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Child Development
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अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) के संदर्भ में 'डिसग्राफिया' (Dysgraphia) और 'डिसप्रैक्सिया' (Dyspraxia) के बीच का सबसे सूक्ष्म एवं तथ्यात्मक अंतर निम्नलिखित में से कौन सा है?

Detailed Explanation

डिसग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता है जो व्यक्ति की लेखन क्षमता और सूक्ष्म पेशीय समन्वय (fine motor skills) को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, जिसके कारण हस्तलेखन खराब होना और वर्तनी की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। दूसरी ओर, डिसप्रैक्सिया (Dyspraxia) एक विकासात्मक समन्वय विकार (Developmental Coordination Disorder) है जो मस्तिष्क द्वारा शरीर की मांसपेशियों को निर्देश भेजने की क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे सूक्ष्म और स्थूल दोनों प्रकार के मोटर कौशल बाधित होते हैं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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अधिगम (Learning) के संदर्भ में एडवर्ड थार्नडाइक के 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness), इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) तथा बी. एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) की तात्विक और स्नायुवैज्ञानिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इन तीनों सिद्धांतों के अंतर्संबंधों और उनकी शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में निहित मान्यताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? इनमें से कौन-सी शारीरिक आवश्यकता बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है? व्यक्तित्व (Personality) के शील गुण (Trait) सिद्धांतों के अंतर्गत गार्डन एलपोर्ट (Gordon Allport) के 'व्यक्तिगत शील गुण' (Individual Traits) तथा रेमंड कैटल (Raymond Cattell) के 'स्रोत शील गुण' (Source Traits) के तात्विक और संरचनात्मक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई मनोवैज्ञानिक किसी व्यक्ति के व्यवहार को समझने के लिए उसके भीतर छिपे हुए मूल, मौलिक और स्थायी विन्यासों (जैसे 16PF प्रश्नावली द्वारा मापे जाने वाले कारक) की पहचान करता है, तथा दूसरी ओर एलपोर्ट द्वारा प्रतिपादित शील गुणों की त्रिपक्षीय श्रेणी—मुख्य (Cardinal), केंद्रीय (Central), और गौण (Secondary)—का अध्ययन करता है, तो इन दोनों सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है? गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत (सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत) के संदर्भ में, कोहलर द्वारा सुल्तान (चिम्पाजी) पर किए गए प्रयोगों और वुल्फगैंग कोहलर की इस अवधारणा का गहराई से विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अधिगम प्रक्रिया की तात्विक और संज्ञानात्मक प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? शैक्षणिक मूल्यांकन की प्रक्रिया में 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) के अंतर्गत 'आकलन' (Assessment) और 'मूल्यांकन' (Evaluation) दो भिन्न किंतु परस्पर पूरक अवधारणाएँ हैं। यदि एक शिक्षक कक्षा में विद्यार्थियों की अधिगम प्रक्रिया के दौरान निरंतर फीडबैक प्राप्त करने और शिक्षण रणनीतियों में सुधार करने के लिए नैदानिक परीक्षणों और फॉर्मेटिव टूल्स का उपयोग करता है, और सत्र के अंत में उनके समग्र निष्पादन व योग्यता के आधार पर ग्रेड या प्रमाण-पत्र प्रदान करता है, तो इन दोनों प्रक्रियाओं की प्रकृति और उनके बीच के मूलभूत अंतर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं विश्लेषणात्मक है?
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