त्वरित लिंक्स
Child Development
1 views
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की सबसे महत्वपूर्ण और परिपक्व विशेषता निम्नलिखित में से किसे माना जाता है, जो बच्चों में अमूर्त चिंतन और तार्किक परिकल्पनाओं के निर्माण की क्षमता को स्थापित करती है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, लगभग 11 या 12 वर्ष की आयु से शुरू होने वाली 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) किशोरों में उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन की शुरुआत का प्रतीक है। इस अवस्था की सबसे विशिष्ट खूबी 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) है, जिसके तहत किशोर किसी समस्या के समाधान के लिए विभिन्न संभावनाओं और परिकल्पनाओं का तार्किक ढंग से परीक्षण कर सकते हैं। इसके साथ ही वे बिना किसी ठोस या मूर्त वस्तु की उपस्थिति के केवल प्रस्तावों (Propositions) के आधार पर मानसिक निष्कर्ष निकालने में सक्षम हो जाते हैं। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
योग निर्धारण विधि (Summated Rating Scale) के प्रतिपादक कौन हैं?
→
AEP, 2005 का पूर्ण प्रपत्र है-
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, इस चरण की तात्विक और व्यवहारिक गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत और बाल-केंद्रित शिक्षा की अवधारणा का वास्तविक निहितार्थ निम्नलिखित में से क्या है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन मुख्य सिद्धांतों—अभिप्रेरणा के लिए बहुવિધ साधन, प्रतिनिधित्व के लिए बहुવિધ साधन, और अभिव्यक्ति के लिए बहुવિધ साधन—का गहन तात्विक और पेड़ागोजी संबंधी विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षक अपनी कक्षा में विभिन्न प्रकार की विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों (जैसे श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित और अधिगम अक्षम) की विविध अधिगम शैलियों को समायोजित करने के लिए इन सिद्धांतों को लागू करता है, तो UDL के दार्शनिक और क्रियात्मक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.