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Child Development
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत, संवेदी प्रसंस्करण विकार (Sensory Processing Disorder - SPD) से ग्रसित बालकों के लिए कक्षा-कक्षीय वातावरण का अनुकूलन करते समय 'संवेदी एकीकरण चिकित्सा' (Sensory Integration Therapy) तथा 'सार्वभौमिक डिजाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों का समन्वय करते हुए निम्नलिखित में से कौन-सा उपागम सर्वाधिक तार्किक और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी माना जाता है?

Detailed Explanation

समावेशी शिक्षा में संवेदी प्रसंस्करण विकार (SPD) से पीड़ित बालकों के लिए यह आवश्यक है कि उनके अधिगम परिवेश को इस प्रकार अनुकूलित किया जाए जो उनकी संवेदी आवश्यकताओं (चाहे वे संवेदी अतिसंवेदनशीलता हों या संवेदी अल्पसंवेदनशीलता) को संतुलित कर सके। बहु-संवेदी (Multi-sensory) उपागम और नियंत्रित संवेदी इनपुट के साथ UDL के सिद्धांतों का पालन करने से प्रत्येक छात्र को उसकी विशिष्ट क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर मिलता है। इस विषय पर अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मानव विकास के संदर्भ में परिपक्वता (Maturation) और अधिगम (Learning) के बीच के अंतःसंबंधों का विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों संकल्पनाओं की वास्तविक प्रकृति और उनके अंतःक्रियात्मक प्रभाव को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों के संदर्भ में, 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) के दौरान बच्चों में मल त्याग के नियंत्रण से जुड़ी अत्यधिक कठोर या बहुत अधिक उदार पेरेंटिंग (Toilet Training) का भविष्य के वयस्क व्यक्तित्व पर क्या सबसे प्रमुख और दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है? निम्नलिखित में से कौन सी अवस्था तथ्यों से संबंधित है ना कि भावनाओं एवं भवो से ? गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत (सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत) के अंतर्गत वोल्फगैंग कोहलर द्वारा प्रतिपादित 'परिसर का संज्ञानात्मक पुनर्गठन' (Cognitive Restructuring of the Perceptual Field) और 'अकस्मात् समाधान' (Aha! Experience) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई शिक्षार्थी किसी जटिल समस्या से जूझते हुए अचानक से सभी छितरी हुई परिस्थितियों और साधनों के आंतरिक संबंधों को एक समग्र दृष्टि में पिरोकर बिना किसी बाहरी यांत्रिक क्रमिक प्रयास के सीधे सही हल तक पहुँच जाता है, तो इस अधिगम प्रक्रिया के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है? जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान बच्चों में विकसित होने वाले 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी तार्किक चिंतन' (Combinatorial Reasoning) की सूक्ष्म गतिकी का विश्लेषण करने पर, यह चिंतन 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' की तार्किक क्षमताओं से किस प्रकार गुणात्मक रूप से भिन्न होता है?
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