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Child Development
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के शिक्षण के लिए 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा निम्नलिखित में से किस मुख्य मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण पर आधारित है?

Detailed Explanation

विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) समावेशी कक्षाओं की एक अनिवार्य शिक्षण रणनीति है, जो इस बात को स्वीकार करती है कि कक्षा में प्रत्येक छात्र की सीखने की गति, शैली और रुचियां भिन्न होती हैं। यह दृष्टिकोण मुख्य रूप से रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वाइगोत्स्की के विचारों से गहराई से जुड़ा हुआ है, विशेष रूप से उनके द्वारा प्रतिपादित 'समीपस्थ विकास के क्षेत्र' (Zone of Proximal Development या ZPD) के विचार पर आधारित है, जहाँ मचान (Scaffolding) के माध्यम से छात्रों को उनकी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार सहायता दी जाती है। इस विषय में विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों (Children with Special Needs) के शिक्षण अधिगम समायोजन के संदर्भ में, 'सार्वभौमिक रूप से डिज़ाइन किया गया शिक्षण' (Universal Design for Learning - UDL) का सिद्धांत निम्नलिखित में से किस मुख्य उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) की अंतिम अवस्था यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिमुखीकरण' (Universal Ethical Principle Orientation) का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक और दार्शनिक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → अधिगम के मनोविज्ञान में एडवर्ड थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) तथा बी.एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के तात्विक, क्रियात्मक और संरचनात्मक आधारों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इन दोनों सिद्धांतों के मध्य पाए जाने वाले मौलिक अंतरों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है? → सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के संदर्भ में, 'गुदा अवस्था' (Anal Stage, लगभग 1.5 से 3 वर्ष) के दौरान यदि माता-पिता द्वारा बच्चों को शौच-प्रशिक्षण (Toilet Training) अत्यधिक कठोरता या अत्यधिक अनुदारता के साथ दिया जाता है, तो फ्रायड के अनुसार बच्चे के वयस्क व्यक्तित्व में 'गुदा-धारण' (Anal-Retentive) चरित्र का विकास होता है। इस विशिष्ट चरित्र वाले व्यक्तियों में निम्नलिखित में से कौन से मनोवैज्ञानिक लक्षण और व्यवहार सबसे अधिक प्रबल रूप से दिखाई देते हैं? → सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों—विशेष रूप से गुदी अवस्था (Anal Stage) और फॉलिक अवस्था (Phallic Stage)—के दौरान होने वाले मनोवैज्ञानिक विकास, उनके संभावित संघर्षों (जैसे ऐनाल रिटेंटिव/एक्सप्यूसिव व्यक्तित्व और ओडिपस/इलेक्ट्रा ग्रंथि) तथा उनके वयस्कों में प्रकट होने वाले लक्षणों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों चरणों के मध्य पाए जाने वाले तात्विक और विकासात्मक अंतर को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
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