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Child Development
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शैक्षणिक संदर्भो में 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment) और 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) की प्रक्रियाओं का सूक्ष्म अवलोकन करने पर यह विदित होता है कि दोनों के शैक्षणिक निहितार्थ और उद्देश्य भिन्न हैं। इस परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन रचनात्मक आकलन की प्रकृति और उसकी कक्षा-कक्षीय उपयोगिता का सबसे सटीक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?

Detailed Explanation

रचनात्मक आकलन (Formative Assessment) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है जो सीखने के दौरान (Assessment for Learning) छात्रों की प्रगति की निरंतर निगरानी करता है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की कमजोरियों और भ्रांतियों का निदान करना तथा सुधारात्मक प्रतिपुष्टि (Feedback) प्रदान करना है। इसके विपरीत, योगात्मक मूल्यांकन (Summative Assessment) सत्र के अंत में उपलब्धियों का निर्धारण करता है (Assessment of Learning)। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage, लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की तात्विक और वैज्ञानिक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था में उभरने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) तथा 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष से वयस्कता) की सबसे विशिष्ट और उन्नत मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई बालक 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) में प्रवेश करता है, तो उसके चिंतन में कौन-सी प्रमुख तार्किक क्षमताएँ विकसित हो जाती हैं, जो उसे 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) के बालकों से भिन्न बनाती हैं? → मानव विकास के संदर्भ में, रोबर्ट प्लॉमिन (Robert Plomin) और अन्य行为 генетиков (Behavior Geneticists) द्वारा प्रतिपादित 'आनुवंशिक-पर्यावरण सह-संबंध' (Genotype-Environment Correlation) के सिद्धांतों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, 'निष्क्रिय आनुवंशिक-पर्यावरण सह-संबंध' (Passive Genotype-Environment Correlation), 'उत्तेजक/प्रतिक्रियाशील आनुवंशिक-पर्यावरण सह-संबंध' (Reactive/Evocative Genotype-Environment Correlation) और 'सक्रिय आनुवंशिक-पर्यावरण सह-संबंध' (Active Genotype-Environment Correlation या Niche-picking) के मध्य तात्विक भेदों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development) के अंतर्गत उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Morality) की अंतिम अवस्था यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिमुखीकरण' (Universal Ethical Principle Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, जब कोई व्यक्ति समाज द्वारा बनाए गए कानूनों या स्थापित नियमों से ऊपर उठकर अपने स्वयं के आंतरिक विवेक, मानवाधिकारों और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, और आवश्यकता पड़ने पर अन्यायपूर्ण कानूनों का सविनय अवज्ञा के माध्यम से विरोध करने के लिए तैयार रहता है, तो कोहलबर्ग के इस मॉडल के अनुसार यह अवस्था व्यक्ति के संज्ञानात्मक और नैतिक परिपक्वता के किस दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से दर्शाती है?
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