BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
35 views

मुगल कैद से साहू महाराज को 1707 ई. में किस मुगल सम्राट ने मुक्त किया था?

Detailed Explanation

बहादुर शाह प्रथम ने साहू महाराज को कैद से मुक्त किया था।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बृजेश कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध करते हुए अंततः नेपाल की तराई में शरण ली। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में अहम भूमिका निभाई थी। 3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी लॉरेंस रेजिडेंसी की रक्षा करते हुए मारे गए थे, और बाद में सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट की सहायता से लखनऊ पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार स्थापित किया। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़वाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 50,000 रुपये का इनाम रखा था, और अंततः पुव्वयां (पवियाँ) के राजा जगन्नाथ सिंह के भाई द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण वे अंग्रेजों के हाथों मारे गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए संघर्षों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे बाद में ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। 2. दानापुर छावनी की 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुंचे, जहां उन्होंने जगदीशपुर के 80 वर्षीय जमींदार कुंवर सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा बनाया। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों और अफीम एजेंटों पर हमले किए गए, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान और मुजफ्फरपुर में स्थानीय ब्रिटिश विरोधी तत्वों ने संगठित होकर अंग्रेजी प्रशासन को गंभीर चुनौती दी थी। 4. कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने विद्रोह की कमान संभाली और कैमूर की पहाड़ियों (जुगसलाई और जंगल क्षेत्र) से ब्रिटिश सेना के खिलाफ छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का सफल नेतृत्व जारी रखा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, मनसबदारी प्रणाली और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रारंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और पद-प्रतिष्ठा को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को स्पष्ट करता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से मनसबदारों को अपने 'जात' पद को बढ़ाए बिना अधिक घुड़सवार सैनिक रखने की अनुमति दी गई। 3. शाहजहां के शासनकाल में स्थापत्य कला ने अपनी चरमोत्कर्ष अवस्था को प्राप्त किया, और उसके द्वारा सिजदा और पाइबॉस जैसी फारसी दरबारी परंपराओं को पुनः अनिवार्य कर दिया गया, जिन्हें अकबर ने समाप्त कर दिया था। 4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल में संगीत और चित्रकला को शाही दरबार से पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया, तथा उसने हिन्दू मंदिरों के निर्माण और उनके जीर्णोद्धार पर रोक लगाने के साथ-साथ जजिया कर को पुनः लागू कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक तथा ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, जिन्होंने अपनी कविताओं और भजनों के माध्यम से जाति व्यवस्था की कठोरता का विरोध किया और तमिल भाषा को लोक-साहित्य का माध्यम बनाया। 2. सूफी मत के 'चिश्ती सिलसिला' की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, जिनका मुख्य केंद्र अजमेर था, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण को स्वीकार करते हुए राजनीतिक पदों पर कार्य करना अनिवार्य माना। 3. उत्तर भारत में रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' की रचना अवधी भाषा में की, जो लोक-कल्याण और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों के माध्यम से समाज को संगठित करने का एक सशक्त माध्यम बनी। 4. महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में अमीर खुसरो उनके प्रिय शिष्य थे, जिन्होंने कव्वाली की शैली को विकसित करने और फारसी तथा हिंदी (हिन्दवी) के संलयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वैदिक साहित्य और समाज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म पर आधारित न होकर कर्म और व्यवसाय पर आधारित था, जिसका स्पष्ट प्रमाण नवें मंडल के दसवें सूक्त (पुरुष सूक्त) में मिलता है जहाँ विराट पुरुष के अंगों से चार वर्णों की उत्पत्ति का वर्णन है। 2. उत्तर वैदिक काल में गोत्र प्रथा की संस्था स्थापित हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (गोवंश) एक साथ पाला जाता था, और इस काल में एक ही गोत्र में विवाह करना वर्जित कर दिया गया था। 3. वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति के संदर्भ में, अपाला, घोषा, विश्ववारा और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की थी, और वे 'सभा' एवं 'समिति' जैसी राजनीतिक संस्थाओं की बैठकों में भी भाग लेती थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.