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History of India
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मुगल काल में "मदद-ए-माश" या "सुयुरगल" भूमि क्या थी?

Detailed Explanation

यह अनुदान विद्वानों और धार्मिक कार्यों के लिए लगान-मुक्त दिया जाता था।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन तथा उसके नेतृत्व से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद — मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा नेतृत्व और कर्नल नील द्वारा विद्रोह का क्रूर दमन 2. बरेली — खान बहादुर खान द्वारा नेतृत्व और सर कॉलिन कैंपबेल तथा बर्ड द्वारा विद्रोह का दमन 3. इलाहाबाद — लियाकत अली द्वारा नेतृत्व और जनरल जनरल नील द्वारा विद्रोह का दमन उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को पहला बड़ा व्यापारिक विशेषाधिकार 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी किए गए प्रसिद्ध 'शाही फरमान' के माध्यम से प्राप्त हुआ था, जिसके तहत कंपनी को ₹3000 के वार्षिक भुगतान पर बंगाल में कर-मुक्त व्यापार करने की अनुमति मिल गई थी। 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कासिम बाजार और कलकत्ता कारखानों की किलेबंदी करने के निर्णय से क्षुब्ध होकर बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला ने 1756 में कलकत्ता पर आक्रमण कर उस पर अधिकार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप 'ब्लैक होल ट्रेजेडी' की ऐतिहासिक घटना घटी। 3. प्लासी का युद्ध (1757) ब्रिटिश सेनापति रॉबर्ट क्लाइव और नवाब सिराजुद्दोला के बीच लड़ा गया एक ऐसा निर्णायक सैन्य संघर्ष था, जिसमें मीर जाफर के सैन्य विश्वासघात के कारण अंग्रेजों की जीत हुई और बंगाल में प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की नींव पड़ी। 4. बक्सर के युद्ध (1764) में हेक्टर मुनरो के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना ने बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दोला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को पराजित किया, जिसके परिणामस्वरूप रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट के साथ 'इलाहाबाद की प्रथम संधि' (1765) कर बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अधिकार अंग्रेजों को प्राप्त कर लिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' और 'आर्य समाज' के संस्थागत व वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानता को खुली चुनौती देते हुए शूद्रों, अतिशूद्रों और महिलाओं की बौद्धिक एवं सामाजिक स्वतंत्रता के लिए एक वैकल्पिक धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मध्यकालीन पुराणों और मूर्तिपूजा का समर्थन करते हुए वेदों को अपौरुषेय एवं त्रुटिहीन माना, तथा 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देकर समाज में शूद्रों और महिलाओं के लिए वेदों के अध्ययन के द्वार बंद कर दिए। 3. सत्यशोधक समाज ने जहाँ अपनी पत्रिका 'गुलामगिरी' और अन्य माध्यमों से जाति व्यवस्था के क्रूर शोषण का पर्दाफाश किया, वहीं आर्य समाज ने जाति व्यवस्था के जन्म-आधारित स्वरूप का खंडन करते हुए इसे गुण, कर्म और स्वभाव के आधार पर पुनर्गठित करने (वर्ण व्यवस्था) की वकालत की। 4. आर्य समाज द्वारा प्रारंभ किए गए 'शुद्धि आंदोलन' का मुख्य उद्देश्य उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाना था जिन्होंने किन्हीं कारणों से इस्लाम या ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि सत्यशोधक समाज ने इस प्रकार के धार्मिक पुनरुत्थानवादी अभियानों से पूर्णतः तटस्थ रहते हुए केवल राजनीतिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और शिवाजी के केंद्रीय प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने मराठा सेना में 'पागा' (राजकीय घुड़सवार सेना) और 'सिलहदार' (अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर आने वाले घुड़सवार) दोनों प्रकार की सेनाओं का गठन किया था, और पागा सैनिकों को अधिक प्रतिष्ठित तथा राज्य द्वारा सुसज्जित माना जाता था। 2. 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में 'सुमन्त' (या दबीर) का मुख्य कार्य विदेश मामलों और युद्ध-शांति के समय कूटनीतिक संबंधों की देखरेख करना था, जबकि 'वाक्यनवीस' (या मंत्री) का कार्य राजा के दैनिक कार्यों, गुप्तचर विभाग और दरबारी गतिविधियों का अभिलेख रखना था। 3. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व व्यवस्था में मलिक अंबर की राजस्व पद्धति के आधार पर भूमि की पैमाइश की नई इकाई 'काठी' को अनिवार्य बनाया, और पारंपरिक देशमुखों व पाटिल जैसे वंशानुगत राजस्व अधिकारियों को पूरी तरह समाप्त कर उनके स्थान पर सीधे सरकारी कारकुनों की नियुक्ति की। 4. मराठा प्रशासन में किलों (Forts) का रणनीतिक महत्व अत्यधिक था, और प्रत्येक महत्वपूर्ण किले पर सुरक्षा और प्रशासन की दृष्टि से तीन अधिकारी—हवलदार, सबनीस और कारखानीस—संयुक्त रूप से नियुक्त किए जाते थे, जिनमें से एक अधिकारी मराठा जाति का होना अनिवार्य नहीं होता था ताकि आपसी मिलीभगत को रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मराठा साम्राज्य के उत्कर्ष और छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित प्रशासनिक एवं राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा को पूर्णतः हतोत्साहित किया और उसके स्थान पर नगद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया, हालांकि सेना के बड़े सरदारों को 'सरनौबत' के माध्यम से भूमि अनुदान (सरदेशमुखी के अधिकार सहित) दिए जाते थे। 2. 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जो मराठा आधिपत्य को स्वीकार करते थे, और यह कर उस क्षेत्र के कुल भू-राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा होता था जिसके बदले मराठा शासक उस क्षेत्र की बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा (मुगल आक्रमणों से मुक्ति) की गारंटी देते थे। 3. 'सरदेशमुखी' एक प्रकार का अतिरिक्त कर (अधिशुलक) था जो कुल उपज का 10 प्रतिशत होता था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के अपने स्वराज्य क्षेत्र के साथ-साथ उन क्षेत्रों से भी वसूल करते थे जिन पर वे अपने वंशानुगत देशमुखी अधिकारों का दावा करते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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