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History of India
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नाना फड़नवीस की मृत्यु किस वर्ष हुई थी, जिसके बारे में कर्नल पामर ने कहा कि "उनके साथ मराठों की सारी बुद्धिमत्ता चली गई"?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
नाना फड़नवीस की मृत्यु 1800 ई. में हुई थी।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में विद्रोही गतिविधियों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों के 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के बाद उन्होंने अनिच्छुक वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित कर दिया, जिससे इस स्थानीय सैनिक विद्रोह को एक प्रतीकात्मक अखिल भारतीय वैधता और वैधानिकता प्राप्त हुई।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण सम्राट के हाथों में न होकर 'न्याय परिषद' (Court of Administrators) के पास था, जिसमें मुख्य रूप से विभिन्न रेजिमेंटों के निर्वाचित सैनिक प्रतिनिधि शामिल थे और सम्राट की स्थिति केवल एक संवैधानिक व प्रतीकात्मक मुखौटे जैसी थी।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए जनरल जॉन निकलसन के नेतृत्व में कड़ा सैन्य अभियान चलाया गया, जिसके दौरान विद्रोही ताकतों के पराजित होने पर बहादुर शाह जफर ने लाल किले से भागकर मेहरावली में शरण ली, जहाँ से उन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
4. दिल्ली पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह, साजिश और हत्या का मुकदमा चलाया गया, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अमीर खुसरो की किस पुस्तक में अलाउद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों का विस्तृत वर्णन है?
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक वस्तु के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता के कारण किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से 'केवल एक ही दृष्टिकोण से' सत्य नहीं माना जा सकता, जबकि बुद्ध ने इसके विपरीत मध्यम प्रतिपदा (मझिम निकाय) का उपदेश दिया।
2. बौद्ध संघ की कार्यप्रणाली में लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया जाता था जहाँ प्रस्ताव (ज्ञाप्ति) रखने और उस पर मतदान (सलाका) कराने की एक सुनियोजित प्रक्रिया थी, किंतु इसके विपरीत जैन संघ में भिक्षुओं के लिए भिक्षुणी संघ पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखने का विशेष प्रावधान महावीर स्वामी ने स्वयं अपने जीवनकाल में ही स्थापित कर दिया था।
3. बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय में बुद्ध को एक अलौकिक देवता के रूप में पूजने की परंपरा शुरू हुई और बोधिसत्वों (जैसे अवलोकितेश्वर और मंजुश्री) की संकल्पना का विकास हुआ, जो स्वयं निर्वाण प्राप्त करने के बाद भी अन्य प्राणियों के उद्धार के लिए संसार में बने रहते हैं।
4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ भी मोक्ष प्राप्त करने की पूर्ण अधिकारी हैं और तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का खंडन करते हुए यह मानता है कि स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है और मोक्ष प्राप्ति के लिए पुरुष शरीर का होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'वज्जि' और 'मल्ल' संघ-राज्य (Republic) थे, जबकि बाकी अधिकांश महाजनपद राजतंत्रात्मक (Monarchical) व्यवस्था के अंतर्गत आते थे।
2. मगध साम्राज्य के उत्थान में हर्रक राजवंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कौशल, मद्र और लिच्छवि राजवंशों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए, और उसने अवंती के शासक चण्डप्रद्योत के बीमार पड़ने पर अपने राजवैद्य जीवक को उसकी सेवा के लिए भेजा था।
3. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (काकवर्ण) के शासनकाल में ही वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया था, और उसी के काल में मगध की राजधानी को स्थायी रूप से पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया गया था।
4. नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्र्रान्तक' (क्षत्रों का नाश करने वाला) और 'एकराट' कहा गया है, तथा खारवेल के हाथीगुंफा अभिलेख से कलिंग पर नंद वंश के नियंत्रण की पुष्टि होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक विकास, सैन्य सुधारों और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा आरंभ की गई 'मनसबदारी प्रथा' मंगोलों की दशमलव प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत स्तर और वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े और तीन घोड़े) की पदोन्नति व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने जात रैंक को बढ़ाए बिना ही अतिरिक्त घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति मिल गई थी।
3. शाहजहां के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत 'दहशाला' प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर 'नासक' या 'कंकूट' प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया, जिससे किसानों पर कर का बोझ कम हो गया और साम्राज्य की आय में भारी वृद्धि हुई।
4. औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के अंतर्गत वर्ष 1679 में पुनः 'जजिया कर' (Jizya Tax) को लागू किया गया, और इसके साथ ही उसने सम्राट के जन्मदिन पर वजन तौलने की पारंपरिक प्रथा 'तुलादान' (Jharokha Darshan और संगीत पर प्रतिबंध के साथ) को भी गैर-इस्लामिक घोषित कर समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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