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Child Development
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थार्नडाइक के संयोजनवाद (Connectionism) के अंतर्गत 'अभ्यास के नियम' (Law of Use and Disuse), पावलव के शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) में 'विलोपन' (Extinction) की प्रक्रिया, और स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) में 'विभेदक पुनर्बलन' (Differential Reinforcement) की कार्यप्रणाली का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों संकल्पनाओं के बीच के तात्विक और क्रियात्मक अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
थार्नडाइक के संयोजनवाद में अभ्यास का नियम यह बताता है कि उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच का संबंध (S-R Bond) बार-बार के अभ्यास से मजबूत (उपयोग) या कमजोर (अनुपयोग) होता है। पावलव के शास्त्रीय अनुबंधन में 'विलोपन' तब होता है जब अननुबंधित उद्दीपक (भोजन) के बिना बार-बार केवल अनुबंधित उद्दीपक (घंटी) बजाया जाता है, जिससे अनुबंधित अनुक्रिया (लालास्राव) धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। वहीं, स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन में 'विभेदक पुनर्बलन' वह प्रक्रिया है जिसमें विशिष्ट वांछित व्यवहारों को पुनर्बलित किया जाता है और अन्य प्रकार के व्यवहारों को नजरअंदाज किया जाता है, जिससे शेपिंग और सटीक व्यवहार नियंत्रण संभव होता है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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