनिकों को नकद वेतन देने की परंपरा को अनिवार्य बनाया। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से दौलतगढ़ (देवगिरि) स्थानांतरित की और राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलवाए, जिन्हें सोने और चांदी के सिक्कों के समकक्ष मान्यता दी गई। 3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने किसानों को राहत देने के लिए तक्क़वी (सौंदल) ऋणों को पूरी तरह से माफ कर दिया तथा सिंचाई के विकास के लिए पाँच बड़ी नहरों का निर्माण करवाया और 'हक-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर लगाया। 4. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में पहली बार शुद्ध अरबी के सिक्के—चांदी का टंका और तांबे का जीतल—प्रचलित किए तथा 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और उसकी प्रकृति के संबंध में विभिन्न विचारकों द्वारा दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेंजामिन डिजरायली (Benjamin Disraeli) ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का विद्रोह केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न होकर एक राष्ट्रीय विरोध (National Revolt) था, क्योंकि इसके व्यापक समर्थन में ग्रामीण जनता और पारंपरिक समाज भी शामिल था। 2. इतिहासकार लॉरेंस और सीले (Sir John Seeley) ने इसे पूर्णतः 'स्वदेशी और देशभक्ति से रहित एक स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका भारतीय जनता से कोई सरोकार नहीं था। 3. बीडी सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इसे सुनियोजित और संगठित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया, जबकि डॉ. आरसी मजूमदार ने इसे 'न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम' माना। 4. कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने इसे केवल सामंती तत्वों का प्रतिक्रियावादी संघर्ष माना, जिसे आधुनिकता और प्रगति के विरुद्ध पारंपरिक शक्तियों की अंतिम छटपटाहट बताया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, 'अष्टप्रधान' (Ashtapradhan) मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य अनिवार्य रूप से सैन्य सेवा प्रदान करते थे और आवश्यकता पड़ने पर युद्ध के मैदान में सेना का नेतृत्व भी करते थे, क्योंकि शिवाजी महाराज ने किसी भी पद को वंशानुगत नहीं बनाया था। 2. 'पेशवा' (Mukhya Pradhan) मंत्रिपरिषद का सर्वोच्च अधिकारी होता था, जो राजा की अनुपस्थिति में प्रशासनिक और राजकीय कार्यों की देखरेख करता था, किंतु सेना का सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ 'सेनापति' या 'सर-ए-नौबत' होता था। 3. 'अमात्य' या 'मजूमदार' राज्य के आय-व्यय (राजस्व और वित्त) का लेखा-जोखा रखता था, जबकि 'वाक्यनवीस' (Mantri) राजा के दैनिक कार्यों और दरबार की बैठकों तथा गुप्तचर विभाग के अभिलेखों को सुरक्षित रखता था। 4. 'सुमंत' या 'दबीर' विदेश मंत्री का कार्य करता था जो विदेशी राज्यों के साथ संबंध और युद्ध-संधि के मामलों में राजा को सलाह देता था, तथा 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' धार्मिक मामलों और न्याय व्यवस्था के सर्वोच्च पद थे, जिनमें पंडितराव सैन्य न्याय का प्रमुख होता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारें (Parallel Governments) स्थापित हुईं, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, तामलुक में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं। 2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से गुप्त रूप से निकलकर (ग्रेट एस्केप) रूस के रास्ते जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने बर्लिन में 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और वहीं से सर्वप्रथम महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था। 3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का सर्वोच्च नेतृत्व अक्टूबर 1943 में सुभाष चंद्र बोस को सौंपा गया, जिन्होंने सिंगापुर में ही 'आर्गांई सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) यानी स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया था। 4. आज़ाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजीमेंट' के गठन का मुख्य श्रेय शाहनवाज खान को जाता है, तथा इस सेना ने जापानी सेना के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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